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क्या गुजरात की संभावित असफलता से बचने के लिए है राहुल की ताजपोशी

सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने वाली सोनिया गांधी के बाद राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की टाइमिंग महत्वपूर्ण है

Syed Mojiz Imam Updated On: Nov 19, 2017 06:51 PM IST

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क्या गुजरात की संभावित असफलता से बचने के लिए है राहुल की ताजपोशी

गुजरात चुनाव को लेकर कांग्रेस में संशय बना हुआ है. कांग्रेस को यकीन नहीं है कि गुजरात विधानसभा में वो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का तिलिस्म तोड़ पाएगी. इसलिए चुनाव के नतीजे आने से पहले राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष की गद्दी सौंपने की तैयारी है. सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में संगठन चुनाव को लेकर अहम फैसला लिया जाएगा.

कांग्रेस वर्किंग कमेटी, चुनाव कमेटी को अध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए हरी झंडी देगी. जिसके बाद राहुल गांधी के औपचारिक चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा. उम्मीद यही है कि चुनाव के ज़रिए राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाया जाएगा. हालाकि कांग्रेस वर्किंग कमेटी सीधे ही अध्यक्ष पद पर मनोनीत कर सकती है. सूत्र बता रहें है कि 28 दिसंबर को पार्टी के स्थापना दिवस के दिन आखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी. इस एआईसीसी के सेशन में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने पर मुहर लग जाएगी. कांग्रेस में किसी भी अध्यक्ष के चयन या निर्वाचन के बाद एआईसीसी की मुहर लगनी जरूरी है.

गुजरात चुनाव है अहम

गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने जिस तरह का प्रचार किया उससे कांग्रेस बीजेपी के मुकाबले लड़ाई में आ गई. ये उत्साह नतीजो के बाद ठंडा ना पड़ जाए इसलिए रणनीति के तहत गुजरात के नतीजो से पहले राहुल गांधी उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बनाया जाएगा. राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग 2014 के चुनाव के बाद से की जा रही थी. कांग्रेस के कई नेता इस मांग में शामिल रहे कि राहुल गांधी को कमान सौंप देनी चाहिए. लेकिन पार्टी के सीनियर नेता इसके लिए तैयार नहीं थे.

दलील ये थी कि राहुल गांधी से जरूरी सोनिया गांधी की लीडरशिप रहेगी. पार्टी में क्राइसिस की स्थिति है और सोनिया गांधी ही सबको साथ लेकर चलनें में सक्षम है. सीनियर नेताओ के विरोध की वजह से अध्यक्ष पद पर ताजपोशी नहीं हो पाई. लेकिन अब कांग्रेस के नेताओ को लग रहा है कि हालात साज़गार है. मोदी सरकार की लोकप्रियता घट रही है. जीएसटी और नोटबंदी की वजह से जनता कांग्रेस के साथ खड़ी है. राहुल गांधी की लीडरशिप में गठबंधन के नेता भी काम कर सकते है.  कांग्रेस के इस नज़रिए को बल दिया है शिवसेना और एमएनएस के नेताओं ने जिन्होंने राहुल गांधी की तारीफ हाल में की है.

rahul gandhi aloo sona

चुनाव राजनीति में राहुल

हालाकिं राहुल गांधी खुद 2004 में सांसद चुन लिए गए. लेकिन उनकी अगुवाई में कांग्रेस के ज्यादा कामयाबी नहीं मिली. 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी को मात मिली. 2012 के विधानसभा चुनाव में राहुल ने बेनी प्रसाद वर्मा पर दांव लगाया पार्टी हार गई. बेनी प्रसाद वर्मा पार्टी छोड़कर चले गए. 2017 में सपा के साथ गठबंधन किया और कांग्रेस का सफाया हो गया. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ये हालत रहीं कि पार्टी को विपक्ष के नेता का पद भी लोकसभा में नहीं मिल सका. इन सब के बीच दिल्ली में पार्टी सिफर पर पहुंच गई. लेकिन 2013 में कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस कामयाब रही. बिहार में नीतिश लालू गठबंधन में सरकार बनी. नीतिश फिर बीजेपी के साथ चले गए. हाल में सिर्फ पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिल पायी.

सोनिया गांधी सबसे लंबे समय रहीं कांग्रेस की अध्यक्ष

वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1997 में सक्रिय राजनित में कदम रखा. 1998 में पार्टी की कमान कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने उनको सौंप दी. सोनिया गांधी के नाम अब तक सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने का रिकार्ड है. हालाकि सोनिया गांधी के खिलाफ साल 2000 में अध्यक्ष पद के चुनाव में जितेन्द्र प्रसाद ने ताल ठोंकी लेकिन बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था. सोनिया गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने यूपीए बनाई और सटीक गठबंधन करके 2004 में तब के अजेय माने जाने वाले अटल आडवाणी की जोड़ी को शिकस्त दी. यूपीए की दो बार सरकार बनी लेकिन सोनिया गांधी प्रधानमंत्री नहीं बनी बल्कि मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया.

इससे पहले सोनिया गांधी ने 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने की सरकार गिरने के बाद प्रधानमंत्री बनने की असफल कोशिश की. मुलायम सिंह ने विदेशी मूल का मुद्दा बनाकर सोनिया गाँधी को समर्थन देने से इनकार कर दिया था. पार्टी के तीन नेता शरद पवार पीए संगमा और तारिक अनवर ने कांग्रेस से अलग होकर नयी पार्टी बनायी. लेकिन सोनिया गांधी अपने फैसलों से लोंगों को चौंकाती रही है. कभी पीएम बनने से इनकार, कभी ऑफिस ऑफ प्रोफिट के मुद्दे पर संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना.

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