Co Sponsor
In association with
In association with
S M L

गुजरात दौरा: राहुल गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर झुकाव जोखिम भरा है

सॉफ्ट हिंदुत्ववादी विचारधारा के करीब जाने पर मुसलमानों के छिटकने का खतरा बना रहेगा.

Vivek Anand Updated On: Sep 26, 2017 08:05 PM IST

0
गुजरात दौरा: राहुल गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर झुकाव जोखिम भरा है

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने तीन दिन के गुजरात दौरे की शुरुआत द्वारकाधीश के दर्शन और उनकी पूजा अर्चना से की. उन्होंने श्रीकृष्ण के चरणों में शीश नवाए, आंखें बंद कर प्रार्थना करते और माथे पर तिलक लगाए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की.

द्वारकाधीश के दर्शन के बाद वहां के पुरोहित ने राहुल गांधी को उनकी दादी इंदिरा और पिता राजीव गांधी के हस्ताक्षर वाले संदेश दिखाए. संदेश पढ़ते राहुल गांधी की तस्वीर के साथ कांग्रेस की ओर से ट्वीट किया गया, ‘द्वारकाधीश दर्शन के बाद तीर्थ पुरोहित ने दादी और पिता के हस्ताक्षरयुक्त संदेश दिखाए, राहुल ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया’.

गुजरात चुनाव अभियान की शुरुआत द्वारकाधीश मंदिर से पूजा अर्चना कर और कांग्रेस का इसे परंपरा से जोड़कर बताना हिंदुओं को खुश करने का संदेश देता नजर आता है. बदले राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी खुद को सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि के करीब दिखाना चाहते हैं. इससे वो गुजरात के उन हिंदू वोटरों को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी धार्मिक परंपरा में श्रीकृष्ण रचे-बसे हैं.

सब जानते हैं कि जिस तरह से उत्तर भारत की हिंदू परंपरा में श्रीराम का सबसे ज्यादा महत्व है उसी तरह गुजरात की हिंदू धार्मिक परंपरा में श्रीकृष्ण स्थान रखते हैं. यहां के हिंदुओं के अभिवादन की शुरुआत जय श्रीकृष्ण के साथ होती है. हिंदू गुजराती किसी भी शुभ काम की शुरुआत श्रीकृष्ण का नाम लेकर करता है.

लेकिन सवाल है कि क्या गुजराती हिंदू परंपरा के करीब दिखाने के लिए राहुल गांधी कांग्रेस की सेकुलर छवि के साथ समझौता नहीं कर रहे हैं और क्या ऐसा करना फायदेमंद साबित होगा? क्योंकि सेकुलर पार्टी की छवि पुष्ट बनाए रखने के लिए ही कांग्रेस ऐसे किसी आयोजन से चुनावी अभियान की शुरुआत से बचती रही है.

Dwarka: Congress vice president Rahul Gandhi meeting the supporters during his visit to Dwarka in Gujarat on Monday. PTI Photo (PTI9_25_2017_000200B)

गुजरात में लोगों से मिलते राहुल गांधी

दरअसल राहुल गांधी की ये कोशिश बीजेपी और उसकी मजबूत हिंदुत्ववादी छवि के काट के बतौर दिखती है. राहुल गांधी हिंदू वोटर्स को लुभाने के लिए संघ और बीजेपी मॉडल को अपना रहे हैं. हालांकि सॉफ्ट हिंदुत्ववादी विचारधारा के करीब जाने पर मुसलमानों के छिटकने का खतरा बना रहेगा. बीजेपी के मैदान में जाकर उसी के स्टाइल में खेलना कांग्रेस को परेशानी में डाल सकता है.

राहुल गांधी का ये मूव है रिस्की

राहुल गांधी दो हफ्ते के यूएस दौरे से लौटे हैं. यूएस में दिए उनके भाषणों ने एक सकारात्मक असर पैदा किया है. उनके भाषणों की तारीफ हो रही है. उन्होंने पीएम मोदी और उनकी सरकार पर सधा हुआ हमला बोला है. एक ऐसे दौर में जब कांग्रेस को अपने युवराज में भरोसा पैदा होता दिख रहा है. राहुल गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व छवि की ओर झुकाव कांग्रेस का एक रणनीतिक मूव हो सकता है लेकिन ये रिस्क भरा है.

ये भी पढ़ें: राहुल गांधी को उन पर बनाए चुटकुलों से ऊपर उठकर देखना होगा

राहुल गांधी के गुजरात दौरे के एक दिन पहले ही बीबीसी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली ने कांग्रेस और उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए थे. इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में मार्क टली ने कांग्रेस की राजनीति पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए महात्मा गांधी की तरह धर्म और राजनीति को जोड़ना होगा.

टली ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को अपनी विचारधारा को फिर से मांजना होगा. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को धर्म के लिए जगह बनानी होगी'. मार्क टली का मानना है कि कांग्रेस जब धर्मनिरपेक्षता की बात करती है तो उससे ऐसा लगता है कि वो धर्म विरोधी है, जबकि ज्यादातर भारतीय धार्मिक हैं. टली के अनुसार कांग्रेस को 'बहुलतावादी धार्मिकता में लिपटे हुए राष्ट्रवाद' को अपनाना चाहिए.

मार्क टली ने कहा कि कांग्रेस और उसके आज के समर्थकों को लगता है कि अगर आप हिंदू धर्म या धर्म के बारे में कुछ बोल रहे हैं तो आप आरएसएस के हैं.

इस लिहाज से देखें तो राहुल गांधी के गुजरात दौरे में मार्क टली के विचारों के हिसाब बदलाव दिखता है. प्रश्न ये उठता है कि कांग्रेस के भीतर ये नया प्रयोग गुजरात में कितना सफल होगा?

Dwarka: Congress vice president Rahul Gandhi meeting the supporters during his visit to Dwarka in Gujarat on Monday. PTI Photo (PTI9_25_2017_000201B)

गुजरात के सौराष्ट्र दौरे पर राहुल गांधी

यूपी में फेल रहा था राहुल गांधी का फॉर्मूला

राहुल गांधी ने इसी तरह का प्रयोग यूपी चुनावों के दौरान भी किया था. सितंबर 2016 में यूपी चुनाव के पहले राहुल गांधी ने किसान यात्रा की शुरुआत की थी. और इस यात्रा के चौथे दिन उन्होंने अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की थी. इसके बाद राहुल ने मंदिर के महंत ज्ञानदास से मुलाकात भी की थी. हनुमानगढ़ी मंदिर अयोध्या में राम जन्‍मभूमि के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण जगह है.

ये भी पढ़ें: क्या बीजेपी राहुल गांधी को ताकतवर बना रही है?

ये पहला मौका था जब 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद गांधी परिवार का कोई सदस्य अयोध्या दौरे पर था. हालांकि, हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा के बाद भी वो राहुल गांधी ने अयोध्या में रामलला के दर्शन नहीं किए थे. राहुल ने नफे नुकसान का पूरा जायजा लेकर खुद को रामजन्मभूमि स्थल से दूर रखा था. उस वक्त भी राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे कांग्रेस के नरम हिंदुत्‍व एजेंडे के रूप में देखा था.

उस वक्त कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर कांग्रेस ब्राह्मण केंद्रित चुनावी अभियान चला रही थी. प्रशांत किशोर ने ही राहुल गांधी की एक महीने की यूपी यात्रा की पूरी रुपरेखा तैयार की थी. प्रशांत किशोर की रणनीति कांग्रेस को यूपी में प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने पुराने वोटबैंक मुस्लिम, ब्राह्मण और ओबीसी तबके के कुछ हिस्‍सों का समर्थन हासिल करना था. लेकिन राहुल का अयोध्या दौरा भी यूपी में कांग्रेस की खोई जमीन वापस नहीं दिलवा पाया. यूपी चुनावों में ये रणनीति फेल रही थी. गुजरात में बदले स्वरूप में इसे फिर से आजमाया जा रहा है.

दरअसल कांग्रेस बीजेपी की मजबूत हिंदुत्ववादी विचारधारा के काट के तौर पर ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वो भी धार्मिक महत्व को स्वीकार करती है. गुजरात के सामाजिक जीवन में धर्म का अहम स्थान है. शायद यही वजह है कि राहुल गांधी सौराष्ट्र के तीन दिनों के दौरे पर कई मंदिरों में जाएंगे.

Dwarka: Congress vice president Rahul Gandhi meeting the supporters during his visit to Dwarka in Gujarat on Monday. PTI Photo (PTI9_25_2017_000202B)

सॉफ्ट हिंदुत्व की विचारधारा कांग्रेस के लिए फायदेमंद नहीं

कांग्रेस का सेकुलर छवि के साथ खुद को हिंदुत्ववादी विचारधारा के करीब जाने का प्रयास पूर्व में भी असफल ही रहा है. 80 के दशक में शाहबानो प्रकरण में अदालत के आदेश के बावजूद अध्यादेश लाकर कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की बदनाम मिसाल पेश की थी. इसके बाद राजीव गांधी ने 80 के दशक के आखिरी दौर में हिंदुत्ववादी विचारधारा को पुष्ट करने का चोरी-छिपे प्रयास किया था.

1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उत्तर प्रदेश में तब के मुख्यमंत्री रहे वीर बहादुर सिंह के जरिए बाबरी मस्जिद के विवादित हिस्से में पूजा पाठ के लिए ताला खुलवाया था. जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद को रामजन्मभूमि आंदोलन को हवा देने का मौका मिल गया. 1989 में शिलापूजन की इजाजत देकर राजीव गांधी ने कांग्रेस के बजाए वीएचपी और बीजेपी को मजबूत होने का मौका दे दिया.

हिंदुओं को खुश करने का राजीव गांधी का ये प्रयास विफल ही रहा. इसलिए राहुल गांधी के इस बार के गुजरात दौरे में उनके मंदिर दर्शन को मुसलमान किस तरह से देखते हैं इसे रुककर देखना होगा. गुजरात में मुसलमान मजबूत वोट बैंक हैं. चुनाव में उनकी खासी अहमियत है.

ये भी पढ़ें: बर्कले में राहुल गांधी के तेवर कांग्रेस के अच्छे दिनों की आस दिखाते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो गुजरात में पिछले 20 वर्षों में कांग्रेस बेहतर स्थिति में है. बीजेपी के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी समेत कई फैक्टर काम कर रहे हैं. पाटीदारों का आंदोलन बीजेपी सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी है. राहुल गांधी के गुजरात आगमन का हार्दिक पटेल ने जिस तरह से स्वागत किया है, वो भविष्य में बनने वाले नए तरह के रणनीतिक गठबंधन का संकेत दे रहा है.

गुजरात के जिस सौराष्ट्र इलाके का राहुल गांधी दौरा कर रहे हैं. वो गुजरात की राजनीति में अहम है. गुजरात की कुल 182 में से 58 सीटें इस क्षेत्र से हैं. 2015 में नरेंद्र मोदी के गुजरात से दिल्ली जाने के बाद हुए पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने 11 में से 8 जिला पंचायतों पर कब्जा किया था. किसानों के इस इलाके में सरकार के खिलाफ रोष है.

राहुल गांधी के लिए ये सबसे अच्छा मौका है. बावजूद इसके सॉफ्ट हिंदुत्व के करीब जाने के कांग्रेस के प्रयोग की सफलता पर शक होता है.

Gujarat Election Results 2017

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
AUTO EXPO 2018: MARUTI SUZUKI की नई SWIFT का इंतजार हुआ खत्म

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi