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राजस्थान विधानसभा चुनाव: बीजेपी ने पहली लिस्ट से चौंकाया, हारे हुए कई चेहरों पर दोबारा खेला दांव

सवाल उठ रहे हैं कि इन नामों को टिकट देने में कौन सा पैमाना या क्राइटेरिया देखा गया

Updated On: Nov 13, 2018 02:59 PM IST

FP Staff

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राजस्थान विधानसभा चुनाव: बीजेपी ने पहली लिस्ट से चौंकाया, हारे हुए कई चेहरों पर दोबारा खेला दांव

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की जैसे ही पहली लिस्ट जारी होती है तो कहीं खुशी कहीं गम का माहौल बन जाता है. वो विधायक चौंक पड़ते हैं जिनका टिकट कट जाता है तो वो चेहरे खिल जाते हैं जिनको खुद भी टिकट मिलने की उम्मीद कम थी लेकिन जुगत-जुगाड़ से उम्मीद जगी हुई थी. बीजेपी की पहली लिस्ट में शामिल कुछ नामों ने सभी को चौंकाया है. सवाल उठ रहे हैं कि इन नामों को टिकट देने में कौन सा पैमाना या क्राइटेरिया देखा गया. लेकिन टिकट पाने के बाद ये चेहरे खुद को मुकद्दर का सिकंदर समझ रहे हैं.

नसीराबाद से बीजेपी प्रत्याशी-रामस्वरूप लांबा रामस्वरूप लांबा की पहचान खुद से कम पिता से ज्यादा है. वो पूर्व मंत्री और दिवंगत नेता सांवरलाल जाट के बेटे हैं. सांवरलाल जाट के निधन के बाद बीजेपी ने सहानुभूति लहर का फायदा उठाने के लिए  रामस्वरूप लांबा को अजमेर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में लड़ाया था. लेकिन इन चुनावों में रामस्वरूप खुद की साख भी बना नहीं पाए और पार्टी को भी करारी हार दिला दी. लेकिन अब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर सांवरलाल जाट की सियासत को संभालने के लिए रामस्वरूप लांबा को नसीराबाद से टिकट थमा दिया है.

आमेर से बीजेपी प्रत्याशी सतीश पूनिया

राजस्थान में बीजेपी के बड़े नेताओं में सतीश पूनिया शुमार करते हैं. हाल के दिनों में पार्टी के टिकट वितरण में भी सक्रिय देखे गए. अब सतीश पूनिया को चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी पार्टी ने सौंपी है. बीजेपी की पहली लिस्ट में आमेर विधानसभा सीट से पूनिया को प्रत्याशी बनाया गया है. संघ पृष्ठभूमि के पूनिया मोदी लहर के बावजूद पिछला चुनाव हार गए थे. लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने उन पर फिर से भरोसा जताया है.

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बाड़मेर से बीजेपी प्रत्याशी कर्नल सोनाराम

कर्नल सोनाराम को कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने का ईनाम भी मिला. बीजेपी ने उन्हें बाड़मेर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है. कर्नल सोनाराम चौधरी 4 बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके है. साल 2013 में बायतु से कांग्रेस के बैनर से विधानसभा चुनाव लड़े थे लेकिन बीजेपी के कैलाश चौधरी के सामने हार का सामना करना पड़ा. चार महीने बाद वो कांग्रेस को छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.

सादुलपुर से बीजेपी प्रत्याशी रामसिंह कस्वां

सादुलपुर विधानसभा सीट से इस बार बीजेपी ने 72 वर्षीय रामसिंह कस्वां पर दांव खेला है. पिछली बार इस सीट पर राम सिंह कस्वां की पत्नी कमला कस्वां त्रिकोणीय मुकाबले में बीएसपी के मनोज न्यांगली से हार गई थी. लेकिन इस बार कमला कस्वां का टिकट काटकर बीजेपी ने इनके पति राम सिंह कस्वां पर दांव खेला है. राम सिंह कस्वां 4 बार सांसद रह चुके है. 13 बार लगातार सरपंच रहे है. वहीं 1998 में इसी सीट से विधायक का चुनाव भी जीते हैं. वर्तमान में इनके बेटे राहुल कस्वां चुरू से सांसद है.

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