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बीजेपी के दुष्प्रचार का जवाब है 'शिवभक्त' राहुल की मानसरोवर यात्रा?

इस यात्रा के ज़रिए राहुल गांधी ये दिखाने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस के हिंदू और बीजेपी के हिंदुत्व में काफी फर्क है

Updated On: Aug 30, 2018 02:05 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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बीजेपी के दुष्प्रचार का जवाब है 'शिवभक्त' राहुल की मानसरोवर यात्रा?

राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकल रहे हैं. कैलाश की यात्रा भक्ति का नमूना है लेकिन मकसद राजनीतिक है. राहुल की यात्रा से कांग्रेस के नेता खुश हैं. कांग्रेस को लग रहा है कि बीजेपी हिंदुत्व की काट का ये सही तरीका है. राहुल गांधी की मानसरोवर की यात्रा लोकसभा चुनाव से पहले है. इसके बाद आम चुनाव के बाद ही ये यात्रा शुरू होगी.

31 अगस्त से राहुल गांधी चीन तिब्बत के रास्ते मानसरोवर तक जा रहे हैं. तकरीबन पंद्रह दिन राहुल गांधी सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगे. इस यात्रा के ज़रिए राहुल गांधी ये दिखाने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस के हिंदू और बीजेपी के हिंदुत्व में काफी फर्क है. कांग्रेस का हिंदू सहिष्णुता में विश्वास करता है. कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा काफी कठिनाई वाली यात्रा मानी जाती है. राहुल गांधी पहले कांग्रेस अध्यक्ष है जो इस यात्रा पर जा रहे हैं. राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव के बाद दिल्ली में जनाक्रोश रैली के दौरान इस यात्रा का ऐलान किया था.

राहुल का साफ्ट हिंदुत्व

राहुल गांधी इस यात्रा के ज़रिए साफ्ट हिंदू वाली छवि लोकसभा चुनाव में पेश करेंगे क्योंकि बीजेपी का मूल मुद्दा हिंदुत्व के इर्द-गिर्द रहने वाला है. ऐसे में कैलाश की यात्रा राहुल गांधी के लिए राजनीतिक आसानी पैदा करने वाला है. वहीं बीजेपी के लिए राहुल के धर्म पर सवाल उठाना मुश्किल होगा. राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव में सोमनाथ मंदिर के अलावा तकरीबन 27 मंदिरों का दर्शन किया है. जिसके बाद कर्नाटक में भी राहुल गांधी ने कई मंदिर जाकर दर्शन किए. हालांकि दोनों ही जगह राहुल गांधी की पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में विवाद बढ़ने पर तस्वीर जारी की और कहा कि राहुल गांधी जनेऊधारी ब्राह्मण हैं.

राहुल के खिलाफ दुष्प्रचार

कांग्रेस के नेता ये आरोप लगाते हैं कि राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी अभियान चला रही है. सोशल मीडिया में राहुल गांधी के हिंदू होने पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. बीजेपी हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करती है. जवाब कांग्रेस से मांगा जाता है. हालांकि कांग्रेस की तरफ से जवाब दिया जाता है, लेकिन वो अभी बीजेपी के मुकाबले कमजोर है. कांग्रेस भी सोशल मीडिया के जरिए कोशिश कर रही है. दिव्य स्पंदना रम्या के आने के बाद से मुहिम में धार आई है. लेकिन कांग्रेस के लिए मुश्किल है कि वो राहुल गांधी क हिंदू होने के पक्ष में वैसा अभियान नहीं चला सकती है, जैसा बीजेपी विरोध में मुहिम चला रही है. कांग्रेस को अपनी सेक्युलर छवि को बरक़रार रखना है. ये भी पार्टी की मजबूरी है.

प्रधानमंत्री से मुकाबला

राहुल गांधी हिंदू होने के लिए नरेंद्र मोदी से मुकाबला कर रहे हैं. प्रधानमंत्री हिंदुत्व के चैंपियन हैं. प्रधानमंत्री कभी ऐसा मौका नहीं चूकते हैं. पशुपतिनाथ के दर्शन से लेकर केदारनाथ तक हर मौके पर पीएम की मौजूदगी इसे साबित करती है. लेकिन राहुल के मानसरोवर यात्रा का जवाब ढूंढना मुश्किल होगा, क्योंकि बीजेपी ने कभी सोचा नहीं था कि राहुल गांधी ऐसा कोई कदम उठा सकते हैं. कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर राजनीति भी कम नहीं है. यूपी सरकार ने प्रदेश से जाने वाले यात्रियों को एक लाख रुपए की सहायता का ऐलान किया था.

आरएसएस का मतलब हिंदू नहीं

राहुल गांधी ने हालिया यूरोप की यात्रा में आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की है. विदेश में राहुल के इस बयान से नई बहस शुरू हो गई है. हालांकि राहुल के इस बयान के बीजेपी नए आयाम निकाल रही है. लेकिन कांग्रेस रणनीति के तहत संघ के खिलाफ अाक्रामक हो रही है. ये बताने की कोशिश की जा रही है कि संघ ही हिंदू का ठेकेदार नहीं है. बल्कि हिंदू वो है जो मध्यमार्गी है. यानी कांग्रेस की विचारधारा ही सर्वमान्य है.

राहुल गांधी सोच-समझकर ही संघ के खिलाफ लगातार बोल रहे हैं. हालांकि ये कहा जा रहा था कि संघ राहुल को अपने कार्यक्रम में बुला सकता है. जिसपर कांग्रेस की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. पार्टी के महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ किया कि संघ अगर निमंत्रण भी देगा तो राहुल गांधी इसमें शामिल नहीं होंगे. वही जयपाल रेड्डी ने कहा कि जब निमंत्रण मिलेगा तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी उचित जवाब देंगे. हालांकि अभी संघ की तरफ से औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया है.

राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कौन

राहुल गांधी पंद्रह दिन पार्टी के कामकाज से दूर रहने वाले हैं, जिससे कोई आपात स्थिति के मौके पर कोर ग्रुप के लोग मिल-बैठकर फैसला करेंगे, जिसको राहुल गांधी जाने से पहले दिशा निर्देश देकर जाएंगे. पार्टी के भीतर काम करने का मसला धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है. हालांकि कर्नाटक का मसला संशय पैदा कर रहा है. जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया विरोधी तेवर अपना रहे हैं, उससे पार्टी को अचानक कोई फैसला लेना पड़ सकता है. ऐसे में कोर ग्रुप के लोग फैसला ले सकते हैं. वैसे कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी विचार विमर्श किया जा सकता है.

कैलाश मानसरोवर की यात्रा का महत्व

कैलाश पर्वत को शिव-पार्वती का घर माना जाता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक मानसरोवर के पास शिव भगवान विराजते हैं. हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. हिंदू धर्म के अनुयायी जीवन में एक बार यहां यात्रा करने की इच्छा रखते हैं. हिंदू धर्म की मान्यता है कि मानसरोवर पहले ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुआ था.

कठिन है यात्रा

कैलाश पर्वत तकरीबन 22,028 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. वहीं मानसरोवर झील समुद्र तल से 4,556 मीटर पर स्थित है. ये विशाल झील 320 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है. जिसकी गहराई 90 मीटर है. इस जगह साल भर काफी ठंडक रहती है. ये यात्रा इस साल 8 सितंबर को खत्म हो जाएगी. साल में यही समय है जब वहां जाया जा सकता है. माना जा रहा है कि राहुल गांधी ट्रैकिंग करके इस जगह पहुंचेंगे. उत्तराखंड में भीषण तबाही के बाद भी राहुल गांधी पैदल ही केदारनाथ गए थे.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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