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राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के दिन बहुरेंगे?

कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार पार्टी की अध्यक्ष रही सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल गांधी को औपचारिक तौर पर कमान सौंपने जा रही हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 11, 2017 10:22 AM IST

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राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के दिन बहुरेंगे?

कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी 16 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यभार संभाल सकते हैं. सोमवार को राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन पत्र वापस लेने की आखिरी तारीख सोमवार को है. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी ही एकमात्र उम्मीदवार हैं, जिन्होंने इस पद के लिए पर्चा दाखिल किया है.

राहुल गांधी के पक्ष में 89 नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं. पार्टी संविधान के अनुसार इसके बाद नए अध्यक्ष का निर्वाचित होने की घोषणा की जाती है.

कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार पार्टी की अध्यक्ष रही सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल गांधी को औपचारिक तौर पर कमान सौंपने जा रही हैं. अब राहुल गांधी के पास ही कांग्रेस को फिर से पटरी पर लाने की अहम जिम्मेदारी होगी.

गौरतलब है कि इस समय कांग्रेस पार्टी का देश के पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में ही सरकार है. कांग्रेस के पास बड़े राज्य के नाम पर सिर्फ कर्नाटक में सरकार है. वहां भी अगले छह महीने में चुनाव होने हैं. कुछ महीने पहले कांग्रेस को पंजाब में जीत मिली थी, लेकिन इसका श्रेय राहुल गांधी की जगह कैप्टन अमरिंदर सिंह के खाते में चला गया.

कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य मधुसुदन मिस्त्री और भुवनेश्वर सोमवार को राहुल गांधी के अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा कर सकते हैं.

कांग्रेस चुनाव समिति के अध्यक्ष रामचंद्रन के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 16 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष पद की नियुक्ति के प्रमाणपत्र सौंपे जाएंगे.

राजनीति में राहुल गांधी को हमेशा अपनी मां सोनिया गांधी का मार्गदर्शन मिलता रहा है

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इसके साथ ही सोनिया गांधी 16 दिसंबर को आधिकारिक तौर पर अपने बेटे राहुल गांधी को 132 सालों की विरासत की कमान सौंप देंगी. राहुल गांधी इस पद पर आसीन होने वाले नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी से और खानदान के छठे सदस्य हैं.

राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले ही अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभानी भी शुरू कर दी है. राहुल गांधी इस वक्त दिल्ली की राजनीति से दूर गुजरात में अपना दिन गुजार रहे हैं.

पिछले एक महीने से राहुल गांधी गुजरात विधानसभा के चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं. इसी व्यस्त कार्यक्रम के बीच 4 दिसंबर को राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय आकर अध्यक्ष पद का पर्चा दाखिल किया था.

गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा का चुनाव प्रचार अपने आखिरी चरण में है. राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी की तरफ से एकमात्र स्टार कैंपेनर हैं. राहुल गांधी जहां कांग्रेस पार्टी के 22 साल के सूखे को दूर करना चाह रहे हैं, वहीं बीजेपी अपने अभेद्य किले को किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नहीं देना चाह रही है.

गुजरात चुनाव में पिछले कुछ दिनों से बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों की तरफ से शब्दों के तीखे वाण चल रहे हैं. शब्दों के इस वाण से कौन घायल हो रहा है और किसको यह चुनाव घाव देने वाला यह तो 18 दिसंबर को पता चलेगा.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी दूसरे अंदाज में दिखाई दे रहे हैं. खासकर दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान राहुल का जनता से संवाद या फिर पीएम मोदी पर उनका दिया बयान बताता है कि राहुल ने अब पहले की गलतियों से सीख ले लिया है.

काफी सालों के बाद यह देखने को मिला है कि पीएम मोदी, राहुल गांधी के तैयार किए एजेंडे में फंस रहे हैं. राहुल गांधी का यह नया अवतार उनको कितना आगे ले कर जाएगा यह तो भविष्य के गर्भ में है. लेकिन, फिलहाल राहुल गांधी अकेले ही गुजरात में कांग्रेस पार्टी की नैया पार लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

गुजरात चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के रास्ते में रोड़ा नहीं अटकाएगा. निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि राहुल गांधी के कंधे पर ही अब पार्टी की बागडोर है. ऐसे में पार्टी की गिरती साख और घटते जनाधार को राहुल कहां तक पहुंचा पाएंगे?

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