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'जादू की झप्पी' नहीं कांग्रेस की जरूरत कुछ और है...राहुल शायद समझ नहीं रहे

राहुल को सोचना होगा देश बराबरी और मजबूती के साथ काम करने वाले नेतृत्व को स्वीकार करता है, बचकानी हरकत कर अपरिपक्वता दिखाने वाले को नहीं.

Updated On: Jul 20, 2018 04:45 PM IST

Amitesh Amitesh

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'जादू की झप्पी' नहीं कांग्रेस की जरूरत कुछ और है...राहुल शायद समझ नहीं रहे

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपना भाषण खत्म करने के बाद जिस अंदाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जादू की झप्पी ली, उससे पूरे सदन का माहौल ही बदल गया. हंसी के फव्वारे छूट पड़े. सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के सभी सांसद भी अपनी हंसी को रोक नहीं पाए.

प्रधानमंत्री मोदी को भी इस झप्पी का अंदाजा नहीं रहा होगा. तभी तो राहुल के वापस जाने पर तुरंत उन्होंने बुलाकर हाथ मिलाया. कुछ पल के  लिए मोदी को भी लगा कि अबतक उनके खिलाफ आरोप लगा रहे राहुल को क्या हो गया जो उन्होंने इस अंदाज में उनकी तरफ कदम बढ़ा दिया.

हो सकता है कि राहुल गांधी अपनी छवि सुधारने के लिहाज से ऐसा कर रहे हों. राहुल गांधी को ऐसा लग रहा हो कि इस तरह के कदम उठाकर सदन के भीतर और बाहर उनकी गरिमा काफी बढ़ जाएगी. शायद ज्यादा विनम्र बनने की कोशिश भी कर रहे हों, लेकिन, ऐसा कर उन्होंने अपना ही मजाक उड़ाने का काम किया है.

राहुल ने अपने भाषण के अंत में कहा ‘आपके लिए मैं पप्पू हो सकता हूं लेकिन, मैं नफरत नहीं करता.’ इस बयान के तुरंत बाद राहुल अपनी सीट से सत्ता पक्ष की तरफ बढ़े जहां प्रधानमंत्री मोदी बैठे हुए थे.

राहुल का यह बयान अपने-आप का मजाक उड़ाने वाला लग रहा है. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि सोशल मीडिया पर बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी को पप्पू बोल कर उनका मजाक उड़ाते रहे हैं. पलटवार कांग्रेस खेमे की तरफ से भी होता रहा है. यहां तक कि भगवा ब्रिगेड राहुल गांधी की समझ और उनके अनुभव का भी कुछ इसी अंदाज में मजाक उड़ाती रहती है. लेकिन, राहुल ने सदन के भीतर इस बात का जिक्र कर अपने ऊपर बन रहे मजाक को और अमली जामा पहना दिया.

अब तो सोशल मीडिया पर चलने वाली गॉसिप और मनोरंजन से आगे निकलकर बात पब्लिक डोमेन में आ चुकी है. क्या अपने लिए पप्पू शब्द को सार्वजनिक मंच पर लाना राहुल गांधी की बहादुरी मानी जा सकती है. राहुल को इस बात का अंदाजा नहीं होगा, वरना पूरी बहस के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर हमला बोलते-बोलते राहुल गांधी इस तरह अपने ही भाषण की हवा नहीं निकालते.

लोकसभा चुनाव में अब तो एक साल से भी कम वक्त बचा है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव के दौरान माइलेज लेने की कोशिश की जा रही है. दोनों अपने-अपने अंदाज में जनता के बीच अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रहे हैं. मोदी के खिलाफ अपने-आप को खड़ा करने की कोशिश में राहुल गांधी तो काफी पहले से ही लगे हुए हैं. लेकिन, सदन के भीतर उनकी तरफ से दिखाए गए इस तेवर ने मोदी के सामने अपने-आप को खड़ा करने की कोशिश को झटका दिया है.

देश की जनता मोदी के सामने विकल्प के तौर पर उसी व्यक्ति को देखना पसंद कर सकती है जिसमें मोदी से टक्कर लेने की क्षमता हो, वो दम दिखे. राहुल गांधी अपने भाषण के दौरान आक्रामक अंदाज में मोदी सरकार के जुमले और हर मोर्चे पर विफलता को उठा रहे थे. उनके भाषण पर हंगामा भी हुआ. भले ही तथ्यों को लेकर सरकार के मंत्रियों और बीजेपी के सांसदों के साथ उनकी नोंक-झोंक भी हुई हो, भले ही उनके तथ्यों को लेकर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी नसीहत दी हो, लेकिन, राहुल ने अपने भाषण के जरिए बीजेपी को तिलमिलाने पर मजबूर कर दिया था.

राहुल के भाषण और उस भाषण में लगाए जा रहे आरोपों को लेकर बीजेपी बिफर गई थी. लेकिन, राहुल ने उस आक्रामकता की तथ्यों के साथ पैकेजिंग नहीं की. अगर ऐसा कर पाते तो संसद के भीतर नए तरीके से अपने-आप को खड़ा करने में सफल हो पाते.

लेकिन, राहुल ने यहां भी पूरे भाषण की हवा निकाल दी. खुद को पप्पू वाले बयान ने कांग्रेस अध्यक्ष की मोदी के साथ बराबरी में खड़े होने की कोशिश को झटका दे दिया. इसके बाद दी गई जादू की झप्पी और फिर इस झप्पी के बाद अपनी सीट पर वापस आकर आंख मारने का उनका अंदाज शायद यह जताने के लिए था कि हमने सदन में भूकंप ला ही दिया है.

लेकिन, राहुल को सोचना होगा देश बराबरी और मजबूती के साथ काम करने वाले नेतृत्व को स्वीकार करता है, बचकानी हरकत कर अपरिपक्वता दिखाने वाले को नहीं.

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