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डर लगता है राहुल कहीं कांग्रेस को भी न भूल जाएं

कांग्रेस ने बेंगलुरु में गरीबों को दस रुपये में खाना खिलाने के लिये इंदिरा कैंटीन की शुरुआत की. इसके उद्घाटन में राहुल इंदिरा कैंटीन की जगह अम्मा कैंटीन बोल गए.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Aug 17, 2017 03:00 PM IST

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डर लगता है राहुल कहीं कांग्रेस को भी न भूल जाएं

कांग्रेस ने बेंगलुरु में गरीबों को दस रुपये में खाना खिलाने के लिए इंदिरा कैंटीन की शुरुआत की. इस कैंटीन का उद्घाटन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने किया.

यहां तक तो सब ठीक था लेकिन उद्घाटन के मौके पर राहुल गांधी दादी इंदिरा का नाम ही भूल गए और बोल गए ‘अम्मा कैंटीन’. राहुल की जुबान ऐसी फिसली कि ‘इंदिरा कैंटीन’ को वो तमिलनाडु में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता के वक्त शुरू की गई ‘अम्मा कैंटीन’ बता गए. भाषण देते हुए राहुल ने कहा कि 'हर किसी को 'अम्मा कैंटीन' का फायदा उठाना चाहिए'. हालांकि बाद में उन्होंने इसे ठीक करते हुए इंदिरा कैंटीन कहा लेकिन तब तक तीर निकल चुका था.

अब ये उस थाली का जायका था जिसकी वजह से राहुल की जुबान फिसली या फिर वाकई ‘अम्मा कैंटीन’ की कॉपी करने वाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष के मुंह से अम्मा का कॉन्सेप्ट लीक हो गया.

जो भी हुआ लेकिन बेंगलुरु में अम्मा तो अमर हो ही गईं. जयललिता ने ही गरीबों के भरपेट मुफ्त खाना खिलाने के लिए अम्मा कैंटीन की शुरुआत की थी. बाद में कैंटीन की कहानी दिल्ली और यूपी तक पहुंच गई.

rahul gandhi

राहुल ने इस मौके पर बीजेपी पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि इस भोजन को खाने के लिए बीजेपी नेताओं की कतार भी लगेगी. राहुल ने भरपेट खाना भी खाया लेकिन बीजेपी का पेट वो अपनी बातों से भर गए.

कांग्रेस के भावी अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल अब कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल भी बनते जा रहे हैं. कभी उनके हाथों से मुद्दे खिसक जाते हैं तो कभी जुबान फिसल जाती है.

इससे पहले भी यूपी में आलू की फैक्ट्री पर वो बीजेपी के निशाने पर आ गए थे. उन्होंने कहा था कि ‘केंद्र में मेरी सरकार नहीं है, मैं तो सिर्फ दबाव बना सकता हूं. आप चाहते हैं कि यहां पर आलू की फैक्ट्री लगाई जाए, लेकिन मोदी सरकार आपकी मांग नहीं मान रही है.’

इसके अलावा भी कई वाकये राहुल को सोशल मीडिया पर ट्रोल करने का काम कर चुके हैं. उनको जब पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था तब उन्होंने अपने भाषण में कहा कि  ‘आज सुबह जब मैं रात को सोकर उठा’. सारे कांग्रेसी इस सोच में डूब गए कि राहुल सुबह की बात कर रहे हैं या फिर रात की.

उनके बयानों से एक बात साफ है कि भूचाल तो कांग्रेस में ही आता है. मणिपुर में चुनाव प्रचार के वक्त राहुल बोले, 'सोचा कि अच्छे दिन की पिक्चर चल रही है... 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे'! लेकिन पता चला कि पिक्चर का नाम निकला 'शोले' और आ गए 'गब्बर सिंह'.

RahulGandhi

पहली बात तो ये कि मणिपुर में उन्हें दिलवाले दुल्हनिया और शोले का नाम लेने की क्या जरूरत थी. अव्वल दूसरी बात ये कि शोले और गब्बर सिंह में फर्क क्या था?

मणिपुर में लोग उनके भाषण से लिफाफे का मजमून जान गए. आखिर बीजेपी की सरकार यहां भी बन गई.

राहुल खुद को वक्ता के तौर पर साबित करना चाहते हैं. संसद में उन्होंने सूट-बूट की सरकार का जुमला छोड़ा. ये जुमला हिट हो गया. राहुल फॉर्म में आ गए. उन्होंने जोश में आ कर भूचाल लाने वाला बयान दे डाला. इस बयान ने कांग्रेस को बैकफुट पर खड़ा कर दिया.

राहुल जब अपनी लय में होते हैं तो क्या से क्या बोल जाएं ये उनके बगल वाले को भी नहीं मालूम होता. एक बार चुनाव प्रचार के वक्त मंच पर उन्हें छह लोगों के नाम ले कर उनके लिये वोट मांगने थे. जब हाथ का कागज देखा तो उनके नाम ही गायब थे. मंच पर ही उन्होंने पूछ लिया कि वो नाम कहां हैं?

पॉलिटिक्स को जहर बताने वाले राहुल ने एक बार कहा था, 'आज हर जगह पॉलिटिक्स है. ये आपकी शर्ट में है, यह आपकी पैंट में है. हर जगह है ये पॉलिटिक्स.'

नोटबंदी के मामले में पांच मिनट के भीतर ही उनके दो ट्वीट आ गए थे जिसका सोशल मीडिया पर जम कर मजाक उड़ा. एक ट्वीट में वो पीएम मोदी पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें नहीं लगता कि नोटबंदी के फैसले के बारे में वित्तमंत्री अरूण जेटली को बताया गया होगा तो दूसरे ट्वीट में वो कह रहे हैं कि ये सबसे बड़ा स्कैम है और मोदी सरकार ने बीजेपी को इसके बारे में पहले ही बता दिया था.

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हाल ही में बिहार की सियासत में मचे घमासान और भारी उलटफेर पर उनकी प्रतिक्रिया ने भी लालू प्रसाद यादव को झटका देने का काम किया था. राहुल ने कहा था कि उन्हें चार महीने पहले से ही मालूम था कि नीतीश ये गठबंधन तोड़ने वाले हैं.

अब ऐसे में राहुल के बयानों से बीजेपी की जगह कांग्रेस को डर नहीं लगेगा तो फिर किसे लगेगा? आज वो दादी इंदिरा को भूल गए और अम्मा याद रहीं तो बहुत मुमकिन है कि वो कल कांग्रेस को भी किसी मामले में भूल जाएं. एक बार वैसे भी वो पीएम मोदी को विपक्ष का नेता बताकर तारीफ कर ही चुके हैं.

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