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राजस्थान चुनाव 2018: महारानी के गढ़ में रोड शो करके बीजेपी को कैसे घेर रहे हैं राहुल गांधी?

राहुल झालरापाटन और कोटा दोनों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर राजे पर दबाव बनाना चाह रहे हैं

Updated On: Oct 23, 2018 05:28 PM IST

FP Staff

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राजस्थान चुनाव 2018: महारानी के गढ़ में रोड शो करके बीजेपी को कैसे घेर रहे हैं राहुल गांधी?
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राजस्थान में लगातार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ माहौल तैयार हो रहा है. कांग्रेस भी लगातार राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी पर हमलावर है. अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सीधे राजे के गढ़ में रोड शो के लिए जा रहे हैं.

राहुल गांधी 24 अक्टूबर यानी बुधवार को राजे की सीट झालावाड़ के झालरापाटन में 85 किलोमीटर लंबा रोड शो करने वाले हैं. राहुल गांधी झालावाड़ से कोटा तक रोड शो करने वाले हैं. इस दौरान वो तीन-तीन छोटी सभाओं को भी संबोधित करेंगे.

झालावाड़ और कोटा दोनों ओर से दबाव बना रहे हैं राहुल

राहुल गांधी के इस रोड शो पर इसलिए भी सबकी निगाहें हैं क्योंकि झालवाड़ वसुंधरा राजे का परंरागत गढ़ माना जाता है. झालरापाटन से वसुंधरा राजे तीसरी बार विधायक हैं और वह पांच बार झालावाड़ से सांसद भी रह चुकी हैं. राजे के बेटे दुष्यंत झलावाड़ सीट से तीसरी बार सांसद बने हैं. बीजेपी 2013 के विधानसभा चुनावों में झालावाड़ की सभी चारों सीटें पर जीती थी.

वहीं, कोटा में भी बीजेपी का मजबूत चुनावी इतिहास रहा है. कोटा संभाग में बीजेपी ने 2013 में 17 में से 16 सीटें जीती थीं. ऐसे में राहुल झालरापाटन और कोटा दोनों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर राजे पर दबाव बनाना चाह रहे हैं.

कांग्रेस को पता है कि राजस्थान में राज्य सरकार और दिल्ली के आलाकमान में ठनी हुई है. वसुंधरा का गुट राज्य में उनकी ही स्थिति को कमजोर कर रहा है, ऐसे में कांग्रेस तगड़ी रणनीति के तहत मैदान में उतर रही है.

राहुल गांधी का पिछले ढाई महीने में राजस्थान का चौथा दौरा है. नौ अक्टूबर को ही राहुल गांधी ने धौलपुर से दौसा के महुआ तक 150 किलोमीटर का रोड शो किया था. धौलपुर राजे का गृह जिला है. राजे धौलपुर की ही पूर्व महारानी है. ऐसे में कांग्रेस ने राजे की पहले गृह क्षेत्र धौलपुर में घेराबंदी की कोशिश की और अब उसके निशाने पर उनकी खुद की सीट है.

खास रणनीति पर काम कर रही है कांग्रेस

कांग्रेस के कैंपेन की एक खास बात ये भी है कि पार्टी रोड शो करके एक तीर से दो निशाने साध रही है. एक तरफ तो रैली करने का खर्च भी बच रहा है, दूसरे रोड शो के जरिए वो ज्यादा जगहों को कवर कर रहे हैं.

कांग्रेस हर सीट तक जाकर प्रचार कर रही है. और जहां तक मुख्यमंत्री की बात है, वहां कांग्रेस उन्हें पूरी तरह से दबाव में लाना चाहती है ताकि वो राज्य में बाकी सीटों पर ध्यान न दे सकें. कुछ इसी तरह की ही रणनीति कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में भी अपनाई है. रमन सिंह की सीट राजनंदगांव में उनके खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को उतारा है. वहां भी कांग्रेस की यही रणनीति काम कर रही है कि रमन सिंह के सामने इतना मजबूत उम्मीदवार उतारा जाए कि वो बाकी सीटों के प्रचार पर ध्यान ही न दे पाएं.

सुरक्षित सीट तलाशने लगी हैं राजे!

अगर मिल रही रिपोर्ट्स पर भरोसा करें तो कांग्रेस के दबाव का असर दिख रहा है. कहा जा रहा है कि राजे इस बार दूसरी सीट से लड़ने का विचार बना रही हैं. वो कोई ऐसी सीट ढूंढ रही हैं, जहां आसानी से चुनाव जीता जा सके.

बताया जा रहा है कि वसुंधरा के रडार पर जो 2 सीटें हैं, वो राजाखेड़ा और श्रीगंगानगर हैं. राजाखेड़ा राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित है. जबकि श्रीगंगानगर पंजाब सीमा से सटा हुआ है. अगर बीजेपी हाईकमान उनके इस फैसले से सहमत होता है, तो राजे 7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में 2 सीटों से भी लड़ सकती हैं.

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