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पंजाब में बिल्ली और शेर साथ आएंगे क्या?

अकाली-बीजेपी गठबंधन के लिए पंजाब में पहली बार खतरे के संकेत 2014 के चुनाव में दो अलग-अलग नतीजों में दिखे थे

Updated On: Mar 11, 2017 07:56 AM IST

Sandipan Sharma Sandipan Sharma

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पंजाब में बिल्ली और शेर साथ आएंगे क्या?

पंजाब में 2014 में जिसकी शुरुआत हुई थी वो चीज तीन साल बाद अपने तर्कसंगत अंजाम तक पहुंच चुकी है. तब मतदाता बादलों से बदला लेने को बेताब थे. तीन साल के इंतजार के बाद मार्च 2017 में लोगों ने बेहद शांत, लेकिन भयानक ढंग से बदला ले लिया है.

अकाली-बीजेपी गठबंधन के लिए पंजाब में पहली बार खतरे के संकेत 2014 के चुनाव में दो अलग-अलग नतीजों में दिखे थे. पहला था कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह के हाथों अकालियों के गढ़ अमृतसर में वित्त मंत्री अरुण जेटली की बुरी हार. दूसरा था मालवा इलाके में आम आदमी पार्टी का असाधारण प्रदर्शन.

इन दोनों नतीजों से दो बातों के संकेत मिलते हैं. पहली यह कि मतदाता बादलों को सबक सिखाना चाहते थे. यह तभी साफ हो गया था जब उन्होंने अरुण जेटली को नकार दिया था. उन्हें अकालियोें ने बड़ी जीत का वादा कर पंजाब बुलाया था, इस तरह अमृतसर का चुनाव नाक का सवाल बन गया था. दो, बादलों से छुटकारा पाने के लिए पंजाबी कैप्टन और केजरीवाल, दोनों पर भरोसा करने को तैयार दिखे.

पंजाब में एक्जिट पोल के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि 2014 की कहानी अपने अंजाम तक पहुंच चुकी है. 2017 में अकाली दल की हालत पतली दिखती है और लगता है कि कैप्टन और केजरीवाल को सत्ताधारी दल के खिलाफ मौजूद भावनाओं का संयुक्त रूप से फायदा पहुंचा है.

Kejriwal in Punjab

त्रिशंकु विधानसभा के संकेत

एक्जिट पोल के नतीजे यह भी संकेत दे रहे हैं कि पंजाब में त्रिशंकु विधानसभा हो सकती है. इसकी संभावना इसलिए है क्योंकि लगता है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया है.

वहीं अकाली-बीजेपी गठबंधन उतनी सीटें जीत सकता है जितनी कि 117 सदस्यों वाली विधानसभा में बाकी दोनों पार्टियों को बहुमत से दूर रखने के लिए काफी हैं.

अगर आम आदमी पार्टी 55 सीटों से ज्यादा जीतती है यानी सभी एक्जिट पोल का औसत तो ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पार्टी का प्रदर्शन मालवा में शानदार रहने की संभावना है.

सतलज नदी के दक्षिण का इलाका मालवा कहलाता है. इस बात की संभावना है कि आप मालवा की 69 सीटों में से दो-तिहाई जीत सकती है. और यह दोआबा और माझा में एक दर्जन के करीब सीटें और जीत सकती है.

इसी तरह, सभी एक्जिट पोल के औसत के मुताबिक कांग्रेस 55 सीटें जीत रही है, ऐसा इसलिए क्योंकि वो माझा और दोआबा में ज्यादातर सीटें जीत सकती है और मालवा में, खास तौर पर राजस्थान के नजदीक, कुछ और सीटें जीत सकती हैं.

Amritsar: Congress party candidate Navjot Singh Sidhu addresses an election campaign rally for Punjab Assembly elections at Verka, about 25 km from Amritsar on Monday. PTI Photo (PTI1_23_2017_000239B)

कांग्रेस के स्टार प्रचारक नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर में एक चुनावी सभा के दौरान. फोटो: पीटीआई

आप को खल सकती है सिद्धू की कमी

चंडीगढ़ की ओर बढ़ रही दो पार्टियों के बीच में अकाली-बीजेपी गठबंधन पीस रहा है. गठबंधन को हुए नुकसान का जायजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खबरों के मुताबिक पार्टी के चेहरे और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद में भगवंत मान से बुरी तरह हार सकते हैं.

यह विडंबना ही कही जाएगी कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक ही वजह से बहुमत से दूर रह सकती हैं. कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही है क्योंकि कैप्टन के रूप में पार्टी के पास मुख्यमंत्री पद के लिए एक भरोसेमंद नाम है.

लेकिन यह बहुमत से दूर रह सकती है क्योंकि जनता में इसके केंद्रीय नेतृत्व के लिए सम्मान और भरोसे की कमी है. इसके उलट, आप का प्रदर्शन अच्छा दिख रहा है क्योंकि लोगों को केजरीवाल में भरोसा है लेकिन पार्टी साफ बहुमत से दूर रह सकती है क्योंकि पार्टी के पास मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भरोसेमंद नाम नहीं है.

अगर आप ने नवजोत सिंह सिद्धू को बहला-फुसला लिया होता तो एक्जिट पोल जो बता रहे हैं, नतीजे उससे अलग हो सकते थे. अमृतसर में उनकी लोकप्रियता और प्रभाव से आम आदमी पार्टी को इस कड़े मुकाबले में कुछ और सीटें और थोड़ी मदद मिल सकती थी.

आप के लिए सिद्धू वो पिंच हिटर साबित हो सकते थे जिनके चौके-छक्कों से स्कोर कार्ड में कुछ अहम सीटें जुड़ सकती थीं. 11 मार्च को पता चलेगा कि आम आदमी पार्टी को अपने फैसले पर पछतावा होगा या नहीं.

आप का दांव किस पर?

अगर आप जीती तो ये देखना दिलचस्पी होगा कि मुख्यमंत्री कौन बनता है. हालांकि भगवंत मान और एचएस फूलका दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन केजरीवाल खुद भी दिल्ली छोड़कर पंजाब सरकार की अगुवाई करने आ सकते हैं.

आप का अभियान भी 'पंजाब तेरे नाल-नाल केजरीवाल' के नारे के इर्द-गिर्द था और मतदाता भी दिल्ली के हरियाणवी मुख्यमंत्री के उनके नेता बनने के खिलाफ नहीं लगते. कई लोग मानते हैं कि आप को बहुमत मिला तो केजरीवाल मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

अगर कांग्रेस जीती तो कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के अगले मुख्यमंत्री होंगे. चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वो ऐसे शेर बनेंगे जो न सिर्फ बिल्ली को बल्कि उसके बलूंगड़े (बिल्ली के बच्चे) को भी खा जाएंगे.

उनका इशारा पंजाब पर राज कर रहे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके खानदान की ओर था. कांग्रेस को बहुमत मिला तो कैप्टन को अपना वादा पूरा करने का मौका मिलेगा. लेकिन कुछ सीटें कम पड़ी तो शेर और बलूंगड़े को शायद मजबूरी में साथ रहना पड़ सकता है. लेकिन ये बाद की कहानी है, शायद आखिरी वोट गिने जाने के बाद सुनाने की.

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