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ट्विटर पर सवाल दागने के बाद राहुल संसद में क्यों हो जाते हैं मौन?

हाल ही के कुछ महीनों में राहुल ने ट्विटर पर पीएम मोदी की नीतियों, बयानों और फैसलों पर कई सवाल दागे

Updated On: Feb 07, 2018 07:02 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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ट्विटर पर सवाल दागने के बाद राहुल संसद में क्यों हो जाते हैं मौन?

जब सुरेश प्रभु रेल मंत्री थे तो उन पर आरोप लगाया जाता था कि वो ट्विटर से रेल चलाते हैं. रेल दुर्घटनाओं के बाद ये तक कहा गया कि ट्विटर से रेल नहीं चलती. सुरेश प्रभु ने इस्तीफा तक देने का मन बना लिया था. लेकिन वो रेल मंत्रालय से हटने से पहले रेल यात्रियों को ट्विटर का टूल जरूर दे गए जिसने कई यात्रियों की आपात स्थिति में काफी मदद की.

सोशल मीडिया सियासत का सबसे बड़ा प्लैटफार्म बन चुका है तो अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा अखाड़ा ट्विटर. यहां मौलिकता की दरकार भी नहीं. यहां से सवाल दाग कर ट्रोल होने में भी ठीक वैसा ही लुत्फ है जैसा कि कहा जाता है कि ‘बदनाम हुए तो क्या, नाम भी तो हुआ.’

यहां देखा जाता है कि किसके कितने फॉलोअर हैं तो कौन किसको फॉलो कर रहा है. ट्विटर पर छिड़ी जंग देश में बहस का रूप भी ले लेती है. ट्विटर पर गैर जिम्मेदाराना बयान विवाद तक खड़ा कर देते हैं. कई लोग अपने ट्वीट पर विवाद होने के बाद या तो माफी मांगते देखे गए या फिर उनको ट्वीट तक डिलीट करना पड़ा.

आज की राजनीति में वक्त के मिजाज को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी ट्विटर पर बहुत ज्यादा एक्टिव हैं. उनका ऑफिस ऑफ राहुल गांधी नाम से बना ट्वीटर अकाउंट पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर बड़े हमले करता है. ORG के हैशटैग ट्रैंड करते हैं और सोशल मीडिया पर राहुल के हमले लगातार पैने और तेज होते जा रहे हैं. लेकिन इतनी सारी कवायद के बावजूद एक बड़ा सवाल राहुल के साथ साथ कांग्रेस के लिए भी पहेली सा दिखता है. ट्विटर के जरिए पीएम मोदी पर निशाना साधने वाले राहुल आखिर क्यों संसद में मौन हो जाते हैं? जबकि कांग्रेस के अवचेतन में ये बात बसी हुई है कि राहुल जब भी संसद में बोलेंगे तो भूचाल आ जाएगा.

इसके बावजूद संसद में उनकी चुप्पी बेहद रहस्यमयी नजर आती है. खास बात ये है कि वो संसद से बाहर अपनी बात कहने में गुरेज नहीं करते. यहां तक कि विदेशी जमीन पर भी वो देश की असहिष्णुता और बेरोजगारी का मुद्दा उठा चुके हैं. वो देश में दूसरे प्लेटफार्म या फिर सेमिनार में भी सवाल उठाते हैं लेकिन संसद में उनके सवाल शांत हो जाते हैं मानों उनको जवाब मिल गया हो जैसे.

संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है. इस मंदिर में आम आदमी से जुड़ी परेशानियों और मुद्दों को उठाया जाता है. लेकिन राहुल तमाम संवेदनशील मुद्दों को संसद की बजाए अब ट्विटर पर ही तरजीह देने लगे हैं. जबकि राहुल ने ही  संसद में कलावती का जिक्र कर एक आम आदमी की परेशानी की तरफ सबका ध्यान भी कभी खींचा था. वो ये भी जानते हैं कि देश का आम आदमी ट्विटर की पहुंच से कितना दूर है. लेकिन उनकी सियासत में शायद ट्विटर ज्यादा करीब है. तभी हाल ही के कुछ महीनों में राहुल ने ट्विटर पर पीएम मोदी की नीतियों, बयानों और फैसलों पर कई सवाल दागे.

गुजरात चुनाव के वक्त उन्होंने मोदी सरकार से ट्वीट के जरिए सवालों की श्रृंखला शुरू की थी. हर दिन वो पीएम मोदी से ट्विटर पर सवाल पूछते. उन्होंने 'गुजरात मांगे जवाब' सीरीज के तहत मोदी सरकार और राज्य सरकार पर जमकर आरोप लगाए. आधार कार्ड को लेकर भी उन्होंने ट्वीटर का सहारा लिया और आधार योजना को उन्होंने नागरिकों को आधिकार विहीन बनाने वाला हथियार करार दिया.

जब पीएम दावोस में विश्व आर्थिक मंच की सालाना शिखर बैठक में भाग लेकर लौटे तो राहुल ने ट्वीट कर पूछा कि था कि क्या वह अपने विमान में कुछ काला धन वापस लाए हैं?'

New Delhi : Prime Minister Narendra Modi emplanes for China to attend the 9th BRICS Summit, in Xiamen, at AFS Palam in New Delhi on Sunday. PTI Photo/PIB(PTI9_3_2017_000045B)

यहां तक कि उन्होंने पीएम मोदी के कार्यक्रम 'मन की बात' पर भी निशाना साधा. राहुल ने ट्वीट किया था कि 'पीएम को नए साल के पहले मन की बात में युवाओं की बेरोजगारी, डोकलाम से चीन को बाहर निकालने और हरियाणा में हुए रेप की घटनाओं पर बात करनी चाहिए.'

कभी वो अर्थव्यवस्था, नोटबंदी पर सवाल उठाते हैं तो कभी जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बता कर तंज कसते हैं. इस वक्त ट्विटर के जरिए उन्होंने राफेल डील निशाना साधा है.

उन्होंने केंद्र सरकार से राफेल से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने को कहा है. उनके ऑफिस ऑफ राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट से सवालों की बौछार निकली. उन्होंने ट्वीट किया, ‘अति गोपनीय ( वितरण के लिए नहीं). आरएम ( रक्षा मंत्री) कहती हैं कि प्रत्येक राफेल विमान के लिए प्रधानमंत्री और उनके ‘भरोसेमंद’ मित्र के बीच हुई बातचीत एक राजकीय गोपनीयता है.’

लेकिन जब लोकसभा में पीएम मोदी को चर्चा का जवाब देना था तब राहुल ट्विटर की तरह एक्टिव नहीं दिखे. राहुल ने संसद में एक बार भी अपने ट्विटर वाले सवालों और राफेल से जुड़े आरोपों को नहीं दोहराया.

पीएम मोदी के जवाब के केंद्र में कांग्रेस रही. संसद में विपक्ष के भारी हंगामे के बावजूद मोदी का भाषण नहीं रुका. उन्होंने कांग्रेस पर चुन-चुन कर हमले किए. विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे लेकिन नेहरू काल से लेकर राहुल युग तक के दौर पर मोदी कांग्रेस पर सवाल उठाते रहे.  कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी के एक भी आरोपों पर प्रतिक्रिया देने की कोशिश नहीं की.

कांग्रेस अध्यक्ष को वैसे भी अपनी बात कहने का वक्त मिल सकता था. लेकिन जिन आरोपों को वो ट्विटर पर हथियार बनाते आए हैं उन्हीं आरोपों को लेकर वो संसद में खामोश रह गए. संसद में चुप्पी और ट्विटर पर गर्जना का विरोधाभास कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भरी नई सियासी पारी के मिजाज के विपरीत है. राहुल चाहते तो ट्वीट में कह गई बातों को संसद में आवाज दे सकते थे. राहुल के पास कई मौके थे जिनका उन्हें संसद में जवाब देना चाहिए था. बात देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भी उठी तो स्वर्गीय राजीव गांधी का भी जिक्र हुआ. यहां तक कि राहुल के अध्यक्ष बनाए जाने की चुनावी प्रक्रिया पर भी मोदी ने तंज किया. उन्होंने पूछा कि वो चुनाव था या फिर ताजपोशी?

Narendra Modi in LS

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर देश के विभाजन का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर वल्लभ भाई पटेल देश के पहले पीएम होते तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी भारत का हिस्सा होता. मोदी यहीं नहीं रुके. उन्होंने कांग्रेस को लोकतंत्र का पाठ न पढ़ाने की नसीहत भी दे डाली. उन्होंने गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश को आगे ले जाने की बजाए पूरी पार्टी एक ही परिवार का गीत गाती रही. लेकिन राहुल का संसद में तात्कालिक प्रतिकार देखने को नहीं मिला. क्या ये मौलिकता की कमी है या फिर वाकई उनके पास जवाब नहीं था?

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