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राहुल ने किया कोर ग्रुप का ऐलान, अब क्या CWC का काम सिर्फ मार्गदर्शक का होगा?

राहुल गांधी की कोर ग्रुप अब पार्टी की सर्वोच्च कमेटी बन गई है. जो पार्टी के बड़े फैसले भी करेगी

Updated On: Aug 25, 2018 10:51 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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राहुल ने किया कोर ग्रुप का ऐलान, अब क्या CWC का काम सिर्फ मार्गदर्शक का होगा?
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राहुल गांधी ने पार्टी की कई कमेटी का ऐलान किया है. जिसमें कोर ग्रुप, मैनिफेस्टो कमेटी और पब्लिसिटी कमेटी है. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से तकरीबन आठ महीने पहले मैनिफेस्टो कमेटी बना दी है. जिससे चुनाव की घोषणा से पहले ही मैनिफेस्टो का काम पूरा किया जा सके. इस तरह चुनाव के प्रचार-प्रसार के लिए कमेटी का गठन कर दिया है.

वर्किंग कमेटी की हैसियत कम हुई

कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने वर्किंग कमेटी का गठन किया था. जिसमें 51 सदस्य मनोनीत किए गए थे. इसकी दो बैठक भी हो चुकी है. लेकिन शायद वर्किग कमेटी वाली प्रणाली राहुल गांधी को रास नहीं आई है. पार्टी के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने कहा था कि ये तय हुआ है कि वर्किंग कमेटी की बैठक जल्दी-जल्दी होगी. लेकिन अब इस पर संशय है.

कोर ग्रुप वर्किंग कमेटी के ऊपर की संस्था हो गई है. इस तरह के कोर ग्रुप के सहारे सोनिया गांधी पार्टी का काम काज चलाती थी. यूपीए की सरकार के दौरान हर शुक्रवार को प्रधानमंत्री निवास पर बैठक होती थी. जो बड़े फैसले लिया करती थी.

हालांकि सोनिया गांधी के जमाने से कांग्रेस कार्यसमिति की अहमियत घटी है, लेकिन सोनिया गांधी ने भी कोर ग्रुप को लेकर कभी औपचारिक ऐलान नहीं किया था. बल्कि कोर ग्रुप की बैठक अनौपचारिक तौर पर होती रही है. राहुल गांधी ने नई परपंरा की शुरुआत की है.

CWC meeting

कोर ग्रुप चलाएगी पार्टी

राहुल गांधी की कोर ग्रुप अब पार्टी की सर्वोच्च कमेटी बन गई है. जो पार्टी के बड़े फैसले भी करेगी. राहुल गांधी को अहम मुद्दों पर सलाह भी देगी. अगर गौर करें तो सोनिया की कोर ग्रुप से कुछ चेहरे इसमें हैं. जैसे पी. चिदंबरम, ए.के एंटोनी और अहमद पटेल.

राहुल गांधी ने जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, के सी वेणुगोपाल, अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे और गुलाम नबी आज़ाद को इस कमेटी में शामिल किया है. ये एक तरह से अलग पावर सेंटर हो गया है.

हालांकि अभी ये तय नहीं है कि कोर ग्रुप की बैठक कब होगी. सोनिया गांधी के समय हर हफ्ते इस कमेटी की बैठक होती थी. पार्टी के भीतर इस ग्रुप की हैसियत एलीट क्लब की तरह है. जिसका दायरा असीमित है. जो नेता इसमें है वही सबसे ताकतवर माना जाता है.

राहुल गांधी ने इस कमेटी के ऐलान के साथ दो और कमेटी के गठन किया है. लेकिन दिलचस्पी ज्यादा इस कमेटी में है.हालांकि सवाल ये है कि बिना सत्ता के इस कमेटी को क्यों बनाना पड़ा है. कई जानकार लोगों की राय है कि वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाना आसान नहीं है. दूसरे बड़ी बैठको में राय मशविरा को स्ट्रीम लाइन करना मुश्किल है.

कहीं मार्गदर्शक मंडल तो नहीं

इस तरह की कमेटी के आने से कार्यसमिति बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल की तरह हो गई है. हालांकि बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में तथाकथित रिटायर्ड लोगों का समूह है. कांग्रेस के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता है.

ये भी पढ़ें: यूरोप में राहुल गांधी: विदेश से बीजेपी पर हमलों के मायने क्या हैं?

कांग्रेस के संविधान में भी वर्किंग कमेटी को सर्वोच्च कमेटी बताया गया है. यही वर्किंग कमेटी के प्रस्ताव से सोनिया गांधी को पार्टी का अध्यक्ष सीताराम केसरी को हटाकर बनाया गया था. लेकिन ऐसा लग रहा है इसका ज्यादा काम नहीं बचा है.

कांग्रेस की बैठक

कांग्रेस की बैठक

मैनिफेस्टो कमेटी

राहुल गांधी ने चुनाव की तैयारी के मद्देनजर मैनिफेस्टो कमेटी बना दिया है. जो चुनाव से पहले दस्तावेज तैयार कर लेगी. जाहिर है कि राहुल गांधी चुनाव की तैयारी पहले से करना चाहते हैं. मैनिफेस्टो इस चुनाव में अहम रोल अदा कर सकता है. हालांकि जिस मैनिफेस्टो का काम कांग्रेस में कभी प्रणब मुखर्जी के हाथ में था. वैसे अनुभवी लोगों की कमी है.

हालांकि इस कमेटी में सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ लोगों को रखा गया है. सलमान खुर्शीद के लिए अहम जिम्मेदारी भी है. सलमान माइनॉरिटी, कानून, कॉरपरेट और विदेश जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं. पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं. यूपी के प्रदेश अध्यक्ष की भी कमान उनके हाथ में थी.

राहुल गांधी ने इस कमेटी में ऐसे लोगों को जगह दी है. जो राहुल की यंग ब्रिगेड से हैं. लेकिन इस कमेटी का काम कमान कितना अहम है. इस लिहाज से कमेटी के गठन को दुरूस्त नहीं कहा जा सकता है. इस कमेटी में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जैसे नाम गायब हैं. जो हिंदी बेल्ट के नब्ज़ को समझते हैं. जिनका ताल्लुक यूपी से किन्हीं कारण से रहा है.

वरिष्ठ नेताओं को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर लोग राहुल की टीम के यस मैन की भूमिका में रहें हैं

सैम पित्रोदा और सचिन राव

सैम पित्रोदा राजीव गांधी के सलाहकार थे. अब राहुल गांधी के साथ हैं. गांधी परिवार से उनकी नजदीकी जगजाहिर है. गुजरात के विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका में थे. फिलहाल राहुल गांधी के साथ यूरोप की यात्रा पर हैं. सचिन राव राहुल गांधी के सचिवालय में काफी अर्से से काम कर रहें हैं. लेकिन लो प्रोफाइल रहकर काम कर रहे हैं. रिसर्च बैकग्राउंड से हैं. कुछ दिन राजीव गांधी फाउंडेशन में काम किया है.

रणदीप सुरजेवाला का कद बढ़ा

पी चिदंबरम और जयराम रमेश के बाद रणदीप सुरजेवाला का नाम दो कमेटी में है. रणदीप सुरजेवाला कोर ग्रुप और प्रचार कमेटी में शामिल है. मीडिया के प्रभारी पहले से हैं. राहुल गांधी सुरजेवाला के काम काज से खुश है. जिससे लगातार उनका प्रभाव बढ़ रहा है. राहुल गांधी उनको काफी अहमियत दे रहे हैं. जिस तरह से दिल्ली में पहले मीडिया का काम उनको अस्थाई तौर पर दिया गया था. विपरीत परिस्थिति में रणदीप सुरजेवाला ने अपने काम के दम पर अपने को स्थापित कर लिया है. रणदीप के लिए दिल्ली नया नहीं है. लेकिन मीडिया में कांग्रेस का पक्ष रख पाना आसान नहीं था. रणदीप को इसका ईनाम मिला है.

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