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पंजाब चुनाव 2017: चुनावी युद्ध की धुरी है जलालाबाद

जलालाबाद सीट पर डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का मुकाबला आम आदमी पार्टी के भगवंत मान और कांग्रेस के युवा नेता रवनीत सिंह बिट्टू से है

Updated On: Feb 02, 2017 08:02 AM IST

Sandipan Sharma Sandipan Sharma

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पंजाब चुनाव 2017: चुनावी युद्ध की धुरी है जलालाबाद

पंजाब के लोग कानून को शब्दश: भी मानते हैं और दिल से भी. 26 जनवरी को जब ड्राई डे होता है तो यहां की शराब की दुकानें दिन भर बंद रहीं. मगर सांझ ढलते ही बाकी हिंदुस्तान में भले शराब की दुकानें न खुली हों, पंजाब में खुल गईं.

अमृतसर में एक दुकानदार ने कहा कि ड्राई डे है न जी, ड्राई नाइट की फिक्र क्यों?

पंजाब जो अपने पटियाला पेग के लिए मशहूर है. जो ड्राई नाइट्स यानी बिना शराब की रातों को सख्त नापसंद करता है. उस पंजाब में चुनावी मुद्दों पर चर्चा शुरू होते ही शराब तक जा पहुंचती है.

स्थानीय पंजाबी अखबार 'अजीत' के संपादक, हरकंवलजीत सिंह कहते हैं कि 'पंजाब में चित्ता मुद्दा है, मगर नतीजे शराब से तय होंगे'.

जलालाबाद, पंजाब के फाजिल्का जिले में एक तहसील है. इसका नाम एक नवाब के बेटे के नाम पर पड़ा था. ये पंजाब के सबसे अमीर कस्बों में गिना जाता है. बरसों पहले नवाबों ने यहां के राय सिखों को हराकर अपना राज कायम कर लिया था. इस साल राय सिख ऐसे चुनावी मुकाबले में फंसे हैं, जिसमें उनके वोट से नतीजा तय होगा.

सुखबीर बादल और भगवंत मान आमने-सामने

sukhbir singh badal

इस बार जलालाबाद सीट पर डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का मुकाबला आम आदमी पार्टी के भगवंत मान और कांग्रेस के युवा नेता रवनीत सिंह बिट्टू से है. सुखबीर सिंह बादल के बारे में लोग कहते हैं कि प्रकाश सिंह बादल तो नाम के सीएम हैं. राज तो सुखबीर ही चला रहे हैं.

भगवंत मान उन्हें सुक्खा कहकर बुलाते हैं. वो अकाली ताकत के प्रतीक हैं. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, दोनों मानते हैं कि अगर जलालाबाद सीट से सुखबीर बादल हार जाते हैं, तो ये अकालियों के लिए सबसे बड़ा झटका होगा. इससे प्रकाश सिंह बादल की वंशवाद की राजनीति बरसों पीछे चली जाएगी. युद्ध की तरह चुनावी जंग में भी अगर नेता हार जाता है तो मानो विरोधी ने आधा युद्ध जीत लिया.

इसीलिए आम आदमी पार्टी ने अपने सबसे लोकप्रिय स्थानीय नेता भगवंत मान को सुखबीर बादल के मुकाबले में उतारा है. कांग्रेस ने भी पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के बेटे और लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को इस मुकाबले में उतारकर इसे बेहद दिलचस्प बना दिया है.

अब चुनाव मैदान में भगवंत मान हों तो बात खुद ब खुद शराब की तरफ मुड़ जाती है. मगर आप जैसा सोच रहे हैं, बात वैसी नहीं. यानी यहां हम भगवंत मान की शराब पीने की आदत की बात नहीं कर रहे हैं. जलालाबाद में राय सिखों की आबादी 60 हजार है. इलाके में शराब का धंधा मुख्य तौर पर राय सिख ही चलाते हैं.

जलालाबाद में राय सिख अमीर और ताकतवर माने जाते हैं. बरसों से राय सिख एक साथ ही वोट देते रहे हैं. आम तौर पर वो अपने समुदाय के उम्मीदवार को ही वोट देते हैं. लेकिन इस बार राय सिखों ने अपनी ताकत भगवंत मान के पीछे लगाई है.

हरकंवलजीत सिंह कहते हैं कि राय सिख, भगवंत मान को अपना आदमी मानते हैं. वो मान से सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं.

2012 के चुनाव में सुखबीर बादल ने विरोधियों का सफाया कर दिया था. सुखबीर ने पचास हजार वोटों से जीत हासिल की थी. कांग्रेस तो मुकाबले में भी नहीं थी. एक निर्दलीय उम्मीदवार था जो दूसरे नंबर पर आया था, उसे सुखबीर बादल के 80 हजार के मुकाबले 30 हजार वोट मिले थे.

रेस में भगवंत मान सबसे आगे

bhagwant maan

मगर इस बार माहौल बदला हुआ है. स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि इस बार सुखबीर बादल कड़े मुकाबले में फंसे हैं. बहुत से मतदाताओं को लग रहा है कि रेस में भगवंत मान सबसे आगे हैं. सुखबीर को लोग दूसरे नंबर पर मान रहे हैं. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर माना जा रहा है. ये पंजाब के पूरे मालवा इलाके का ही ट्रेंड है.

पंजाब के मालवा इलाके में 69 विधानसभा सीटें हैं. ग्रामीण इलाकों में आम आदमी पार्टी की खूब चर्चा हो रही है.

जानकार हों या मतदाता, सबका मानना है कि मालवा इलाके में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहेगा. हालांकि पंजाब के दूसरे हिस्सों माझा और दोआबा में आम आदमी पार्टी रेस में सबसे आगे नहीं है. जलालाबाद, मालवा का हिस्सा है. इसलिए मालवा की बाकी सीटों की तरह यहां भी रुझान आम आदमी पार्टी के हक में है.

जलालाबाद में सबसे बड़ा मुद्दा है कि सुखबीर बादल का क्या होगा? इस सवाल का मतलब ये है कि लोग जानना चाहते हैं कि बादल परिवार का क्या होगा? जब 4 फरवरी को वोट डाले जाएंगे, तो लोगों को तय करना होगा कि क्या वो ये चाहते हैं कि बादल परिवार अगले पांच साल और पंजाब में राज करे? अगर नहीं तो फिर पंजाब में अगली सरकार किसकी होनी चाहिए? आम आदमी पार्टी की, या फिर कांग्रेस की?

जलालाबाद के नतीजे आने वाले सियासी मंजर का संकेत देते हैं. अगर सुखबीर बादल, जलालाबाद सीट हार जाते हैं, तो अकाली दल की ताकत सिमटकर रह जाएगी. और जो भी पार्टी सुखबीर बादल को हराएगी, वही पंजाब का सबसे बड़ी सियासी ताकत बनकर उभरेगी.

भगवंत मान, आम आदमी पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. लोकप्रियता में आजकल उनका मुकाबला कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और सुखबीर बादल से किया से किया जा रहा है.

मान पूरे पंजाब में घूम-घूमकर प्रचार कर रहे हैं. बीच-बीच में वो अपनी सीट जलालाबाद आकर भी चुनावी सभाएं कर रहे हैं. हंसी मजाक और तंज भरे जुमलों से वो सुखबीर बादल पर भ्रष्टाचार के इल्जाम लगाते हैं. वो सुक्खा को पंजाब की ड्रग समस्या के लिए भी जिम्मेदार बताते हैं. मान आरोप लगाते हैं कि सुखबीर ने पंजाब को आसमान से जमीन पर ला पटका है.

सुखबीर बादल इन आरोपों का जवाब पंजाबियत का झंडा बुलंद करके देते हैं. साथ ही वो विकास के दावे भी करते हैं. वो कहते हैं कि पंजाब में बाहरी लोग आना चाहते हैं. कौम की इज्जत का सवाल है. इनको कहो कि भागो, दिल्ली जाओ.

अपनी सीट पर सबसे ज्यादा समय दे रहे बिट्टू

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रवनीत बिट्टू ही जलालाबाद के ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके पास अपनी सीट को देने के लिए पूरा वक्त है. वो स्थानीय समस्याओं की बात करते हैं. विकास की कमी की बात करते हैं.

चुनावी सभाओं में वो कहते हैं कि जलालाबाद के पास पंजाब का खजाना है. लेकिन यहां पीने का पानी भी नहीं बिट्टू कहते हैं कि, 'सुक्खा के पंजाब में, खुद उनकी अपनी सीट सूखी है'. उन्हें लगता है कि वोटर जलालाबाद के सूखे दिनों को बदलने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेंगे.

और जब भगंवत मान मुकाबले में हैं, तो फिर 'ड्राई नाइट्स' की फिक्र किसे है!

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