Co Sponsor
In association with
In association with
S M L

क्या सच में राहुल गांधी का इतना विरोध होता है या सबकुछ प्रायोजित है?

पार्टी में नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी के हर दौरे पर दिखने वाला विरोध कई बार स्वत:स्फूर्त नहीं होता

Syed Mojiz Imam Updated On: Jan 17, 2018 08:27 AM IST

0
क्या सच में राहुल गांधी का इतना विरोध होता है या सबकुछ प्रायोजित है?

राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र की यात्रा पर है. राहुल गांधी को कई जगह विरोध का सामना करना पड़ा है. सोमवार को सलोन और मंगलवार को जामों में विरोध का सामना हुआ है. जामों में राहुल गांधी थोड़ी देर पैदल भी चले और लोगों से मुलाकात की है. ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले इस तरह के विरोध का सामना कांग्रेस के नेता को नहीं करना पड़ा था.

हालांकि राहुल गांधी 2004 से ही अमेठी के सांसद है. राहुल गांधी की तरफ से कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई थी, लेकिन यूपीए-2 जाने के बाद सब लटकी हुई है. राहुल गांधी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि राज्य सरकारें अमेठी को लेकर भेदभाव बरत रही हैं. हालांकि राहुल गांधी ने आश्वासन दिया है कि अमेठी की रुकी सारी परियोजना दोबारा बहाल हो जाएगी. लेकिन जब कांग्रेस की सरकार आएगी.

जाहिर है कि कांग्रेस की सरकार न केंद्र में है न ही प्रदेश में. कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह का दावा है कि लखनऊ से लेकर जहां-जहां राहुल गांधी जा रहे है वहां उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है. विरोध सिर्फ बीजेपी प्रायोजित है. इसमें जनता की कोई भागीदारी नहीं है. लेकिन सवाल जरूर है कि क्या अमेठी में राहुल गांधी के विरोधी बढ़ रहे है जो सड़कों पर दिखाई दे रहा है?

कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह जो इस वक्त विवाद का केंद्र हैं ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से जनता में उत्साह है. जनता को पता है कि विकास का काम इसलिए रुक गया है कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार नहीं है. दीपक सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशासन और बीजेपी की मिलीभगत से विरोध कराया जा रहा है.

विरोध के पीछे की क्या है राजनीति

rahul gandhi 1

तस्वीर राहुल गांधी की फेसबुक वॉल से साभार

दरअसल विवाद की वजह है कि जब से केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी ने अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा है. तब से राहुल गांधी का विरोध मुखर हो रहा है. बीजेपी के स्थानीय नेताओ मे ताकत भी दिखाई दे रही है. लेकिन कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि बीजेपी के कुछ नेता केंद्रीय मंत्री की नजर में चढ़ने के लिए विरोध कर रहे हैं.

सलोन में राहुल गांधी का विरोध कर रहे दल बहादुर कोरी पूर्व में बीएसपी सरकार में मंत्री रहे हैं. कांग्रेस के लोगों ने आरोप लगाया है कि मंत्री बनने के लिए दल बहादुर कोरी ये सब कर रहे है. रायबरेली में पत्रकार शैलेंद्र सिंह का कहना है कि जिस तरह का विरोध बताया जा रहा है उस तरह का विरोध जमीन पर नहीं है. बल्कि बीजेपी के नेता गलत परंपरा कायम कर रहे है. इस तरह कांग्रेस के लोग भी बीजेपी के नेताओ के विरोध की शुरुआत कर सकते हैं.

कांग्रेस कैसे देगी जवाब

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के इस तरह के विरोध से परेशान हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता भी इस विरोध का जवाब देने की रणनीति बना रहे हैं. कांग्रेस के अमेठी रायबरेली में विधायक भले ही तादाद में ना हो लेकिन गांधी परिवार से जुड़ाव है. कांग्रेस के नेता इस वजह से अमेठी जाने वाले बीजेपी के बड़े नेताओं का विरोध कर सकते हैं. कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि इसका जवाब दिया जाएगा और कोई भी वर्कर मुकदमा लिखे जाने से नहीं डरता.

जाहिर है कि कांग्रेस को लग रहा है कि राहुल का विरोध पार्टी के लिए गलत मैसेज का काम कर सकता है. खासकर कर्नाटक जहां चुनाव होने वाले हैं. क्योंकि बीजेपी ये मैसेज देने में कामयाब हो सकती है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में जब कोई काम नहीं किया तो आगे क्या उम्मीद है ! इसलिए राहुल गांधी बार-बार लोगों से कहते रहे कि आगे भी अमेठी के विकास का काम होता रहेगा, लेकिन कैसे ये नहीं बताया है.

अमेठी-रायबरेली में नहीं टूटी परंपरा

अमेठी-रायबरेली में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को ही साथ चलने की इजाजत है. सोनिया गांधी के वक्त से कांग्रेस के बाहरी नेताओं को गांधी परिवार के साथ चलने की मनाही है. इस बार भी कांग्रेस के अध्यक्ष का स्वागत लखनऊ में बड़े नेताओं ने किया. उनके साथ राज बब्बर प्रमोद तिवारी और जितिन प्रसाद लखनऊ से चले थे, लेकिन सरहद से वापस लौट गए.

इसके पीछे वजह है कि अमेठी रायबरेली का काम सीधे राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी मॉनिटर करती हैं. किसी कांग्रेस के नेता का हस्तक्षेप नहीं है. प्रियंका गांधी की सहायता कांग्रेस के सचिव किशोरी लाल शर्मा करते है. जो सोनिया गांधी का काम रायबरेली में काफी दिन से देख रहे है. अमेठी रायबरेली के लोगो के लिए पहले सतीश शर्मा के बंगले से काम होता था. अब महादेव रोड पर ऑफिस बना है. जहां से क्षेत्र का काम होता है.

क्या है अमेठी की चुनावी बिसात

rahul gandhi 2

कांग्रेस के लिए अमेठी परिवारिक सीट है. लेकिन 2014 के चुनाव में वर्तमान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के चुनाव लड़ने से राहुल गांधी के जीत का मार्जिन पहले के मुकाबले काफी कम हो गया था. 2014 के चुनाव में राहुल गांधी एक लाख वोट से यहां से जीते. लेकिन इससे पहले 2009 में तीन लाख सत्तर हजार वोट से चुनाव जीते थे.2004 में ये मार्जिन दो लाख नब्बे हजार था. अमेठी में 2014 में चुनाव जीतने के लिए बिसात प्रियंका गांधी ने बिछाई थी.

लोकल लेवल पर विरोध कम करने के लिए अमेठी के पूर्व राजा संजय सिंह को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा. स्थानीय नेताओं को बुलाकर कई बार बात की और प्रियंका गांधी ने पूरे चुनाव में कैंप किया ताकि राहुल गांधी की जीत सुनिश्चित की जा सके. चुनाव कांग्रेस ने जीता लेकिन बीजेपी ने अमेठी को तरजीह दी. चुनाव हारने के बाद स्मृति इरानी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. स्मृति ईरानी लगातार अमेठी का दौरा का भी कर रही है. जिससे कांग्रेस परेशान भी है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
AUTO EXPO 2018: MARUTI SUZUKI की नई SWIFT का इंतजार हुआ खत्म

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi