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वसुंधरा के खिलाफ नाराजगी की किस हद तक भरपाई कर पाएंगे मोदी?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपने किले को बचाने के लिए बीजेपी ने पूरा जोर लगा दिया है.

Updated On: Dec 04, 2018 09:32 PM IST

Amitesh Amitesh

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वसुंधरा के खिलाफ नाराजगी की किस हद तक भरपाई कर पाएंगे मोदी?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में मतदान में महज तीन दिन का वक्त बचा है. 7 दिसंबर को राज्य की सभी 200 सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होना है, जिसके लिए चुनाव प्रचार बुधवार 5 दिसंबर को खत्म हो रहा है. लेकिन, राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपने किले को बचाने के लिए बीजेपी ने पूरा जोर लगा दिया है.

चुनाव प्रचार की शुरुआत में राजस्थान में पार्टी नेता इस बात को मान रहे थे कि किसी भी तरह से राज्य में पार्टी के लिए अपनी लाज बचानी मुश्किल होगी लेकिन, धीरे-धीरे जैसे ही चुनाव प्रचार जोर पकड़ा, पार्टी के भीतर हालात सुधरने के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. पार्टी के रणनीतिकार अब दावा कर रहे हैं कि पार्टी की हालत काफी बेहतर हुई है और जो चुनाव पहले एकतरफा दिख रहा था, उसमें बीजेपी वापस लड़ाई में आ गई है.

Vasundhara

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, पहले बीजेपी को डर था कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ गुस्से से कहीं पार्टी का सू़पड़ा साफ न हो जाए, जिसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति बदलकर सम्मानजनक प्रदर्शन के लिए चुनाव अभियान को काफी तेज किया. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का धुंआधार चुनाव प्रचार और चुनाव की कमान खुद अपने हाथों में लेकर बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के लिए रणनीति तैयार करना और बेहतर चुनावी मैनेजमेंट ने पार्टी के हालात को काफी हद तक बेहतर किया है. संघ के सहयोग ने भी बीजेपी के लिए काफी हद तक मुश्किलें कम की हैं.

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चुनाव मैनेजमेंट के दम पर लड़ाई में वापस लौटने का दावा कर रही बीजेपी के भीतर जगी आस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने अपने सबसे बड़े स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ा दी. जी-20 के सम्मेलन से वापस लौटने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार तीन दिन चुनावी रैलियों को संबोधित किया.

बीजेपी के एक नेता ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि राजस्थान में हालात में हो रहे सुधार के बाद पार्टी ने रणनीति के तहत प्रधानमंत्री की रैलियों की संख्या को बढ़ाया है. प्रधानमंत्री ने 3, 4 और 5 दिसंबर को लगातार आखिरी तीन दिनों में धुंआधार चुनाव प्रचार कर माहौल को बीजेपी के पाले में लाने की कोशिश की है. दरअसल बीजेपी मानती है कि आखिरी दो-तीन दिनों में लगभग चार से पांच फीसदी तक वोटर अपना निर्णय लेता है कि किस पार्टी के साथ जाना है. बीजेपी अपनी रणनीति के तहत इसी तबके को आखिरी क्षण में अपने पाले में लाने में लगी है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में बीजेपी के खिलाफ नहीं बल्कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ लोगों में गुस्सा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लोग नाराज नहीं हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बात की तस्दीक उन नारों से भी हो जाती है, जिसमें कहा जा रहा है कि 'मोदी तुझसे बैर नहीं, पर रानी तेरी खैर नहीं.' बीजेपी को भी उम्मीद है कि मोदी की अधिक रैलियों से अंतिम क्षण में निर्णय लेने वाला मतदाता बीजेपी के पक्ष में आ सकता है.

Ajmer: Prime Minister Narendra Modi speaks with Rajasthan Chief Minister Vasundhara Raje and MoS Arjun Ram Meghwal during 'Vijay Sankalp Sabha', in Ajmer, Saturday, Oct 6, 2018. (PTI Photo) (PTI10_6_2018_000050B)

दरअसल, बीजेपी की चिंता विधानसभा चुनाव से ज्यादा लोकसभा चुनाव को लेकर है. अगर विधानसभा चुनाव में पार्टी का सफाया हो गया तो राजस्थान में लोकसभा चुनाव में उसका सीधा असर हो सकता है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि अब पार्टी कांग्रेस के मुकाबले राजस्थान में लड़ाई में आ गई है जिसके बाद चुनाव में पार्टी की अगर हार भी होती है तो वो एकतरफा नहीं होगी. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने अपने सबसे बड़े चेहरे को मैदान में उतार दिया है.

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