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देश पूछ रहा है कि रिपब्लिक-डे के अवसर पर सिर्फ झांकियां ही निकलेंगी या फिर झलक भी दिखेगा?

CRPF जवानों पर हुए हमले की चौतरफा निंदा हो रही है. अमेरिका, रुस सहित यूएन ने भी इसकी भर्त्सना की है. देश भर में लोग गुस्से में हैं और हर तरफ से इस आतंकी हमले के खिलाफ आवाज उठ रही है

Updated On: Feb 18, 2019 11:57 AM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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देश पूछ रहा है कि रिपब्लिक-डे के अवसर पर सिर्फ झांकियां ही निकलेंगी या फिर झलक भी दिखेगा?

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले के बाद पूरे देश में बदले की भावना जाग गई है. पिछले 24 घंटे से देश के हर हिस्से से यही आवाज उठ रही है कि अबकी बार पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई की बात न कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी जाए. देश का हर नागरिक और सुरक्षा मामलों के जानकारों का भी मानना है कि अबकी बार इस घटना की निंदा नहीं बल्कि कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

पुलवामा में शहीद हुए सभी 40 जवानों के शव शुक्रवार को दिल्ली पुहंच गए. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने दिल्ली के पालम एअरपोर्ट पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन, गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी.

देश के लोगों का मानना है कि इस हमले के लिए जितना पाकिस्तान जिम्मेदार है उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार चीन भी है. क्योंकि चीन की अड़चनों की वजह से ही जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद को अब तक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं किया जा सका है. पुलवामा हमले के बाद भी भारत ने मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अपील की थी. लेकिन चीन एक बार फिर इसके खिलाफ खड़ी हो गई. चीन ने मसूद अजहर पर बैन लगाने की अपील ठुकरा दी है. पुलवामा आतंकी हमले के बाद भी चीन मसूद और पाकिस्तान के साथ खड़ा है.

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पुलवामा अटैक के बाद एक बार फिर से सभी की निगाहें देश के प्रधानमंत्री पीएम मोदी, एनएसए अजित डोभाल और थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत पर टिक गई हैं. हालांकि, पीएम मोदी ने पहले ही अपना इरादा जताते हुए जाहिर कर दिया है कि इस बार गुनाहगारों को सजा मिल कर रहेगी. पीएम मोदी ने देश को बता दिया है कि सेना को खुली छूट दे दी गई है और आतंकवादियों ने बहुत बड़ी गलती कर दी है, जिसकी कीमत उनको चुकानी ही पड़ेगी.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में अवंतिपुरा के गोरीपुरा इलाके में CRPF के काफिले पर गुरुवार शाम अब तक का सबसे बड़ा आतंकी फियादीन हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए हैं और इतने ही जवानों के घायल होने की भी खबर है. देश में इस तरह का यह पहला वाक्या सामने आया है. इससे पहले पाकिस्तान में ही इस तरह के फियादीन हमले होते थे.

CRPF के 40 जवानों के शहीद होने पर दूसरे देशों ने भी निंदा की है. कुछ देश तो पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कर रहे हैं. जर्मनी, हंगरी, इटली, यूरोपीय संघ, कनाडा, ब्रिटेन, रूस, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया और जापान के प्रतिनिधियों ने विदेश मंत्रालय पहुंचकर भारत सरकार को मदद का भरोसा दिया है. इसके अलावा दक्षिण कोरिया, स्वीडन, स्लोवाकिया, फ्रांस, स्पेन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और भूटान के प्रतिनिधियों ने भी भारत सरकार की हर कार्रवाई को सपोर्ट करने की बात कही है.

सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के चलते कर्फ्यू लगाया गया है. लाउडस्पीकरों पर कर्फ्यू लागू होने की घोषणा होने के बाद भी प्रदर्शनकारी वापस नहीं लौटे.

सांप्रदायिक हिंसा की आशंका के चलते कर्फ्यू लगाया गया है. लाउडस्पीकरों पर कर्फ्यू लागू होने की घोषणा होने के बाद भी प्रदर्शनकारी वापस नहीं लौटे.

पुलवामा अटैक ने देश के कई राज्यों के सपूतों के बच्चों को अनाथ कर दिया है तो कईयों को बिलखता छोड़ दिया है. पुलवामा हमले की दिल दहला देने वाली घटना के बाद फर्स्टपोस्ट हिंदी ने CRPF के कुछ जवानों से फोन पर बात की.

इन जवानों की शहादत के पीछे की वजहों को जानने के लिए हमने पुलवामा में ही तैनात एक सिपाही से बात की. उस सिपाही ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, ‘जब कभी जम्मू-श्रीनगर हाइवे से सेना का काफिला गुजरता है तो रास्ता रोक दिया जाता है, लेकिन CRPF के लिए ऐसा नही है. जब CRPF गुजरती है तो रास्ता खुला रहता है. लगभग 2500 जवानों के एक साथ मूवमेंट के लिए दिल्ली हेडक्वार्टर ने इजाजत दी थी. CRPF का इंटेलिजेंस विभाग इस घटना में साफ फेल्योर साबित हुआ है.’

शुक्रवार की सुबह पूरे देश के लिए भारी रहा. बीती रात देश के करोड़ों आंखों को नींद नहीं आई. गुरुवार की मनहूस दोपहर CRPF के काफिले पर बीते चंद सालों का सबसे बड़ा आतंकी हमला था. देश का हर नागरिक गुस्से में है और हर हिंदुस्तानी का खून खौल रहा है. पूरा देश शहीदों के साथ है और देश का हर नागरिक एक ही बात कह रहा है कि अब बहुत हो गया.

पुलवामा में शहीद होने वाले बेटों के माता पिता का रो-रो कर बुरा हाल है. किसी की पत्नी बेहोश हो रही हैं, तो किसी का बुजुर्ग पिता सदमे में चला गया है. किसी शहीद का भाई कह रहा है कि मेरा भाई चला गया तो क्या, मैं तो जिंदा हूं. मैं भी बारूद लेकर जाने के लिए तैयार हूं. देश उस परिवार और उस पिता पर गर्व कर रहा है, जिसने ऐसे वीर सपूत को पैदा किया.

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CRPF काफिले पर कायराना हमले के बाद देश में शहीद सभी जवानों को देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धांजलि दी जा रही है. लेकिन, कुछ परिजनों ने फर्स्टपोस्ट के साथ बातचीत में अपनी नाराजगी भी जाहिर की. उन लोगों का कहना है कि शहीद होने पर अर्धसैनिक बल के जवानों को शहीद तो कहा जाता है, लेकिन शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता. सरकार को चाहिए कि शहीद बेटों में कोई फर्क नहीं किया जाए और देश के लिए शहादत देने वाले हर जवान को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए.

कुछ पूर्व सैनिकों का भी मानना है कि देश के अर्धसैनिक बल भी सैनिकों की तरह ही जी-जान से देश की रक्षा करते हैं. कश्मीर से लेकर उत्तर-पूर्वी और नक्सल प्रभावित राज्यों और देश के बंदरगाह-एयरपोर्ट और दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों पर अर्धसैनिक बल सेना की तरह कंधे से कंधा मिलाकर अपना कर्तव्य निभाते हैं. ऐसे में इन लोगों को भी शहीद का दर्जा मिलना चाहिए.

बता दें कि देश के लिए बिलदान देने वाले अर्धसैनिक बलों जैसे CRPF, BSF, CISF, ITBP, RAF, COBRA और NSG के जवानों को शहादत के बाद भी सेना की तर्ज पर शहीद का दर्जा और उनकी वीरांगनाओं और परिवार को शहीद परिवार वाली सभी सुविधाएं नहीं दी जाती हैं.

हालांकि, इस घटना के बाद पीएम मोदी ने बीजेपी शासित राज्यों के सीएम और सभी सांसदों से शहीदों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी शुक्रवार शाम पालम एयरपोर्ट पहुंच कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी है. ऐसे में शायद इन परिवारों की मांगों को आगे सरकार अब मान ले.

Tribute to CRPF jawans

पुलवामा हमले के बाद देश के कई रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों ने अपना गुस्सा जाहिर किया है. इन लोगों का कहना है कि पाकिस्तान को अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व मेजर जनरल जीडी बख्शी फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘अब पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. मोदी सरकार को एक नहीं बल्कि 10 सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए. भारत को अब पाकिस्तान से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखना चाहिए. महबूबा मुफ्ती की सरकार ने जो चेकपोस्ट की जांच खत्म करवा दी थी उस फैसले को रद्द कर दिया जाना चाहिए. अब सभी चेकपोस्ट पर फिर से गाड़ियों की जांच के बाद ही कोई गाड़ी को हाईवे पर जाने दिया जाए. पाकिस्तान एक तरफ तो बातचीत की बात करता है तो और दूसरी तरफ पीछे से पलटवार करता है. उरी हमला के बाद जिस तरह से भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था वैसा ही 10 सर्जिकल स्ट्राइक की अब जरूरत आ गई है. हम सिर्फ एक सर्जिकल स्ट्राइक से शांत हो गए हमें इजराइल जैसा रुख अख्तियार करना चाहिए.’

जनरल बख्शी आगे कहते हैं, ‘भारतीय जवानों का खून इतना सस्ता है? अब समय आ गया है कि हम दुश्मन की खोपड़ी, दुश्मन के घर में जा कर तोड़ें. अब सेना को पलटवार करना ही होगा. आखिर गोला-बारूद से भरी कार कैसे हाईवे पर पहुंची? इस गाड़ी की चेकिंग क्यों नहीं की गई? क्या महबूबा मुफ्ती अब जवाब देंगी? सेना द्वारा मारे गए आतंकियों के घर महबूबा क्यों पहुंच जाती हैं? अब इसका भी जवाब मांगा जाएगा. जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार की विस्फोटक से भरी कार क्यों नहीं चेक हुई? हम रिपब्लिक-डे के अवसर पर सिर्फ झांकियां हीं निकालते रहेंगे?’

कुल मिलाकर इस बार CRPF जवानों पर हुए हमले की चौतरफा निंदा हो रही है. अमेरिका, रुस सहित यूएन ने भी इसकी भर्त्सना की है. देश भर में लोग गुस्से में हैं और हर तरफ से इस आतंकी हमले के खिलाफ आवाज उठ रही है. पीएम मोदी ने लोगों से शांति और आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने की बात की तो, वहीं विपक्ष सरकार के साथ इस घटना में साथ खड़ी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि 'वो सरकार के हर फैसले पर साथ हैं.'

अब देखना यह है कि इस 40 जवानों की शहादत का बदला भारतीय सेना कितना जल्दी लेगी?

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