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राजस्थान: फ्लॉप साबित हुई करणी सेना की हुंकार रैली, ज्यादातर कुर्सियां रहीं खाली

करणी सेना ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुंकार रैली का आयोजन किया था लेकिन उस रैली में भीड़ नहीं जुट पाई.

Updated On: Oct 27, 2018 08:20 PM IST

FP Staff

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राजस्थान: फ्लॉप साबित हुई करणी सेना की हुंकार रैली, ज्यादातर कुर्सियां रहीं खाली
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक दल अपने प्रचार में और दूसरी पार्टियों पर निशाना साधने में जुट गए हैं. ऐसे में श्री राजपुत करणी सेना भी पीछे रहने वालों में से नहीं है. राजपुत करणी सेना भी राजस्थान में चुनाव के मद्देनजर रैलियां कर रही है लेकिन करणी सेना रैलियों में भीड़ जुटाने में नाकाम साबित हो रही है.

करणी सेना ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुंकार रैली का आयोजन किया. हालांकि करणी सेना की ये हुंकार रैली फ्लॉप रैली साबित हुई. इस रैली में ज्यादातर सीटें खाली ही पड़ी रहीं. राजपुत करनी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने जयपुर के विद्याधर नगर में हुंकार रैली का ऐलान किया था और दावा किया था कि हजारों लोगों की मौजूदगी में करणी सेना आने वाले चुनावों के लिए प्रस्ताव पास करेगी कि वो चुनावों में किसे समर्थन देगी. इसके लिए बकायदा तैयारियां भी जबरदस्त की गई थी और विद्याधर नगर स्टेडियम में हजारों की तादाद में कुर्सियां लगाकर विशाल पंडाल लगाया गया था लेकिन करणी सेना के आयोजन पर तब पानी फिर गया जब इस कार्यक्रम में आगे की पंक्तियां भी नहीं भर सकी.

40-45 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा होने का आह्वान करने वाले आयोजक खुद भीड़ का इंतजार करते हुए नजर आए. संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने कहा कि करवा चौथ होने के चलते राजपुत महिलांए बाहर नहीं निकली, लेकिन सभा में आई संख्या से किसी समाज की ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. कालवी ने इस दौरान कहा कि वो आगामी चुनावों में समता आंदोलन, समानता मंच को समर्थन देंगे और उनके मिशन 59 में सहयोग करते हुए सभी रिजर्व सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे और जो उम्मीदवार होगा वो एसटी/एससी कानून में हुए संशोधन का विरोध करेगा. कालवी ने कहा कि फिलहाल उनकी मांग केवल इतनी है कि एसटी/एससी कानून पर जो फैसला कोर्ट का आया था उसे सरकार अपने अध्यादेश को रद्द कर लागू करे.

रुख तय होगा

राजपूत करणी सेना आगामी विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित राज्य की 59 सीटों पर समता आंदोलन के प्रत्याशियों का समर्थन करेगी. समता आंदोलन समिति ने इस फैसले का स्वागत किया है. राज्य की 200 में से बाकी 141 सीटों के बारे में उन्होंने कहा कि करणी सेना नवंबर के पहले पखवाड़े में अपना रुख तय करेगी. उन्होंने कहा, 'आज सबसे ज्यादा जरूरत अगर किसी बात की है तो वह है आरक्षित को संरक्षण, उपेक्षित को आरक्षण. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तो इसकी बात करते हैं लेकिन बीजेपी कोई फैसला नहीं कर पा रही है. धारा 370 का मामला अदालत में है. राम मंदिर का मामला अदालत में है. एससी एसटी कानून का मामला जो अदालत में था उसे कोर्ट से बाहर जाकर तय करने का जो पाप किया गया है उसी के खिलाफ हम चाह रहे हैं कि कोई फैसला किया जाए.'

उन्होंने कहा, 'श्री राजपूत करणी सेना खुद राजनीतिक तौर पर कहीं भागीदारी नहीं करेगी बल्कि वह बराबर आंदोलनरत रहेगी और अब राजनीतिक लड़ाई लडने वालों का समर्थन करेगी.' वहीं समता आंदोलन समिति के अध्यक्ष पराशर नारायण शर्मा ने श्री राजपूत करणी सेना के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश की राजनीति को बदलने वाला कदम करार दिया है. उन्होंने बताया कि पार्टी ने ‘मिशन 59’ के तहत एससी के लिए आरक्षित 59 में से 20 सीटों के लिए प्रत्याशी तय कर लिए हैं जबकि बाकी सीटों पर भी जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा.

फिल्म पद्मावत से बटोरी थीं सुर्खियां

इससे पहले राजपुत करणी सेना बॉलीवुड फिल्म पद्मावत के विरोध को लेकर काफी सुर्खियों में रही थीं. करणी सेना ने पद्मावत फिल्म के रिलीज न होने को लेकर देश के कई कोनों में उत्पात मचाया था. इस फिल्म के विरोध के लिए करणी सेना ने देश भर में सिनेमाघर समेत कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी जैसी वारदातों को अंजाम दिया था. करणी सेना के सदस्यों ने फिल्म का विरोध करने के लिए हर रास्ता अपनाया. बावजूद इसके इस फिल्म को रिलीज कर दिया गया. हालांकि उस दौरान करणी सेना ने काफी रैलियां की थी और अच्छी-खासी भीड़ जुटाने में भी कामयाबी हासिल की थी. उस वक्त करणी सेना ने फिल्म रिलीज को लेकर इसका परिणाम चुनावों में भुगतने की बात कही थी लेकिन हाल की रैली में भीड़ न जुटा पाने से करणी सेना बैकफुट पर जरूर दिखाई दी.

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