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शॉर्ट्स में वीमेन पावर ढूंढते राहुल का सेल्फ गोल

राहुल गांधी वक्त-बे-वक्त ऐसे बयान दे देते हैं, जिससे लगने लगता है कि उन्हें अपनी राजनीति और मांझने की जरूरत है

Pratima Sharma Pratima Sharma Updated On: Oct 11, 2017 08:52 AM IST

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शॉर्ट्स में वीमेन पावर ढूंढते राहुल का सेल्फ गोल

राहुल गांधी भले ही कांग्रेस की लाइन ऑफ कमांड में दूसरे नंबर पर हों, लेकिन कांग्रेस के कामकाज को जानने-समझने वाले जानते हैं कि दरअसल आज की तारीख में व्यावहारिक अर्थों में वही कांग्रेस के शीर्ष नेता हैं.

हालांकि राहुल गांधी की राजनीतिक समझदारी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक और समीक्षक हमेशा संदेह में रहते हैं. हाल ही में अमेरिका में दिए गए उनके भाषण को उनमें परिपक्वता आने के एक सबूत के तौर पर प्रचारित किया गया, लेकिन मंगलवार को बीजेपी और आरएसएस को महिला विरोधी बताने के उत्साह में वडोदरा की एक जनसभा में उन्होंने जो कहा, वह सेल्फ गोल मारने के अलावा कुछ और नहीं है.

ऐसा क्या बोल दिया राहुल गांधी ने?

महिलाओं के प्रति बीजेपी और आरएसएस के व्यवहार को लेकर राहुल गांधी ने कटाक्ष तो किया, लेकिन उनके बयान का जो मतलब निकाला जा रहा है उससे पक्का हो गया है कि राजनीति में राहुल अभी कच्चे हैं.

राहुल गांधी ने आरएसएस को निशाना बनाते हुए कहा, 'आरएसएस की शाखा में क्या आपने शॉर्ट्स पहने किसी महिला को देखा है?' राहुल गांधी के इस बयान को दो तरीकों से देखा जा सकता है. पहला ये कि आरएसएस और बीजेपी में महिलाओं को बराबरी का हक नहीं है. लेकिन इसका दूसरा नजरिया ये भी है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने का मतलब केवल उनके शॉर्ट्स पहनकर मैदान में उतरना है.

राहुल का असली निशाना निश्चित तौर पर बीजेपी है, लेकिन उन्होंने हमला आरएसएस पर किया है. लेकिन संघ शायद ही इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दे. हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय संघ के स्वयंसेवक सोशल मीडिया के जरिए और सरकार के प्रवक्ता, मंत्री मीडिया के जरिए राहुल के इस बयान को सेल्फ गोल को बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

स्मृति ईरानी और आनंदीबेन पटेल से लेकर नूपुर शर्मा तक ने जिस तीखेपन से इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, उसके बाद आने वाले 2-3 दिनों में कांग्रेस इस पर रक्षात्मक दिखे, तो आश्चर्च नहीं होना चाहिए.

बीजेपी आज जिस सरकार का नेतृत्व कर रही है, उसके 5 शीर्ष मंत्रालयों में दो की कमान महिलाओं के हाथ में है. सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण उस सीसीएस (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) का हिस्सा हैं, जो निर्णय करने की सरकार की शीर्ष समिति है. सीतारमण को प्रधानमंत्री ने रक्षामंत्री बनाकर साफ संदेश दिया है कि उनके लिए एक महिला की क्षमता किस स्तर तक हो सकती है. राहुल गांधी को इसका जवाब देना होगा कि लगभग 6 दशकों के शासन में कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के अलावा किसी और महिला को इस लायक क्यों नहीं समझा कि उन्हें रक्षा सेनाओं की कमान दी जा सके.

संघ में महिलाओं के लिए अलग विंग

जहां तक बात आरएसएस में महिलाओं के शॉर्ट्स पहनने की है तो राहुल गांधी की बातों में महिलाओं के लिए सम्मान कम और तंज ज्यादा नजर आ रहा है. आरएसएस के संगठन की जानकारी रखने वाले लोगों को पता है कि राष्ट्र सेविका समिति संघ की महिला विंग है. संघ की स्थापना के महज 11 साल बाद उसके संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जीवनकाल में ही 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर ने संघ की महिला विंग के तौर पर राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की थी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरह ही राष्ट्रसेविका समिति की भी शाखा चलती है, जहां लड़कियों को दंड चलाने से लेकर तलवारबाजी तक का प्रशिक्षण दिया जाता है. ऐसे में यह कहना कि आरएसएस की शाखा में महिलाएं शॉर्ट्स पहनकर क्यों नहीं आती, बेहद बेतुका बयान है.

क्या महिलाओं को बराबरी सिर्फ शॉर्ट्स पहनने से मिलती है. अगर राहुल गांधी ये कहना चाहते थे कि महिलाओं और पुरुषों की शाखा अलग-अलग होने के बजाय एक साथ क्यों नहीं होती, तो वे अपना संदेश दे पाने में पूरी तरह असफल रहे हैं. उलटा उन्होंने इस बयान से महिला सशक्तीकरण के बारे में अपनी हल्की सोच भी जाहिर कर दी है. कोई भी मंझा हुआ राजनेता ऐसा बयान देने से बचता, फिर राहुल गांधी तो देश के प्रधानमंत्री बनने का दावा करना चाहते हैं. ऐसे में उनके लिए यह एक बहुत ही असामयिक और नुकसानदेह बयान साबित होगा.

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