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मोदी पहले पीएम, जिनके कहे का कोई मतलब नहीं होताः राहुल

अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने नगा अलगाववादी संगठन नैशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक मुइवा) के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था

Updated On: Feb 04, 2018 01:35 PM IST

FP Staff

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मोदी पहले पीएम, जिनके कहे का कोई मतलब नहीं होताः राहुल

तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान हो चुका है. बिसातें बिछ चुकी है. धीरे-धीरे आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो चुका है. शनिवार को राजनाथ सिंह ने मनमोहन सिंह पर निशाना साधा था. रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधा पीएम मोदी को निशाने पर लिया.

कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह पहले ऐसे पीएम हैं जिनके कहे का कुछ मतलब नहीं होता है. वह बिना मतलब की बात करते हैं.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि अगस्त 2015 में पीएम मोदी ने एतिहासिक दावा किया था कि उन्होंने नागा समझौते पर हस्तारक्षर कर दिया है. दो साल बीत चुके हैं. मामला अभी प्रोसेस में ही है.

अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने नगा अलगाववादी संगठन नैशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक मुइवा) यानी एनएससीएन (आईएम) के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इसपर पीएम मोदी की मौजूदगी में नई दिल्ली में दस्तखत हुए थे. एनएससीएन (आईएम) के नेता टी. मुइवा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया था.

बीजेपी गठबंधन की सरकार है नागालैंड में 

फिलवक्त नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट की सरकार है. टी आर जेलियांग के नेतृत्व में बनी इस सरकार को बीजेपी भी समर्थन दे रही है. नागालैंड में भी बीजेपी के सहयोगी की ही सरकार है.

2013 में एनसीपी के चार विधायकों में से तीन विधायकों ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला कर लिया था और उस वक्त से ही बीजेपी के सभी विधायक नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट को समर्थन दे रहे हैं.

नागालैंड में बीजेपी और नागा पीपुल्स फ्रंट के बीच गठबंधन का नाम नागालैंड लोकतांत्रिक गठबंधन है. एक बार फिर बीजेपी की कोशिश अपने इस गठबंधन को जीत दिलाने पर रहेगी.

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