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पंजाब चुनाव: जीत के लिए जालंधर में मोदी ने साधा पंजाबी 'राष्ट्रवाद' का सुर

मोदी पंजाबी राष्ट्रवाद कार्ड खेलकर अकाली-बीजेपी गठबंधन को जिताना चाहते हैं.

Updated On: Jan 28, 2017 10:51 AM IST

Sanjay Singh

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पंजाब चुनाव: जीत के लिए जालंधर में मोदी ने साधा पंजाबी 'राष्ट्रवाद' का सुर

किसी भी चुनाव में जीत के लिए चुनावी सभाओं में सही सुर साधना जरूरी होता है. जालंधर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में उनके भाषण से लगता है कि पीएम ने वह सुर पा लिया है. मोदी पंजाबी उप-राष्ट्रवाद का इमोशनल कार्ड खेलकर अकाली दल-बीजेपी गठबंधन को पंजाब में वापस सत्ता में लाना चाहते हैं.

मोदी ने पंजाब राज्य के साथ भारतीय सेना के गहरे जुड़ाव के साथ अपने भाषण की शुरुआत की. उन्होंने 'अनाज के कटोरे' के तौर पर पंजाब की अहमियत बताई और राज्य की ‘आन-बान और शान’ खूब चर्चा की.

पंजाब के 'राष्ट्रवाद' को जगाने की कोशिश

पीएम मोदी पंजाब में अंतर्निहित उप-राष्ट्रवाद और सम्मान की भावनाओं के कंधे पर बंदूक रख राजनीतिक विरोधी पार्टियों खासकर कांग्रेस पर तगड़ा हमला बोला. पंजाब विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी अकाली-बीजेपी गठबंधन को सबसे तगड़ी चुनौती कांग्रेस दे रही है. मोदी ने भारतीय सेना और पंजाब से आने वाले अफसरों और जवानों के योगदान का जिक्र किया. इस तरह से उन्होंने वोटरों को भावनात्मक तौर पर अकाली-बीजेपी गठबंधन का साथ देने के लिए मनाने की कोशिश की. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक, वन रैंक-वन पेंशन को लागू करने जैसे कदमों का इस्तेमाल राष्ट्रवादी थीम के तौर पर किया गया. मोदी की सोच थी कि इससे राज्य के लोग सीधे तौर पर उनके साथ जुड़ेंगे.

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मोदी के मुताबिक, पंजाब की ‘आन-बान और शान’ निजी स्वार्थ के काम कर रही विरोधी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के निशाने पर है. प्रधानमंत्री के शब्द इस लिहाज से काफी महत्व रखते हैं कि उनकी जालंधर में सभा राहुल गांधी की पंजाब के मजीठिया में स्पीच खत्म करने के महज दो घंटे के बाद हुई. राहुल ने अपनी सभा में सत्ताधारी बादल परिवार पर कड़ा हमला बोला. कांग्रेस उपाध्यक्ष ने हर तरह के भ्रष्टाचार के लिए बादल फैमिली को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि बादल परिवार की वजह से ही राज्य का 70 फीसदी युवा ड्रग्स की लत से जूझ रहा है.

हालांकि, मोदी ने राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने विषय पलटते हुए पूछा कि पंजाब के युवा इतनी प्रतिबद्धता और अनुशासन के साथ आर्मी में आते हैं, लेकिन आज उसी पंजाब के युवाओं को कांग्रेस और अन्य पार्टियां बदनाम कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘पंजाब के युवाओं के लिए जाने कैसे-कैसे शब्द का प्रयोग कर रहे हैं, दुनिया में जा-जाकर पंजाब के युवाओं को बदनाम कर रहे हैं.’

आप को टक्कर में नहीं मानते मोदी

राहुल गांधी और कांग्रेस की तरह ही, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने भी मौजूदा विधानसभा चुनावों में ड्रग्स को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया हुआ है. मोदी ने आप का एक भी बार नाम नहीं लिया. लगता है कि पंजाब में अपने गठबंधन के लिए आप को एक चुनौती के रूप में दिखाना ही नहीं चाहेत. मोदी ने पंजाब की जनता से अपील की कि वे ईवीएम मशीन के बटन का इस्तेमाल राज्य के सम्मान को बदनाम करने वालों को सबक सिखाने के लिए करें.

क्या इमोशनल बातों पर वोट देगी जनता?

मोदी समझते हैं कि ऐसा कहना करने के मुकाबले कहीं आसान है. कांग्रेस 2013 के बाद से सभी असेंबली, पार्लियामेंटरी और लोकल बॉडी इलेक्शंस हारने के बाद पहली बार पंजाब में सत्ता हासिल करने का मौका देख रही है. कांग्रेस के अमरिंदर सिंह अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ असली चुनौती बनकर उभरे हैं.

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मोदी ने राज्य में राहुल और अन्य लोगों के ड्रग्स के कहर के आरोपों से निपटने के लिए तथ्यों के बजाय भावनात्मक उप-राष्ट्रवाद का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि जब पंजाब में आतंकवाद के सबसे बुरे दौर में भी किसी ने पंजाब का नाम खराब करने की ऐसी कोशिश कभी नहीं की, जैसा अब किया जा रहा है.

'कांग्रेस का रंग क्या है, रूप क्या है, राह क्या है... पता ही नहीं चल रहा है कुछ. ये बिना सत्ता के ऐसे छटपटा रहे हैं जैसे पानी बिना मछली. कांग्रेस एक बीची हुई बात है, आखिरी सांस पर अपना गुजारा करने वाला दल है. जो नाव डूब चुकी है, जिस नाव में कुछ बचा नहीं है...क्या पंजाब के लोग ऐसी नाव में कदम रखने की सोचेंगे?'

गठबंधन के भूखे कांग्रेसी

मोदी ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर जोर देने में लगाया कि किस तरह से कांग्रेस के नेता किसी भी तरह के गठबंधन को करने के लिए लालायित रहते हैं. अपनी नाव तैरती रहे, इसके लिए वे कितने भी अप्राकृतिक गठबंधन के साथ जाने को तैयार रहते हैं. वेस्ट बंगाल में लेफ्ट के साथ गठजोड़ और यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ इसी की मिसाल हैं.

कांग्रेस को एक नकारात्मक राजनीति करने वाली पार्टी के तौर पर पेश करते हुए उन्होंने अपनी पार्टी की छवि विकास की राजनीति करने वाली पार्टी के तौर पर पेश की. उन्होंने कहा, ‘विकास की राजनीति करो, विनाश की राजनीति 70 साल से की है.’

बड़े बादल का बचाव

प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि बादल परिवार पर बड़े हमले हो रहे हैं और उनकी छवि के इर्दगिर्द नकारात्मक माहौल राज्य में बना हुआ है. ऐसे में उनके लिए यह महत्वपूर्ण था कि वह प्रकाश सिंह बादल का बचाव करें और उनके कद और शख्सियत का जोरशोर से प्रचार करें.

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कभी सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने से लेकर बाद आज सबसे सीनियर मुख्यमंत्रियों में आते हैं. वह एकमात्र ऐसे नेता हैं जो कि किसानों के हितों के लिए चिंतित हैं और वह ऐसे नेता हैं जो कि हिंदू-सिख एकता के लिए हमेशा से काम करते रहे हैं.

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