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पीएम साहेब स्मार्ट हैं, हमारे पास फोन भी नहीं

जनता परेशान तो हो रही है लेकिन अपनी नाराजगी जाहिर नहीं कर पा रही है.

Updated On: Nov 24, 2016 07:16 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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पीएम साहेब स्मार्ट हैं, हमारे पास फोन भी नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात जब 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया तो ऐसा माहौल बना जैसे रातोंरात देश से ब्लैकमनी का संकट खत्म हो जाएगा. पूरा देश दोनों हाथों से अपनी कमाई लेकर बैंक की लाइन में लग गया.

प्रधानमंत्री के इस फैसले का सबसे बुरा असर आम आदमी पर पड़ा. जनता परेशान तो हो रही है लेकिन अपनी नाराजगी जाहिर नहीं कर पा रही है. देश पर कुछ कर गुजरने का जुनून कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है.

पिटी हुई जनता

देश की जनता का हाल बच्चों की उस टोली की तरह हो गया है, जिसे दूसरे मुहल्लों के बच्चों ने धुन दिया हो. और धूल झाड़कर बच्चे इस अंदाज में एक दूसरे को देखते हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो.

Money अपना ही पैसा निकालने का ईनाम
(SOLARIS IMAGES)

अंदरूनी दर्द और बेइज्जती का दुख सबके मन में है, लेकिन एक दूसरे से कोई जाहिर नहीं कर रहा है. सबको यह डर है कि अगर वो इस बारे में सबसे पहले बोलते हैं तो दोस्तों के बीच उनकी ही कमजोरी सामने आएगी. बच्चों की यह टोली कमजोर है तो वे विपक्षी टोली का कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते. लिहाजा अपना दर्द मन में समेटे हुए वो घर लौट आते हैं.

ठीक यही हाल नोट बंदी से परेशान जनता की है. परेशान सब हैं, लेकिन खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं है. पहले कमाने की मुश्किल और फिर उसे बैंक या एटीएम से निकालने की मुश्किल...समस्याएं खत्म ही नहीं होती.

विपक्ष के लिए जश्न का मौका

आम जनता की परेशानी विपक्ष के लिए जश्न का मौका होता है. विपक्ष को अपनी अहमियत साबित करने का शानदार मौका फिर मिला है.

Mamta Banerjee ममता बनर्जी और शरद यादव
(SOLARIS IMAGES)

कांग्रेस के राहुल गांधी, टीएमसी की ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल सरकार के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर आए.

विपक्ष के बढ़ते विरोध के बाद प्रधानमंत्री जी भी भला कहां पीछे रहते. उन्होंने मंगलवार 22 नवंबर को तड़ातड़ 'नरेंद्र मोदी ऐप' लॉन्च कर दिया.

इस ऐप में उन्होंने देश की जनता से 10 सवाल पूछे थे, जिनके जवाब के आधार पर यह सर्वे हुआ कि आम जनता सरकार के इस फैसले के साथ है या नहीं.

जिस भरोसे के साथ प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ऐप लॉन्च किया, वह भरोसा खाली नहीं गया. सर्वे में 90 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी के फैसले के पक्ष में है. यानी देश की 90 फीसदी जनता को लगता है कि मोदी जी ने सही फैसला लिया है और इस परेशानी में अगर उन्हें कुछ समस्या उठानी पड़ रही है तो यह राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है.

प्रधानमंत्री मोदी की वेबसाइट के मुताबिक नरेंद्र मोदी ऐप के 5 लाख यूजर्स में से 93 फीसदी लोगों ने नोट बंदी को सपोर्ट किया.

कैसे पूरा होगा डिजिटल इंडिया का सपना

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लेकिन दिलचस्प है कि डिजिटल इंडिया का सपना देखने वाले मोदी जी इस बार भी ग्रामीण जनता को भूल गए. वो ये भूल गए कि 'नरेंद्र मोदी ऐप' सिर्फ वे लोग ही डाउनलोड करके प्रधानमंत्री के 10 सवालों का जवाब दे सकते हैं जिनके पास स्मार्टफोन होगा.

प्रधानमंत्री जी ने देश की जनता के साथ ऐसा मजाक किया है, जिस पर अकेले वो ही हंस सकते हैं. एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट 2016 के मुताबिक देशभर में स्मार्टफोन की पैठ 2018 तक 36 फीसदी रहेगी.

इस साल की शुरुआत में द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया में टोटल स्मार्टफोन यूजर्स 22 करोड़ हैं. ये आंकड़े सरकार को उत्साहित कर सकते हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. देश में करीब 1.25 अरब आबादी है और 22 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन है. लेकिन प्रधानमंत्री जी ने कुछ समर्थकों और भक्तों पर ही सर्वे करके खुद को 90 फीसदी नंबर दे दिए.

दिल का हाल सुने ना कोई

प्रधानमंत्री ने जब नरेंद्र मोदी ऐप लॉन्च किया तो लोगों को लगा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. अब लोगों को क्या पता कि सिर्फ 5 लाख लोगों का जवाब सुनकर ही प्रधानमंत्री ने खुद को विजेता घोषित कर दिया है. अब जनता यह सोच रही है कि अगर प्रधानमंत्री जी का फैसला देश के हर शख्स पर लागू होता है तो फिर उन्हें सर्वे का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया. लेकिन भोलीभाली जनता को कौन बताए, प्रधानमंत्री जी स्मार्ट हैं और आपके पास स्मार्टफोन भी नहीं है.

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