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राहुल का पीएम मोदी पर हमला कहीं उल्टा न पड़ जाए?

एक नोटबंदी करके परेशान है, दूसरा नोटबंदी पर कुछ नहीं कर पाने से परेशान है.

Updated On: Dec 15, 2016 08:26 AM IST

Mridul Vaibhav

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राहुल का पीएम मोदी पर हमला कहीं उल्टा न पड़ जाए?

कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को पहली बार एक अलग तरह की आक्रामक मुद्रा में नजर आए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपने राजनीतिक जीवन का अब तक का सबसे आक्रामक हमला बोला.

उन्होंने पैने अंदाज में कहा कि उनके पास ऐसी सूचना है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी का निजी भ्रष्टाचार साबित होता है. राहुल गांधी का कहना था कि भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार सत्तारूढ़ दल, विपक्ष को बोलने से इस तरह रोक रहा है.

राहुल गांधी का कितना असर?

राहुल गांधी जिस तरह ये बातें कह रहे हैं उससे तो यह लगता है कि वो लोकसभा में जैसे ही बोलेंगे, भारतीय राजनीति का परदा बिजली की गरज और चमक के वातावरण में एक अलग ही तरह से उठेगा.

लेकिन राहुल गांधी के अब तक के राजनीतिक जीवन को देखकर ऐसा तो नहीं लगता कि उनके पास ऐसी सूचनाएं रहती होंगी, जो भारतीय राजनीति में भूचाल तो क्या किसी को भारी परेशानी में भी डालती होंगी.

As Congress vice-president Rahul Gandhi queued up outside the State Bank of India Branch to withdraw cash in New Delhi, India on November 11, 2016, in an apparent show of solidarity with the common people. (Jyoti Kapoor/SOLARIS IMAGES)

राहुल गांधी ने संसद के सेंट्रल हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि सरकार उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दे रही है क्योंकि सरकार को डर है कि इससे उसे दिक्कतें हो जाएंगी.

पहले भी राहुल गांधी कह चुके हैं कि सरकार उन्हें संसद में बोलने नहीं दे रही है. अगर बोलने दे तो भूकंप आ जाएगा.

राहुल गांधी के इस बयान की केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने जमकर खिल्ली उड़ाई. लेकिन राहुल गांधी अब फिर आक्रामक होकर एक नया बयान दिया है.

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से डरे हुए हैं. वे घबराए हुए हैं. उन्होंने यहां तक कहा है कि अगर उन्हें लोकसभा में बोलने दिया गया तो उनकी सूचना से प्रधानमंत्री का पूरा गुब्बारा फूट जाएगा.

हालांकि भाजपा के नेताओं ने राहुल गांधी के बयान का यह कहकर मजाक उड़ाया है कि राहुल गांधी को कुछ भी नहीं आता है. राहुल गांधी बेकार के आरोप लगा रहे हैं.

भाजपा नेता, चाहे वो रविशंकर प्रसाद हों या स्मृति ईरानी, राहुल के भूकंप वाले बयान पर कह चुके हैं कि राहुल सिर्फ अपनी पार्टी के भीतर ही भूकंप ला सकते हैं, बाहर कहीं कुछ नहीं होता.

कहीं ये बयान उल्टा न पड़ जाए

राजनीतिक तौर पर देखें तो यह भी कहा जा सकता है कि राहुल गांधी का हमला एक राजनीतिक बूमरैंग भी साबित हो सकता है. क्योंकि अगर उन्हें संसद में बोलने दिया गया और उसमें ऐसा कुछ नहीं निकला तो राहुल गांधी की वर्तमान छवि और ज्यादा अगंभीर हो जाएगी.

राहुल गांधी को अगर कोई हमला करना है तो वह चाहे इंतजार करें लेकिन उनके पास सुबूत नहीं हुए और बात कमजोर निकली तो उनके लिए यह बुरा हादसा साबित होगा. नोटबंदी से घिरी सरकार को उबरने का एक और माैका विपक्ष बैठे-बिठाए ही दे देगा.

राहुल गांधी ने कहा कि संसद में बोलना उनका और विपक्ष का राजनैतिक और संवैधानिक अधिकार है. उन्हें इससे रोकना अनुचित है.

उन्होंने चुनौती दी कि वे संसद में बहस के लिए बिना शर्त तैयार हैं. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री इस तरह संसद से भाग नहीं सकते.

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के निर्धन वर्ग के खिलाफ फैसला लिया है और देश उनसे जवाब मांग रहा है.

rahul gandhi

हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि वह संसद में बहस के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष का ही रवैया सही नहीं है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि विपक्ष उन्हें संसद में बोलने नहीं दे रहा है.

संसद का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर से चल रहा है और संभवत: शुक्रवार को यह सत्र आखिरी बार बैठेगा. लेकिन नोटबंदी ने इस सत्र पर पूरी तरह पानी फेर दिया है और भारी विवाद हो रहा है.

नोटबंदी की ओखल में सत्ता-विपक्ष दोनों का सिर

आपको याद होगा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी पिछले सप्ताह सरकार और संसदीय कार्य का संचालन करने वाले लोगों की आलोचना कर चुके हैं.

लेकिन भारतीय सियासत का यह अजब दस्तूर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वही बात कह रहे हैं, जो विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बोल रहे हैं. मोदी कह रहे हैं कि उन्हें विपक्ष नहीं बोलने दे रहा है और राहुल गांधी कह रहे हैं कि सरकार उन्हें नहीं बोलने दे रही है। सवाल ये है कि आखिर कौन सच बोल रहा है?

लेकिन इस सवाल के भीतर एक लाजवाब जवाब ये छुपा हुआ है कि इस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने जाल में फंसे हुए हैं और उससे निकल नहीं पा रहे हैं. दोनों ओर से भाषण साफ बता रहे हैं कि दोनों को रहमतों की बारिश का इंतजार है, भले ही यह शीतकाल है.

अच्छा है सर्दी में भीगने से ठिठुरने के बहाने कोई कंबल ओढ़कर छुपने का बहाना तो मिल जाएगा. एक नोटबंदी करके परेशान है, दूसरा नोटबंदी पर कुछ नहीं कर पाने से परेशान है.

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