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छत्तीसगढ़: पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं पर सभी पार्टियों की नजर

छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ 81 लाख 79 हजार 435 कुल मतदाता हैं. इसमें से 4 लाख 96 हजार 954 मतदाता पहली बार चुनाव में मतदान करेंगे.

Updated On: Oct 26, 2018 03:53 PM IST

FP Staff

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छत्तीसगढ़: पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं पर सभी पार्टियों की नजर
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चुनाव में हर एक वोट की अपनी अहमियत होती है. छत्तीसगढ़ के इस विधानसभा चुनाव के परिणाम पर फर्स्‍ट टाइम वोटर्स एक ऐसा तबका है, जो बड़ा असर डाल सकता है. राजनीतिक पार्टिंया भी फर्स्‍ट टाइम वोटर्स की अहमियत समझती हैं. इसलिए इन्हें साधने की हर संभव कोशिश पहले से ही शुरू कर दी गई. राष्ट्रीय दल इस वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए एक अलग टीम बनाकर काम कर रही है तो कांग्रेस भी इस वर्ग को साधने यूथ विंग को पहले से टारगेट दे रखा है.

छत्तीसगढ़ में फर्स्‍ट टाइम वोटर्स को साधाने के लिए राजनीतिक दलों की रणनीति को समझें, इससे पहले जान लेते हैं कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में फर्स्‍ट टाइम वोटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण क्यों है. छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ 81 लाख 79 हजार 435 कुल मतदाता हैं. इसमें से 4 लाख 96 हजार 954 मतदाता पहली बार चुनाव में मतदान करेंगे. इनकी औसत आयु 18 से 19 वर्ष बताई जा रही है.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर ध्यान दें तो कुल 1 करोड़ 30 लाख 29 हजार 558 लोगों ने मतदान किया था. इसमें बीजेपी और कांग्रेस में जीत हार का अंतर 97 हजार 574 मतों का ही था, जो कुल मतों का 0.75 फीसदी ही था. जीत हार के अंतर आकड़ा इससे पहले के चुनाव में भी कुल मतों का करीब 1.5 फीसदी ही था. यानी कि करीब 5 लाख जनसंख्या वाले फर्स्‍ट टाइम वोटर्स जिस पार्टी को सपोर्ट कर दें, उसकी चुनाव में उसकी स्थिति ज्यादा मजबूत हो जाएगी.

इस तरह कोशिश कर रही बीजेपी

बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश संयोजक शासकीय योजनाएं एवं स्वध्याय मंडल एवं मीलिनियर वोटर के खल्लारी विधानसभा के प्रभारी नितेश मिश्रा बताते हैं कि भाजपा हर विधानसभा में फर्स्‍ट टाइम वोटर्स को टारगेट करने के लिए अलग टीम बनाकर काम कर रही है. ये टीम कॉलेज, कोचिंग सेंटर सहित अन्य ऐसी जगहों पर जा रही है, जहां इनकी उपस्थिति अधिक होती है.

बीजेपी फर्स्‍ट टाइम वोटर्स को बता रही है कि साल 2000 से 2003 के बीच में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कार्यकाल में क्या हालात थे. अब 15 साल बाद हर क्षेत्र में कितना विकास हुआ है. इसके अलावा बीजेपी सरकार की युवा संचार क्रांति योजना के तहत युवाओं को लैपटॉप, मोबाइल फोन बांटने की नीति के बारे में भी बताया जा रहा है.

कांग्रेस कर रही ये काम

कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी बताते हैं कि कांग्रेस फर्स्‍ट टाइम वोटर्स के साथ ही प्रदेश के पूरे युवा वर्ग की समस्याओं पर फोकस कर रही है. इसके लिए यूथ कांग्रेस सभी युवाओं से संपर्क कर उनकी प्राथमिकता पूछ रही है. साथ ही बेरोजगार युवाओं का बायोडाटा भी लिया जा रहा है. ताकि सरकार बनने के बाद सबसे पहले उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की प्राथमिकता हो.

क्या चाहते हैं फर्स्‍ट टाइम वोटर्स

दुर्ग के भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग के पहले सैमेस्टर के छात्र विशाल त्रिपाठी बताते हैं कि उनका वोट उसी को जाएगा, जो पार्टी चार साल बाद उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की नीति पहले से बताए. रायपुर में कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे अभिषेक भी कहते हैं कि जॉब अपरच्यूनिटी देने वाली पार्टी को ही उनका वोट जाएगा. गिरीश, अतुल, ममता सहित अन्य ने भी बातचीत में इसी बात को समर्थन दिया.

इस नीति से हो सकते हैं प्रभावित

आॅल इंडिया प्रोग्रेसिव फोरम (AIPF) के रायपुर सचिव और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले विनयशील का कहना है कि इस उम्र का मतदाता भले ही पार्टी और विचारधारा के आधार पर वोट नहीं करता है, लेकिन तकनीक से जुड़े होने के कारण इन्हें अपने आस पास चल रहीं बातें पता होती हैं. व्हाट्सएप, फेसबुक में वायरल वीडियोस और मेम के माध्यम से सरकार और समाज की इनकी समझ भी बन रही होती है.

पैशन को पूरा करने आजादी और पसंद का कैरियर इनकी सबसे पहली मांग होती है. यदि कोई भी दल इन बातों को समझकर इस वर्ग से संवाद करे तो इनकी संख्या उस पार्टी को जीत दिलाने में बड़ा योगदान दे सकती है. जो भी दल इस वर्ग सुनने और समझने की कोशिशे करेगा. इनके मुद्दों को अपने मेनिफेस्टो में जगह देगा उनको जिताने की पूरी क्षमता नए मतदाताओं में है.

( न्यूज़ 18 पर निलेश त्रिपाठी की स्टोरी.)

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