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चुनाव लड़ने के लिए बकाया भुगतान अनिवार्य करने का प्रस्ताव नामंजूर

उम्मीदवार का नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देने वाली ऑथोरिटी पक्षपातपूर्ण हो सकती है और ऐसा भी हो सकता है कि वे उसे जरूरी दस्तावेज ना दे

Bhasha Updated On: Oct 08, 2017 03:52 PM IST

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चुनाव लड़ने के लिए बकाया भुगतान अनिवार्य करने का प्रस्ताव नामंजूर

सरकार ने सरकारी घर के किराए, बिजली के बिल जैसे बकाए का भुगतान ना करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने के चुनाव आयोग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर उन लोगों के लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की अपील की जो सार्वजनिक सुविधाओं के बकाए का पूरा भुगतान नहीं करते.

चुनाव आयोग के अनुसार इस तरह के उम्मीदवारों पर रोक लगाने के लिए रीप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के चैप्टर-3 में संशोधन करना होगा जो चुनाव अपराधों से संबंधित है. ‘सार्वजनिक सेवाओं के बकाए के भुगतान में चूक के आधार पर’ अयोग्यता के लिए एक नया सेक्शन जोड़ना होगा.

नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देने वाली ऑथोरिटी पक्षपातपूर्ण हो सकती है

लेकिन एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक मई में चुनाव आयोग को भेजे जवाब में मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव ‘की जरूरत नहीं है.’ उन्होंने कहा कि कानून मंत्रालय को लगता है कि रोक की जरूरत नहीं होगी क्योंकि किसी उम्मीदवार का नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देने वाली ऑथोरिटी पक्षपातपूर्ण हो सकती है और ऐसा भी हो सकता है कि वे उसे जरूरी दस्तावेज ना दे.

मंत्रालय को यह भी लगता है कि बकाए के विवाद से संबंधित मामलों में मामला अदालत में ले जाया जा सकता है और उसके सुलझने में वक्त लग सकता है. इस तरह के मामलों में नो-ड्यूज सर्टिफिकेट वाले उम्मीदवार को नामंजूर करने की जरूरत नहीं होगी.

चुनाव आयोग के चुनाव कानून में बदलाव की मांग से संबंधित कदम जुलाई, 2015 को आए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का नतीजा है जिसमें चुनाव आयोग से बकाए का जल्द भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर किसी तरह का अवरोध लगाने की संभावना पर विचार करने को कहा गया था.

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