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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: बीजेपी को बड़ा झटका, सांसद हरीश मीणा ने थामा कांग्रेस का हाथ

हरीश ने दिल्ली में कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली

Updated On: Nov 14, 2018 08:12 PM IST

FP Staff

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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: बीजेपी को बड़ा झटका, सांसद हरीश मीणा ने थामा कांग्रेस का हाथ

राजस्थान बीजेपी को चुनाव से पहले सांसद हरीश मीणा ने बड़ा झटका दिया है. उन्होंने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. हरीश मीणा राजस्थान के दौसा से सांसद हैं. किरोणीमल मीणा को बीजेपी में शामिल करने की वजह से हरीश मीणा नाराज चल रहे थे. इससे पहले मंगलवार को नागौर से विधायक हबीबुर्रहमान ने भी बीजेपी छोड़ने का ऐलान किया था. तमाम अटकलों के बाद उन्होंने भी बुधवार को कांग्रेस ज्वाइन कर ली.

हरीश ने दिल्ली में कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. दिलचस्प बात यह है कि हरीश के भाई नमोनारायण मीणा दौसा से ही कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं.

हरीश मीणा आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं. जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी तब वह राजस्थान पुलिस के डीजीपी थे. कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मीणा के बीजेपी छोड़ने पर खुशी जताते हुए कहा, 'मैं खुश हूं कि हरीश मीणा ने कांग्रेस में ऐसे समय में शामिल होने का फैसला लिया. मैं तहे दिल से उनका कांग्रेस में स्वागत करता हूं.'

इस मौके पर सांसद हरीश मीणा ने कहा, 'कांग्रेस मेरा घर है और मैं अपने घर में वापस आया हूं. मैं बिना किसी शर्त के, कांग्रेस में शामिल हुआ हूं.' वहीं सचिन पायलट ने कहा, 'मीणा का परिवार पुराना कांग्रेसी रहा है और उनके आने से पार्टी को ताकत मिलेगी.'

बगावत का झंडा वे लोग उठाए हुए हैं, जिनका टिकट कटा है. विरोध के सुर उन लोगों के भी हैं, जिनके राजनीतिक दुश्मन को टिकट मिल गया है. अभी तो बीजेपी की पहली लिस्ट जारी हुई है और 69 नाम अभी बाकी हैं. आशंका है कि दूसरी लिस्ट के बाद बागियों की संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी. पहली लिस्ट में जयपुर के मालवीय नगर से मौजूदा चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, झोटवाड़ा से उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत और चुरू की रतनगढ़ सीट से देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां का नाम नहीं है. इनका रिपोर्ट कार्ड भी पॉजिटिव नहीं बताया गया है.

राजकुमार रिणवां समर्थकों ने तो टिकट कटने की आशंका में अभी से बवाल काटना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर चल रहे कैंपेन में रिणवां समर्थकों ने बीजेपी की ईंट से ईंट बजा देने का दावा कर दिया है. उधर, सीकर की खंडेला सीट से चिकित्सा राज्यमंत्री बंशीधर बाजिया को फिर से टिकट मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने नाखुशी जताई है. बाजिया को 'इनएक्टिव' करार दे रहे कार्यकर्ताओं ने हराने का ऐलान कर दिया है.

मेवाड़ संभाग का भी यही हाल है. उदयपुर सीट से गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया संघ के चहेते हैं. लेकिन उन्हे फिर से टिकट दिए जाने के बाद कार्यकर्ताओं के एक गुट में और जनता सेना के नाम से अलग संगठन बना चुके रणधीर सिंह भिंडर के साथ-साथ खुद कटारिया के समधी भी उनके विरोध में उठ खड़े हुए हैं. जयपुर ग्रामीण लोकसभा की बची हुई सीटों मसलन कोटपूतली, जमवा रामगढ़ पर भी पार्टी को भारी बगावत का अंदेशा है.

बहरहाल, पार्टी को बगावत का अंदेशा पहले से ही था. इसी डर के चलते पहले जहां 100 विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा थी, वो गिरकर 2 दर्जन सीटों पर सिमट गई है. शुरुआती बगावत को देखते हुए पार्टी तुरंत डैमेज कंट्रोल में भी जुट गई है. सोमवार शाम को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बंगले पर हुई कोर कमेटी की बैठक में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई.

लेकिन मामला इतनी आसानी से सुलझने वाला लग नहीं रहा है. इस बार वैसे ही बीजेपी को सत्ता बचाए रखने के लिए नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं. अभी तक के तमाम ओपिनियन पोल बीजेपी की स्पष्ट हार का संकेत कर रहे हैं. हालांकि पिछले एक महीने में कांग्रेस के सामने बीजेपी ने अपनी स्थिति कुछ मजबूत की है. लेकिन ये इतनी नहीं है कि हार से पार पाई जा सके.

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