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कोर्ट के निर्णय के बाद CAG की राय का कोई मतलब नहीं: अरुण जेटली

कांग्रेस का आरोप है कि यूपीए सरकार जिस कीमत में राफेल सौदे के लिए बातचीत कर रही थी, मौजूदा सरकार ने उससे बहुत अधिक कीमत पर सौदा किया है

Updated On: Dec 16, 2018 10:07 PM IST

FP Staff

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कोर्ट के निर्णय के बाद CAG की राय का कोई मतलब नहीं: अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राफेल मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजे जाने की कांग्रेस की मांग को खारिज किया है. उन्होंने कांग्रेस को 'बैड लूजर्स' बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद डील पर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) की राय प्रासंगिक नहीं है. संसद के शीतकालीन सत्र के शुरुआती 4 दिन तमाम मुद्दों पर विरोध और हंगामे की भेंट चढ़ चुका है. इस पर जेटली ने कहा कि विपक्षी कांग्रेस बचे हुए सत्र में भी राफेल पर चर्चा के बजाय हंगामा करना पसंद करेगी.

कांग्रेस राफेल डील की जेपीसी से जांच की मांग कर रही है. पार्टी का आरोप है कि यूपीए सरकार जिस कीमत में सौदे के लिए बातचीत कर रही थी, मौजूदा सरकार ने उससे बहुत अधिक कीमत पर सौदा किया है. कांग्रेस के इन आरोपों पर जेटली ने कहा कि कोर्ट का निर्णय अंतिम है. उसके बाद कैग की राय का कोई मतलब नहीं रह जाता.

सरकार ने कोर्ट में तथ्यात्मक और सही-सही बात कही: जेटली

वित्त मंत्री ने फेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस झूठ फैलाने की अपनी पहली कोशिश में बुरी तरह से फेल रही और अब कोर्ट के ‘निर्णय पर नए झूठ गढ़ रही है.’ जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट का शीर्षक दिया है- ‘राफेल- झूठ, थोड़े समय तक चला झूठ और आगे और झूठ?’ उन्होंने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतिम शब्द कह दिया है और उससे इसकी वैधता सिद्ध हो चुकी है. कोई राजनीतिक निकाय सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष के उलट निष्कर्ष नहीं निकाल सकता.’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सीएजी और पीएसी वाले ऐंगल पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'डिफेंस ट्रांजैक्शंस सीएजी के पास ऑडिट रिव्यू के लिए जाते हैं. उसके बाद उन्हें पीएसी (लोक लेखा समिति) को भेजा जाता है.

जेटली ने कहा, 'सरकार ने कोर्ट में तथ्यात्मक और सही-सही बात कही. राफेल का ऑडिट रिव्यू अभी सीएजी के पास लंबित है. सभी तथ्य उसके साथ साझा किए जा चुके हैं. जब यह रिपोर्ट तैयार हो जाएगी तो यह पीएसी के पास जाएगी.' उन्होंने कहा कि कोर्ट के सामने सही तस्वीर पेश की जा चुकी है और अब यह कोर्ट के विवेक पर है कि बताए कि सीएजी का रिव्यू किस चरण में लंबित है.'

प्रासंगिक नहीं है सीएजी रिव्यू

अरुण जेटली ने आगे लिखा, 'सीएजी रिव्यू प्रासंगिक नहीं है. प्रक्रिया, प्राइसिंग और ऑफसेट सप्लायर्स को लेकर कोर्ट के अंतिम नतीजों के लिए सीएजी रिव्यू प्रासंगिक नहीं है. लेकिन बैड लूजर्स कभी भी सच को स्वीकार नहीं करते. तमाम झूठ पकड़े जाने के बाद अब वे जजमेंट के बारे में दुष्प्रचार शुरू कर चुके हैं.'

जेपीसी की मांग पर जेटली ने कहा कि एक संसदीय समिति कोर्ट के नतीजों से अलग नतीजे कैसे दे सकती है. उन्होंने सवाल किया क्या राजनीतिज्ञों की कोई समिति किसी ऐसे मुद्दे की समीक्षा के लिए कानूनी तौर पर सक्षम है, जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुका है.

(इनपुट भाषा से)

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