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पीएम मोदी का मजाक उड़ाकर राहुल गांधी लाएंगे 'अच्छे दिन'?

विदेश में ऐसा माहौल देखकर कांग्रेस के उपाध्यक्ष को लगा कि उनका सही समय आ गया है.

Sanjay Singh Updated On: Jan 12, 2017 11:59 AM IST

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पीएम मोदी का मजाक उड़ाकर राहुल गांधी लाएंगे 'अच्छे दिन'?

कांग्रेस कार्यकर्ता खुश तो बहुत होंगे. उनकी बदकिस्मती की 'वेदना' भी अब नहीं रही. पार्टी के गिरते ग्राफ की चिंताएं जाती रहीं. पार्टी में सुधार करने की चिंता खत्म हो गई. 2014 आम चुनाव के बाद, विधानसभा चुनाव और फिर देश के कोने-कोने में  स्थानीय निकाय के चुनावों में मिली हार के बाद कार्यकर्ताओं का उत्साह वापस लाने की चिंता से भी पार्टी मुक्त हो चुकी है.

उनके नेता राहुल गांधी 2019 आम चुनावों के नतीजों का ऐलान कर दिया है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की हार और कांग्रेस की सत्ता में वापसी होगी. राहुल ने कहा, 'अब 2019 में कांग्रेस की जीत के बाद ही अच्छे दिन आएंगे.'

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लेकिन ऐसा नहीं कि कांग्रेसजन के लिए और कोई चिंता की बात नहीं. 2019 में कांग्रेस की जीत के बावजूद राहुल ने खुद को प्रधानमंत्री घोषित नहीं किया. राहुल की यह हिचकिचाहट नेहरू-गांधी परिवार के करीबियों के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है.

उधार के नारे से जीत की तमन्ना

2014 में नरेंद्र मोदी ने 'अच्छे दिन आने वाले हैं' नारे के दम पर सत्ता हासिल की थी. अब उधार लिए नारे के सहारे राहुल 2019 में जीत का दावा कर रहे हैं. उधार के नारे से सत्ता हासिल करने की राहुल की इस रणनीति से भी कांग्रेस कार्यकर्ता खुश हो सकते हैं.

यूपी चुनाव में कांग्रेस का नारा '27 साल यूपी बेहाल' बीजेपी के बिहार चुनाव के नारे से लिया गया है. बिहार में बीजेपी ने लालू-राबड़ी सरकार के खिलाफ '15 साल बुरा हाल' का नारा दिया था. लेकिन यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस का यह नारा बेमानी हो जाएगा. अखिलेश यादव के साथ गठबंधन होता है तो कांग्रेस के लिए शीला दीक्षित को सीएम उम्मीदवार बनाने और  '27 साल यूपी बेहाल' के नारे पर जवाब देना मुश्किल हो सकता है.

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कांग्रेस और उसके नेता के साथ समस्या यह है कि वो जनादेश को समझ नहीं पा रही है. 2013 के अंत से लेकर अब तक जिस तरह के चुनावी नतीजे आए हैं पार्टी उसे मानने को तैयार नहीं. पार्टी हाईकमान को लगता है कि जनता की याददाश्त छोटी होती है. जिसका वो फायदा उठा सकती है.

इसे भी संयोग ही कहेंगे कि राहुल गांधी ने कांग्रेसजनों से 'अच्छे दिन' की बात उस कार्यक्रम में की जिसका नाम 'जन वेदना सम्मेलन' था. राहुल के लिए 'जन वेदना' का मतलब नोटबंदी के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी की आलोचना और दो साल बाद कांग्रेस की सत्ता वापसी का ऐलान ही माना जाएगा.

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विदेश में लगभग एक पखवाड़े की छुट्टियां मनाकर लौटे राहुल गांधी तरोताजा लग रहे थे. उन्होंने छुट्टियां कहां मनाई किसी को जानकारी नहीं है. शायद किसी पश्चिमी देश में ही मनाई. बहरहाल नया साल मनाकर लौटे राहुल के रणनीतिकारों को ऐसा लगा होगा कि राहुल लौटते ही जनता की मुश्किलों और उसकी वेदना जाहिर करें. ठीक उसी अंदाज में प्रधानमंत्री पर निशाना साधें जैसा वह छुट्टी पर जाने से पहले कर रहे थे.

पीएम मोदी का मजाक

अपने विदेश प्रवास के दौरान राहुल ने पाया कि पीएम मोदी का उपहास उड़ाया जा रहा है. राहुल को एहसास हुआ, 'पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री का इस तरह से दुनिया भर में मजाक बनाया जा रहा है. पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. मोदीजी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका इस तरह से उपहास उड़ाया जा रहा है.'

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विदेश में ऐसा माहौल देखकर कांग्रेस के उपाध्यक्ष को लगा कि उनका सही समय आ गया है.

ऊर्जा से भरपूर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने एक और खुलासा किया. उनके मुताबिक कुछ मीडिया वालों ने उनसे अपने 'दिल का दर्द' साझा किया है. मीडिया के लोगों ने राहुल के सामने अपनी कलम पर लगी लगाम का जिक्र किया. नरेंद्र मोदी के खिलाफ लिखने या बोलने पर पाबंदी है. इन मीडिया कर्मियों ने राहुल के बताया कि वे बोलना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन अब 'हवा बदल गई है, बोला नहीं जाता'.

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राहुल ने मीडिया के अपने इन मित्रों के नामों का खुलासा नहीं किया. राहुल ने यह भी नही बताया कि कौन से ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें पीएम मोदी से डर या शिकायत है. उनके साथ ऐसा क्या हुआ जो आज के इस अखबार, टीवी और डिजिटल समाचार वेबसाइट मोदी के खिलाफ कुछ लिख नहीं सकते.

अपनी छुट्टियों के दौरान राहुल को इस बात का भी इल्म हुआ कि मोदी को पद्मासन नहीं आता. वह योग तो कर सकते हैं लेकिन पद्मासन नहीं. राहुल के योगगुरू ने उन्हें बताया कि जो पद्मासन नहीं कर सकता उसे योग करना भी नहीं आता.

70 सालों का हिसाब

राहुल की मानें तो मोदी को कांग्रेस से 70 सालों का हिसाब मांगने हक नहीं है. क्योंकि मोदी ने अपने कार्यकाल में कांग्रेस के किए कराए पर पानी फेर दिया है. राहुल ने कहा, 'हमें बताने की जरुरत नहीं है कि हमने 70 सालों में क्या किया है. लेकिन इन ढाई सालों में बीजेपी ने सब पर पानी फेर दिया. बीजेपी ने चुनाव आयोग से लेकर रिजर्व बैंक और न्यायपालिका सब को कमजोर कर दिया गया है.'

Sonia Gandhi Priyanka Gandhi

राहुल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी बात कर सकते थे, लेकिन इसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया. इसी तरह राहुल अपनी दादी इंदिरा गांधी और आपातकाल को भी भूल गए. राहुल यह भी भूल गए कि कैसे उनका मां सोनिया गांधी ने बिना किसी जवाबदारी 2004-2014 देश की सबसे ताकतवर शख्सियत थीं. राष्ट्रीय सलाहकार समिति (एनएसी) के अध्यक्ष के तौर पर सोनिया ने दस साल सरकार चलाई. मनमोहन सिंह नाम के प्रधानमंत्री थे.

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वेदना सम्मेलन में पहली पंक्ति में बैठे कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल के भाषण से बड़े खुश थे. पीएम मोदी का उपहास उड़ाने में मदद के लिए वे बार-बार उनकी योजनाएं राहुल को याद दिला रहे थे. 2019 में कांग्रेस के वापस सत्ता में आने की भविष्यवाणी ने उनकी खुशी दोगुनी कर दी क्योंकि ऐसा हुआ तो देश वही चलाएंगे.

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