S M L

क्षेत्रीय क्षत्रपों को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं राहुल गांधी

अशोक गहलोत, कमलनाथ, भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोरा को शामिल किया है. कांग्रेस के नए अध्यक्ष अपनी नई टीम का ऐलान कांग्रेस के अधिवेशन के बाद करने वाले हैं

Updated On: Mar 06, 2018 08:54 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

0
क्षेत्रीय क्षत्रपों को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं राहुल गांधी

मध्य प्रदेश के उपचुनाव नतीजे से कांग्रेस उत्साहित है. हालांकी उत्तरपूर्व के चुनावी नतीजों ने पार्टी को निराश किया है. लेकिन मध्य प्रदेश उपचुनाव के नतीजों से खासकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक जोश में हैं. राजस्थान में भी सचिन पायलट के लोग अपने नेता को सीएम उम्मीदवार के तौर पर देख रहें हैं, लेकिन राहुल गांधी ने अभी अपनी मंशा जाहिर नहीं की है. कांग्रेस के अधिवेशन के लिए बनी कमेटियों में भी सीनियर नेताओं को तरजीह दी है.

अशोक गहलोत, कमलनाथ, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोरा को शामिल किया है. कांग्रेस के नए अध्यक्ष अपनी नई टीम का ऐलान कांग्रेस के अधिवेशन के बाद करने वाले हैं. जिन राज्यों में इस साल चुनाव होने वाले हैं. वहां के नेताओं के साथ राहुल गांधी ने बैठक कर ली है. बताया जा रहा है कि सभी नेताओं से राहुल गांधी ने वादा कराया है कि वो पार्टी के लिए एकजुट होकर काम करेंगे.

राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने कहा कि बिना मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के कांग्रेस चुनाव लड़ने जा रही है. कांग्रेस की परंपरा है कि मुख्यमंत्री चुनाव के बाद तय होता है. चुनाव मुद्दे पर लड़े जाएंगे. ना कि किसी नेता के नाम पर चुनाव में कांग्रेस जाने वाली है. अगर कांग्रेस का कोई चेहरा है तो राहुल गांधी ही हैं. जाहिर है इससे नए नेताओ के अरमानों पर पानी फिर सकता है.

भितरघात से बचने का है मकसद

Parliament session

कांग्रेस के पास सत्ता भले ना हो लेकिन नेताओं की कमी नहीं है. पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है. इसलिए राहुल गांधी के साथ राज्यों के प्रभारियों की बैठक में तय हुआ कि सामूहिक नेतृत्व में पार्टी चुनाव में जाएगी. जिससे सभी नेताओ को ये भरोसा रहेगा कि चुनाव के बाद फैसला उनके हक में हो सकता है.

चुनाव में गुटबाजी के असर से बचने के लिए ये फार्मूला तय किया गया है. इससे पार्टी भितरघात से बचेगी और नेता अपने ज्यादा समर्थकों को चुनाव जितवाने में मेहनत करेंगे. जैसा राजस्थान के उपचुनाव में हुआ है. जिसमें अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट नें भी मेहनत की है. जिसका फायदा कांग्रेस को मिला लेकिन इस फॉर्मूले में टिकट के लिए मारामारी जरूर होगी. प्रदेश के बड़े नेता अपने समर्थकों को ज्यादा टिकट दिलाने की होड़ मे रहेंगे. जिसको टिकट नहीं मिलेगा वो नाराज होगा. तब भी स्थानीय भितरघात की संभावना बनी रहेगी. हालांकि पार्टी के नेता इससे इनकार करते है.

तीन राज्यों में चुनाव

राजस्थान 

कर्नाटक का चुनाव शबाब पर है. राहुल गांधी पार्टी की तरफ से प्रचार कर रहे हैं. पार्टी सत्ता में है तो मौजूदा सीएम सिद्धारमैया की अगुवाई में कांग्रेस चुनाव मे जा रही है, लेकिन राजस्थान में भले राहुल गांधी के सामने सभी नेताओं ने साथ रहने की हामी भर दी हो लेकिन सच्चाई और है. तीन बड़े नेताओं के खेमे साफ दिखाई पड़ रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस के महासचिव सीपी जोशी और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के अलावा राहुल की नजदीकी की वजह से जीतेंद्र सिंह ने भी पार्टी में अपनी दखल बना ली है. जाहिर है कि इसमें सबसे सीनियर नेता अशोक गहलोत ही हैं. हालांकि 2008 के चुनाव में सीपी जोशी कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार थे लेकिन वो खुद चुनाव हार गए. जिससे अशोक गहलोत के पक्ष में माहौल बन गया था. ज्यादातर विधायक भी अशोक गहलोत के पक्ष में थे.

मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में कांग्रेस 15 साल से सत्ता से बाहर है. राहुल गांधी ने अरुण यादव को प्रदेश की कमान दे रखी है. 2003 में दिग्विजय सिंह दस साल से मुख्यमंत्री थे. उमा भारती बीजेपी की उम्मीदवार बनीं और 10 साल बंटाधार का नारा दिया. बीजेपी चुनाव जीती. जिसके बाद कांग्रेस ने कई प्रयोग किए.

कांग्रेस ने सुरेश पचौरी को भेजा लेकिन वो भी जीत नहीं दिला पाए. पिछले चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया चेहरा बन कर उभरे लेकिन बाजी बीजेपी के हाथ लगी. कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया सभी नेताओं से मिल रहे हैं, लेकिन पार्टी ने साफ कर दिया है कि चुनाव एकजुट होकर ही लड़ा जाएगा.

यहां कई गुट साफ दिखाई दे रहे हैं. कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह और अरुण यादव का अपना-अपना खेमा है. दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा के जरिए सेंटर स्टेज पर आने की कोशिश कर रहे हैं.

digvijay-singh

अरुण यादव पिछड़े होने के नाते अपना दावा ठोंक रहे हैं. क्योंकि बीजेपी के सीएम शिवराज सिंह भी पिछड़ी जाति से आते हैं. वहीं सिंधिया को राहुल गांधी से नजदीकी का यकीन है. तो कमलनाथ को लग रहा है कि सीनियर नेता होने का फायदा उनको मिलेगा.

छत्तीसगढ़

15 साल से यहां भी कांग्रेस सत्ता के बियाबान में है. अजित जोगी ने अपनी नई पार्टी खड़ी कर ली है. हालांकि कांग्रेस अजित जोगी फैक्टर से नुकसान का इनकार कर रही है, लेकिन पार्टी के पास लीडरशिप का अभाव है. यहां भूपेश बघेल पार्टी के नेता है, लेकिन चरणदास मंहत को पार्टी नजर अंदाज नहीं कर सकती है. पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा का भी राज्य मे दखल रहता है. जाहिर है कि रमन सिंह के खिलाफ यहां पार्टी के पास नेताओ की कमी है. कांग्रेस के कई प्रदेश के नेता अजित जोगी को पार्टी में लाने की वकालत करते रहे हैं.

कांग्रेस अधिवेशन के लिए सीनियर नेताओं को तरजीह

राहुल गांधी ने स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में इशारा किया था. कांग्रेस की नई कार्यसमिति में सबको तरजीह मिलेगी. इसका उदाहरण राहुल गांधी ने दिया है. आयोजन समिति में शीला दीक्षित के साथ अजय माकन का नाम है, तो  भूपेंद्र  सिंह हुड्डा किसानों के लिए बनी कमेटी के चेयरमैन है.

ड्राफ्टिंग कमेटी में कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और जीतेंद्र सिंह को शामिल किया है. कर्नाटक में बनी चुनाव समिति में मार्ग्रेट अल्वा को सदस्य बनाया गया है. मणिशंकर अय्यर की पार्टी में वापसी के आसार बन रहे हैं.

दरअसल राहुल गांधी सामंजस्य की राजनीति कर रहे हैं. राहुल गांधी के हालिया फैसलों से लग रहा है कि वो सीनियर नेताओं को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं. बल्कि 2019 से पहले ऐसी टीम खड़ी करने की कोशिश में है जो पार्टी को रायसीना हिल्स पर काबिज करा दे.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi