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सोनिया के बगैर राहुल का इफ्तार फीका, दिग्गजों ने किया किनारा

विपक्ष के बड़े नेताओं के शिरकत की उम्मीद थी. लेकिन विपक्षी दलों के बड़े नेताओं ने अपने नुमाइंदे भेजे. खुद आने से परहेज किया

Syed Mojiz Imam Updated On: Jun 14, 2018 11:08 AM IST

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सोनिया के बगैर राहुल का इफ्तार फीका, दिग्गजों ने किया किनारा

राहुल गांधी ने इफ्तार के ज़रिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस अपनी विचारधारा के मुताबिक चलती रहेगी. चुनाव में जीत-हार से पार्टी कोई नया रास्ता नहीं अपनाएगी. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार राहुल गांधी ने इफ्तार की दावत दी थी.

इस इफ्तार में यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी अनुपस्थित थीं. सोनिया गांधी इलाज के सिलसिले में विदेश में हैं. लेकिन सोनिया गांधी की दूरी कांग्रेस को भारी पड़ी है. विपक्ष के बड़े नेताओं के शिरकत की उम्मीद थी. लेकिन विपक्षी दलों के बड़े नेताओं ने अपने नुमाइंदे भेजे. खुद आने से परहेज किया. वहीं राहुल गांधी के इस भोज से समाजवादी पार्टी नदारद थी. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राहुल गांधी के इफ्तार में मौजूद थे. हालांकि इस इफ्तार से उम्मीद थी कि विपक्ष की ताकत दिखाई देगी. लेकिन जिस तरह से यूपीए के बड़े नेताओं ने किनाराकशी अख्तियार की उससे सवाल खड़ा होने लगा है कि कहीं विपक्ष की एकता कागजों में ना रह जाए.

राहुल के साथ प्रणब हाई टेबल पर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रणब मुखर्जी बैठे साथ में ही पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी थी. इस टेबल पर सतीश मिश्रा सीताराम येचुरी और डीएमके की नेता कनीमोझी भी बैठी थीं. राहुल गांधी के साथ प्रणब मुखर्जी की काफी देर बातचीत हुई है. नागपुर के संघ मुख्यालय जाने की वजह से प्रणब मुखर्जी का कांग्रेस के नेता आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इससे प्रणब मुखर्जी बेपरवाह नज़र आए हैं.

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राहुल गांधी ने इफ्तार के इस प्रोग्राम में विदेशी मेहमानों से बातचीत भी की लेकिन किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी सिवाय प्रधानमंत्री के फिटनेस वीडियो का. जिस पर राहुल गांधी ने तंज़ किया है. बज़ाहिर वो लोगों की बात सुनते रहे. राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा कि वो दो पूर्व राष्ट्रपतियों की मेज़बानी करके काफी सम्मानित महसूस कर रहे हैं. हालांकि कांग्रेस के नेतृत्व ने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को बुलाकर ये सुनिश्चित किया कि ज्यादा फोकस प्रणब दा पर ना जाए.

नहीं दिखा यूपीए का दम

जैसा लग रहा था कि इस इफ्तार की दावत में यूपीए का दम दिखेगा, वैसा कुछ नहीं हो पाया है. कांग्रेस के एक बड़े नेता का कहना था कि देर से प्रोग्राम तय होने के कारण विपक्ष के बड़े नेता नहीं आ पाए. ज्यादातर नेता या तो दिल्ली में नहीं थे. या फिर पहले से कहीं प्रोग्राम में थे. सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी और शरद यादव ही बड़े नेताओं में थे. बहुजन समाज पार्टी की तरफ से मायावती की जगह सतीश मिश्रा थे. डीएमके की नुमाइंदगी कनीमोझी की तरफ से की गई.

हाल में कांग्रेस के साथ रिश्ता जोड़ने वाली जेडीएस की तरफ से दानिश अली तो आरएलडी की ओर से न अजित सिंह आए न जयंत चौधरी बल्कि पार्टी ने मेराजुद्दीन अहमद को भेजा. इस तरह एनसीपी के शरद पवार भी नहीं पहुंचे. उनकी जगह डीपी त्रिपाठी आए थे. टीएमसी की तरफ से दिनेश त्रिवेदी की मौजूदगी कांग्रेस के लिए राहत की खबर है. वहीं कांग्रेस के सबसे मज़बूत सहयोगी आरजेडी की तरफ से मनोज झा आए हुए थे. राहुल गांधी के इस प्रोग्राम से दिग्गजों की गैर मौजूदगी पार्टी के लिए चिंता का विषय है, जिससे 2019 की विपक्षी एकता की कांग्रेस की कोशिश को झटका लगा है. हालांकि डीएमके की नेता कनीमोझी ने कहा कि सभी राजनैतिक दल गठबंधन के पक्षधर हैं. लेकिन इसका खाका कब तक बनेगा वो इस सवाल को टाल गईं.

सोनिया के डिनर में जुटे थे दिग्गज

यूपीए चेयरमैन की हैसियत से सोनिया गांधी ने मार्च में भोज पर आंमत्रित किया था, जिसमें विपक्ष के बड़े नेताओं ने शिरकत की थी. तकरीबन बीस पार्टी के नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया था. जिसमें शरद पवार से लेकर विपक्ष के तमाम बड़े नेता एक मंच पर साथ दिखाई पड़े. जिससे लगा था कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो रहा है. हाल में हुए उपचुनाव में विपक्ष की जीत से साबित हुआ है कि एकजुट विपक्ष बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. लेकिन विपक्ष की इस जीत में कांग्रेस कहीं नहीं थी. रीजनल पार्टियां कांग्रेस को ज़्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है.

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कांग्रेस मॉइनॉरिटी विभाग ने लूटी वाह-वाही

इफ्तार के इस प्रोग्राम के राजनीतिक मायनों के चर्चा के बीच कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन नदीम जावेद की काफी तारीफ हो रही है. हालांकि नदीम जावेद कहते हैं कि पार्टी का प्रोग्राम था. सबने मिलकर काम किया है. खासकर सीनियर नेताओं ने सहयोग दिया है. नदीम जावेद इसलिए भी खुश हैं कि राहुल गांधी ने इफ्तार के प्रस्ताव को मान लिया. कांग्रेस की टीम ने इसे सफल बनाने के लिए काफी मेहनत की है. इस टीम के अहम सदस्य आसिफ जाह का कहना है कि इस बार कोशिश की गई कि मुस्लिम तबके के धार्मिक नेता से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग को बुलाया जाए, जिसमें वो कामयाब रहे हैं. महाराष्ट्र के विधायक सत्तार अहमद का कहना था कि इस तरह के प्रोग्राम से मुस्लिम तबके में अच्छा पैगाम जाएगा.

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इफ्तार की राजनीति

इफ्तार के ज़रिए राजनीति का खेल नया नहीं है. लेकिन बदले राजनीतिक समीकरण में इसकी महत्ता घटी है. 2014 के चुनाव के बाद राजनीतिक दल भी इफ्तार को लेकर कशमकश में रहे हैं. लेकिन आम चुनाव के एक साल पहले राहुल गांधी का इफ्तार कराने का फैसला काफी हिम्मत वाला है. ऐसे में जब कांग्रेस के ऊपर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगातार लग रहा है. कांग्रेस में बनी एंटोनी कमेटी ने भी हार की वजह अतिअल्पसंख्यकवाद को बताया था. लेकिन कैराना उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस उत्साहित है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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