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राजस्थान बीजेपी: विरोधाभासों से भरी हुई हैं प्रत्याशियों की दोनों लिस्ट

बहरहाल, अभी 38 नाम बाकी हैं और कइयों की सांसें इन नामों पर ही अटकी हुई हैं.

Updated On: Nov 15, 2018 07:45 PM IST

Mahendra Saini
स्वतंत्र पत्रकार

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राजस्थान बीजेपी: विरोधाभासों से भरी हुई हैं प्रत्याशियों की दोनों लिस्ट

राजस्थान में बीजेपी ने 31 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी है. 131 नामों की पहली लिस्ट इस हफ्ते की शुरुआत में जारी की गई थी. अब सिर्फ 38 नाम बाकी रह गए हैं. लेकिन कई हाई-फाई नामों का इंतजार काफी बड़ा हो गया है. डर है कि जब 200 में से 162 नामों में जगह नहीं बना पाए तो आगे भी क्या उम्मीद करें.

उम्मीदों और कयासों के बाजार गरम हैं. बीजेपी की अभी तक की रणनीति ने राजनीति में रुचि रखने वाले आम लोगों को ही नहीं खुद बीजेपी नेताओं को भी हैरान कर दिया है. कांग्रेस तो इतनी भौचक्की है कि वो शायद इसकी काट ढूंढने में जुटी है. तभी तो सोमवार को आने वाली लिस्ट का इंतजार इतना लंबा हो गया. खैर, कांग्रेस की बात अगले लेख में लेकिन फिलहाल बात बीजेपी की रणनीति और उठापटक की.

क्या बीजेपी विरोधाभासों का संगम बन गई है ?

इतिहासकारों ने मुहम्मद बिन तुगलक को विरोधाभासों के संगम की संज्ञा दी थी क्योंकि उनके फैसले योजना के उलट नतीजे देते थे. इसी चक्कर में जितनी जल्दी वे फैसले लागू करते थे उससे कहीं जल्दी उन्हें वापस ले लेते थे. उनके कई फैसले परस्पर विरोधी भी होते थे. राजस्थान में बीजेपी की ताजा चुनावी नीति भी परस्पर विरोधी नीतियों का संगम ही नजर आ रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

अपनी दूसरी लिस्ट में पार्टी ने रामगंज मंडी विधायक चंद्रकांता मेघवाल को केशोराय पाटन से टिकट दे दिया है. ये वही चंद्रकांता मेघवाल हैं जिन्होने पहली लिस्ट में नाम कटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था. इसी तरह से 2013 में जयपुर राजघराने की दीया कुमारी को राजनीति में खुद वसुंधरा राजे लेकर आई थीं. लेकिन अभी तक उनके नाम पर भी सस्पेंस बना हुआ है.

पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर कम से कम 4 पैराशूट उम्मीदवारों को टिकट दिया है. जबकि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के साथ आई गीता वर्मा को टिकट नहीं दिया गया है.

फिलहाल जो मुद्दा सबसे गरम है, वो है मुस्लिमों से किनारा करने का. अभी तक 162 नामों में एक भी मुसलमान शामिल नहीं है. यहां तक कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खासमखास और सरकार में नंबर 2 कहे जाने वाले युनूस खान तक पर सस्पेंस बना हुआ है. 5 बार के विधायक हबीबुर्रहमान ने तो टिकट न मिलने पर कांग्रेस ज्वाइन भी कर ली है.

मुस्लिम विहीन लिस्ट के बाद अंदाजा लगाया गया कि पार्टी शायद हार्डकोर हिंदुत्व के एजेंडे पर चल पड़ी है. लेकिन दूसरी लिस्ट के 31 नामों को देखकर हार्डकोर हिंदुत्व के पैरोकारों की जमीन भी खिसक गई है.

मुस्लिम विहीन लिस्ट, हिंदुत्ववादी भी गायब

दूसरी लिस्ट में मेवात इलाके के रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा और बांसवाड़ा विधायक धन सिंह रावत का पत्ता काट दिया गया है. लिस्ट में देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां का नाम भी नहीं है, जिसका इशारा हमने पिछले लेख में ही दे दिया था. लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात आहूजा और रावत का नाम नहीं होना ही है. पिछले कुछ दिनों में खासकर 2014 के बाद से ज्ञानदेव आहूजा हिंदुत्व पर काफी मुखर हो गए थे.

रामगढ़ उस अलवर जिले का हिस्सा है जो गौ हत्या, गौ रक्षकों की गुंडागर्दी और मॉब लिंचिंग के लिए लगातार खबरों में बना रहता है. ज्ञानदेव आहूजा ने बार-बार अपने बयानों में चेतावनी दी कि गौ तस्करी या गौ-कशीं नहीं रुकेगी तो भीड़ को भी किसी की हत्या कर देने से नहीं रोका जा सकता. आहूजा ने 'लव जेहाद' का बदला लेने के लिए मुस्लिम लड़कियों पर भी आपत्तिजनक बयान दिया था.

अलवर शहर के ही विधायक बनवारी सिंघल भी हिंदुत्व पर मुखर रहे हैं. उनका टिकट पहली लिस्ट में ही काट दिया गया था. इसी तरह, मंत्री धन सिंह रावत ने भी राजस्थान से मुसलमानों को बाहर निकालने के लिए बीजेपी को वोट देने का आह्वान किया था. अब खुद उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. अभी तक संघ से जुड़े पदाधिकारी हार्डकोर हिंदुत्व के एजेंडे की बात कर रहे थे. लेकिन संघ चहेतों की टिकट कटने के बाद सभी ने चुप्पी साध ली है.

gyan dev aahuja

हालांकि ज्ञानदेव आहूजा की टिकट कटने की वजह मॉब लिंचिंग के समर्थन के बजाय वसुंधरा राजे से खटपट ज्यादा लगती है. वे मुख्यमंत्री की गुडबुक्स में नहीं थे. पिछले दिनों उन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए विधायकी को छोड़कर बाकी सभी पदों से इस्तीफा भी दे दिया था. फिर भी मुस्लिम बहुल इलाके में मुखर हिंदुत्व के कारण उनकी टिकट पक्की मानी जा रही थी.

बेटिकट मंत्रियों को आखिर मिला इनाम

पहली लिस्ट में बाहर रहे उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत और चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने बुधवार को ही मुख्यमंत्री आवास पंहुचकर मुलाकात की थी. अब दूसरी लिस्ट में नाम आने के बाद दोनों ने ही राहत की सांस ली है. राजपाल सिंह शेखावत तो टिकट मिलने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने भी पहुंचे. हालांकि मुस्लिम को टिकट न मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि पार्टी की ऐसी कोई नीति नहीं है.

बहरहाल, अभी 38 नाम बाकी हैं और कइयों की सांसें इन नामों पर ही अटकी हुई हैं. देखना है कि क्या पार्टी उत्तर प्रदेश की तरह बिनी किसी मुस्लिम चेहरे के ही मैदान में उतरेगी या पीडब्लूडी मंत्री युनूस खान की अटकी गाड़ी चल निकलेगी. फिलहाल, बीजेपी ने 2 लिस्ट जारी कर कांग्रेस से तो बढ़त ले ही ली है.

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