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JVM विधायकों के दल-बदल मामले पर सवालों के घेरे में झारखंड स्पीकर कोर्ट

वर्ष 2014 में बीजेपी ने जेवीएम के 8 में से 6 विधायकों को तोड़कर अपने में मिला लिया था. तब से बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की लड़ाई स्पीकर कोर्ट में लड़ रही है

Updated On: Jan 17, 2018 04:40 PM IST

Brajesh Roy

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JVM विधायकों के दल-बदल मामले पर सवालों के घेरे में झारखंड स्पीकर कोर्ट

झारखंड विधानसभा का स्पीकर कोर्ट सवालों के घेरे में है. झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के 6 बागी विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के 3 साल बाद भी इसपर कोई फैसला नहीं आने से सवाल उठ रहे हैं.

वर्ष 2014 में बीजेपी ने सरकार बनाने के समय जेवीएम के 8 में से 6 विधायकों को तोड़कर पार्टी में शामिल कर लिया था. तब से बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की लड़ाई स्पीकर कोर्ट में लड़ रही है.

तारीख पर तारीख पड़ती जा रही है और रघुवर सरकार का कार्यकाल भी 3 साल से अधिक हो चला है. जेवीएम के बागी 6 विधायकों में से 2 रघुवर सरकार में मंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं. झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 17 जनवरी से बुलाया गया है. बजट सत्र 7 फरवरी तक चलेगा.

जेवीएम रघुबर सरकार को इस मामले में चोट पहुंचाने पर आमादा है. मजेदार पहलू यह भी है कि बीजेपी का दामन थामने वाले सभी 6 विधायक भी स्पीकर दिनेश उरांव पर निशाना साध रहे हैं. खबर यह भी है कि इन्होंने मुख्यमंत्री रघुवर दास पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि वो स्पीकर का चेहरा बदल दें. यानी सिर्फ जेवीएम ही नहीं सत्ता पक्ष के निशाने पर भी स्पीकर कोर्ट है. ऐसे में सियासत का यह खेल मनोरंजक हो चला है.

राजनीति की प्रयोगशाला रहा है झारखंड

नवंबर, 2000 में बिहार से अलग होकर नया राज्य बनने वाले झारखंड को राजनीति की प्रयोगशाला के तौर पर जाना जाता है. राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में सत्ता के गणित का खेल यहां खूब खेला जाता है. जेवीएम के 6 बागी विधायकों के दल बदल का मामला भी इसी का एक उदाहरण भर है.

28 दिसंबर, 2014 को जब रघुवर दास ने मुख्यमंत्री बनकर झारखंड की बागडोर संभाली थी तब उनके पास 37 विधायकों का समर्थन हासिल था. बहुमत से 4 विधायक कम. यहीं से सत्ता के गणित बिठाने का खेल शुरु हुआ था. बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (प्रा) के 8 विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन 11 फरवरी, 2015 को इनमें से 6 विधायक दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गए. तब बीजेपी ने कहा था कि जेवीएम का बीजेपी में विलय हो गया है.

Jharkhand MLA joining BJP

झारखंड विकास मोर्चा के जीते 8 में से 6 विधायकों ने फरवरी, 2015 में बीजेपी का दामन थाम लिया था

बीजेपी का दामन थामने वाले विधायकों में नवीन जायसवाल, अमर बाऊरी, रणधीर सिंह, जानकी यादव, गणेश गंझु और आलोक चौरसिया के नाम शामिल थे. इस पाला बदल के बाद जेवीएम के खाते में सिर्फ दो विधायक प्रदीप यादव और प्रकाश राम शेष रह गए.

3 साल में हुई 33 सुनवाई लेकिन फैसला नहीं आया 

राज्य के पहले मुख्यमंत्री रह चुके बाबूलाल मरांडी के चेहरे पर इस मामले को लेकर पीड़ा अब साफ दिखने लगी है. मानो वो कहना चाह रहें हों, 'कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन'. इसपर बाबूलाल कहते हैं, '3 साल में 33 सुनवाई हुई लेकिन कोई फैसला नहीं आया. स्पीकर दिनेश उरांव बीजेपी आलाकमान के इशारे पर चल रहे हैं. ऐसे में लोकतंत्र कैसे बचेगा? क्या रघुवर सरकार जब अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी तब आएगा फैसला?'

कोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहे पार्टी के एडवोकेट आर एन सहाय भी मानते हैं कि यह मामला लंबा खिंच गया है. हालांकि सहाय यह भी कहते हैं कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में एक मामला लंबित है यदि उस पर सुनवाई हुई तो झारखंड का यह मसला भी स्पीकर कोर्ट से सुलझ जाएगा.

जेवीएम ने हालिया राज्यसभा चुनाव के वक्त दल-बदल मामले पर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. हाईकोर्ट ने तब यही कहा था कि स्पीकर कोर्ट ही पहले इस पर अपना फैसला दे.

Jharkhand High Court

अपने विधायकों के पाला बदलने को लेकर जेवीएम झारखंड हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटा चुका है

बदल सकता है झारखंड में स्पीकर का चेहरा

बड़ी बात यह भी है कि बीजेपी में शामिल जेवीएम के 6 बागी विधायकों ने भी स्पीकर पर निशाना साधना शुरु कर दिया है. रघुबर सरकार में कृषि मंत्री रणधीर सिंह को यह आशंका है कि कहीं बीजेपी स्पीकर के बहाने अंतिम समय यानी चुनाव से पहले कोई खेल न खेल दे.

यही वजह है कि रणधीर सिंह ने पिछले दिनों चेतावनी भरे लहजे में सार्वजनिक मंच से कहा, 'बीजेपी को हम तेल नहीं लगाने वाले, बीजेपी ही हमें तेल लगाएगी'. उन्होंने और मंत्री अमर बाउरी समेत सभी 6 विधायकों ने स्पीकर दिनेश उरांव को बदलने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास पर दवाब बनाना शुरु कर दिया है. ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक नए फार्मूले के साथ मंगलवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात की है.

मुख्यमंत्री के फार्मूले की जो खबर है उसके अनुसार दिनेश उरांव को मंत्री पद देकर उनकी जगह राधा कृष्ण किशोर या फिर विमला प्रधान को स्पीकर की कुर्सी पर बिठाया जा सकता है.

बीजेपी के खेल की काट के लिए एकजुट हुआ विपक्ष

झारखंड विकास मोर्चा की यह पीड़ा अब संयुक्त विपक्ष का दर्द बन चला है.  बाबूलाल मरांडी को इस मसले पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने साथ देने का भरोसा दिया है. नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि रघुवर सरकार यहां खुल्लम-खुल्ला लोकतंत्र को शर्मसार कर रही है.

Spekar Dinesh Oraon

विधायकों के पाला बदलने के मामले में अभी तक फैसला नहीं आने से झारखंड विधानसभा के स्पीकर दिनेश उरांव सवालों के घेरे में है

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा है कि मौजूदा बजट सत्र में कांग्रेस इस मसले पर जेवीएम के साथ होगी. विपक्ष दल-बदल मुद्दे को लेकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु से मिलने की बात कह रहा है. बजट सत्र शुरु होने पर जेवीएम के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि स्पीकर कोर्ट में और विलंब हुआ तो वो इस मुद्दे पर जनता की अदालत से लेकर सदन तक में अपनी बात रखेंगे.

रघुवर के अगले कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें

इस मसले पर मुख्यमंत्री रघुवर दास अगला कदम क्या उठाते हैं इसपर अब सबकी निगाहें टिकी हैं. यदि वो स्पीकर का चेहरा बदलने में सफल हो जाते हैं तो यह मसला कुछ दिनों के लिए और ठंडे बस्ते में जा सकता है. अगले साल झारखंड में विधानसभा का चुनाव होना है ऐसे में रघुवर दास जानते हैं कि तब तक तो सबकुछ ठीक-ठाक चल ही जाएगा.

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