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2019 महाभारत: राहुल तो दौड़ रहे हैं, मगर हांफ रही कांग्रेस का क्या

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस न्याय के साथ लड़ने के लिए बनी है और दुनिया की कोई ताकत हमें न्याय के लिए लड़ने से नहीं रोक सकती.

Updated On: Mar 19, 2018 05:54 PM IST

FP Staff

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2019 महाभारत: राहुल तो दौड़ रहे हैं, मगर हांफ रही कांग्रेस का क्या

रविवार को आयोजित कांग्रेस महाधिवेशन के दूसरे दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने समापन भाषण देते हुए बीजेपी, आरएसएस और मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उनके भाषण से साफ था कि 2019 में होने वाले चुनाव किसी महाभारत से कम नहीं होने वाले हैं. अपने भाषण में उन्होंने 2019 में बीजेपी की हार को तय बताया. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जोश से भरे राहुल गांधी बुरी तरह हांफ रही कांग्रेस को कैसे खड़ा करेंगे.

राहुल गांधी ने बीजेपी की तुलना कौरवों से और कांग्रेस की तुलना पांडवों से कर तो दी. उन्होंने कहा की सदियों पहले कुरुक्षेत्र में एक बड़ी लड़ाई लड़ी गई थी. इस लड़ाई में पांडव सच्चाई की तरफ थे तो वहीं कौरवों ने सत्ता बचाने के लिए लड़ाई लड़ी. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस न्याय के साथ लड़ने के लिए बनी है. उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत हमें न्याय के लिए लड़ने से नहीं रोक सकती. मगर पांडवों के पास कम से कम 5 बड़े योद्धा और कृष्ण जैसे सलाहकार थे. युवराज राहुल के पास ऐसे कौन से 4 महारथी और चाणक्य हैं किसी को भी नहीं पता है.

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कांग्रेस में बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हमें बदलना होगा, कांग्रेस को बदलना होगा. कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच एक दीवार है, उसे तोड़ना होगा. राहुल ने कहा कि हम गुस्से से नहीं बल्कि प्यार और सम्मान के जरिए वरिष्ठ नेताओं के साथ पेश आकर इस दीवार को तोड़ेंगे. हमने गुजरात में साधारण कार्यकर्ताओं को टिकट दिया जिसके बाद पीएम मोदी सी-प्लेन में देखे गए.

अगर हम यह दीवार पूरी तरह तोड़ दें तो मोदीजी सबमरीन में दिखाई देंगे. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का सूट बदल गया है. राहुल गांधी ने कहा कि किसी पैराशूट नेता को टिकट नहीं मिलेगा. राहुल गांधी ने कहा कि जो कांग्रेस के भीतर युवा हैं उनके लिए और जो नहीं हैं उनके लिए भी जगह है. मैं कांग्रेस को पुराने कांग्रेस के रूप में देखना चाहता हूं.

तो कुल मिलाकर ये बात है कि राहुल गांधी का जोश अपनी जगह है. लेकिन उनकी कमियां. उनका खास मौकों पर गायब रहना. पार्टी के अंदर की निराशा. मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं की बयानबाजी को कैसे खत्म किया जाएगा पता नहीं है. इन समस्याओं के साथ महाभारत जीतना, थोड़ा मुश्किल तो है.

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