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'जीडीपी का 62 फीसदी ब्लैक, कैश सिर्फ 1 फीसदी'

जीडीपी का 62 पर्सेंट ब्लैक इनकम है, जबकि कैश में इसका एक पर्सेंट मात्र है

Updated On: Nov 23, 2016 02:12 PM IST

FP Staff

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'जीडीपी का 62 फीसदी ब्लैक, कैश सिर्फ 1 फीसदी'

कालेधन पर अभी भी ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब तलाशे जा रहे हैं. हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार के साथ फेसबुक Live में ऐसे तमाम मुद्दों को जानने समझने की कोशिश की जो किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं.

प्रोफेसर अरुण कुमार ने पिछले 35 सालों से भी ज्यादा वक्त से काले धन पर रिसर्च किया है. प्रोफेसर अरुण कुमार ने शीर्षक 'ब्लैक इकॉनमी इन इंडिया' नाम से किताब भी लिखी है-

ये रहस्यमयी चीज काला धन क्या है? यह भारतीय अर्थव्यवस्था में कितनी मात्रा में मौजूद है?

किसी भी ऐक्टिविटी में किया गया कोई भी अवैध काम जो इनकम में कनवर्ट किया गया है, काला धन है. किसी ने ब्लैक इनकम जैनरेट तो की है लेकिन टैक्स के लिए उसे डिक्लेयर नहीं किया है. उसने ब्लैक इनकम बनाया है और उसमें से सेविंग नहीं की है. वो सेविंग वेल्थ यानी संपत्ति के रूप में बढ़ती है. उसे रियल एस्टेट में, शेयर्स में, जूलरी खरीदने में लगाया जाता है.

उसकी एक छोटी मात्रा ही कैश है, ये पूरा धन ब्लैक मनी का 1 पर्सेंट है. मेरे अनुमान के हिसाब से इसकी संख्या 2 या 3 लाख करोड़ कैश है.

जीडीपी का 62 पर्सेंट हर साल ब्लैक इनकम के रूप मे जैनरेट होता है. भारत की जीडीपी 150 लाख करोड़ है, जिसमें से 93 लाख करोड़ रुपए ब्लैक है. और इसमें से सिर्फ 2 से 3 लाख करोड़ ही कैश है.

बाकी ब्लैक इनकम क्या है?

पूरे ब्लैक इनकम से से काफी कंज्यूम किया जाता है. जैसे वाइट मनी के साथ होता है, वैसा ही सिस्टम इसके साथ है. ब्लैक मनी का 30 फीसदी सेविंग हो जाता है. 30 लाख करोड़ सेविंग में जाता है. ये 30 लाख करोड़ हो सकता है और 30 लाख करोड़ में से कुछ ही हिस्सा कैश होता है.

बाकी रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट, बिजनेस में इस्तेमाल कर लिया जाता है. इसी ब्लैक मनी का इस्तेमाल नार्कोटिक्स ड्रग में, गलत तरीके से बनाई जा रही मेडिसिन में किया जाता है. बड़े-बड़े कॉलेजों, यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए इसी से मोटा पैसा चुकाया जाता है. माइनिंग में इसका इस्तेमाल होता है. कई तरीके हैं ब्लैक मनी को होल्ड करने के.

इस विषय में आपकी रुचि कैसी आई? और कैसे आपने रिसर्च करना शुरू किया? मैं प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहा था. 1976 में मैं उसे छोड़कर भारत आया. यहां आया तो देखा कि मेरे माता-पिता उम्र का लंबा पड़ाव पार करने के बाद भी जमीन या प्रॉपर्टी नहीं खरीद सके हैं.

मेरे मन में विचार आया कि मुझे उनकी मदद करनी चाहिए. मैंने जब कोशिश की तो पाया कि रियल एस्टेट में ढेर सारे पैसे बनाए जा सकते हैं. मैंने मॉडल बनाया कि कैसे रियल एस्टेट में स्पेक्यलेट किया जा सकता है और पैसा बनाया जा सकता है.

मुझे फिर पता चला कि इसमें ढेर सारा ब्लैक मनी जेनरेट हो रहा है. ब्रोकर्स को कमीशन से ब्लैक को वाइट किया जाता है. मेरा ब्लैक वाइट बन रहा है, और किसी का वाइट ब्लैक बन रहा है. पहली बात थी कि कोई था जो टैक्स नहीं दे रहा था और दूसरा बिल्डर्स और ब्रोकर्स क्रिमिनल कामों में थे. मुझे ये असामाजिक लगा.

1980 के बाद मैंने इसे छोड़ दिया. ब्लैक इकॉनमी देश की एकमात्र बड़ी समस्या है. यह चुनाव में, समाजिक रूप से, डॉक्टर-वकीलों से, हर पेशे से जुड़ी है.

वकील 2 लाख चार्ज कर 20 हजार की फीस दिखा रहा है, डॉक्टर 1 हजार फीस लेकर 100 रुपए दिखा रहा है. इससे समाज का हर वर्ग पीड़ित है. हर बिजनेस को यह प्रभावित करता है. इसके बाद मैंने इसपर रिसर्च शुरू की. मेरा पहला रिसर्च पेपर फाइनेंशियल एक्सप्रेस में बॉन्ड स्कीम पर आया.

सरकार ने नोटबंदी पर फैसला लिया है, आपका विचार क्या है? सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया है. समझिए कि अगर वह 3 लाख करोड़ रुपए डिमॉनटाइज करने में सफल रहती है तो भी यह सिर्फ 1 फीसदी टोटल ब्लैक वेल्थ का और 3 फीसदी से भी कम टोटल ब्लैक इनकम का हिस्सा होगा जो एक साल में जेनरेट होती है. कैश फॉल क्या है?

जब आप कैश निकालते हैं, कैश बिजनेस में सर्कुलेट होता है, वर्क फ्रॉम होम में, ट्रेड में हर जगह इस्तेमाल होता है. कैश किसी इकॉनमी के खून की तरह है. अगर आप उसे ही सकआउट कर देंगे. मानिए कि किसी के शरीर से 85 फीसदी खून आप निकाल लें और 5 फीसदी को ही रिप्लेस करें तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

संभावना है कि अर्थव्यवस्था ही इससे धराशायी हो जाए. जब आप करेंसी को रिप्लेस कर रहे हैं तो इसमें 8-9 महीने की अवधि लगने वाली है और इस दौरान आपने ट्रांजेक्शन को मुश्किल कर दिया है. आप इनकम के सर्कुलेशन को मुश्किल कर रहे हैं. इंडस्ट्री, बिजनेस में हर जगह. यह इकॉनमी में हैमरेज पैदा कर रहा है और यही वजह है कि सिर्फ ब्लैक ही नहीं बल्कि वाइट मनी भी प्रभावित हो रही है.

नोटबंदी को लागू करने में क्या गलती रह गई? इसके मेरिट और डिमेरिट किया हैं? पॉइंट ये है कि यह एक सख्त फैसला है, इसमें कोई संदेह नहीं है. 1978 में भी ऐसा कदम उठाया गया था लेकिन उस वक्त बंद किए गए 5 हजार और 10 हजार के नोट किसी ने देखे भी नहीं थे. मेरी जेब में ढाई सौ रुपए बमुश्किल हुआ करते थे. मैंने 5 हजार और 10 हजार के नोट कभी नहीं देखे थे.

लेकिन आज 500 और 1 हजार रुपए के नोट हर किसी के पास हैं, गरीबों को छोड़कर. 500 और 1 हजार रुपए को जब आप निकाल रहे हैं तो आप सिर्फ ब्लैक इनकम को ही नहीं बल्कि पूरे बिजनस को प्रभावित कर रहे हैं. जो ब्लैक इकॉनमी जेनरेट नहीं कर रहे हैं वो भी प्रभावित हो रहे हैं. ये इसका एक नेगेटिव पहलू है.

पॉजिटिव पहलू ये है कि टेंपररी पीरियड के लिए आपके ब्लैक मनी को अलग कर दिया है. 3 लाख करोड़ कैश है, लेकिन चालाक लोग इसे आसानी से रिसाइकल कर लेंगे. एक बिजनेसमैन ने कहा कि उसके पास 20 करोड़ रुपए कैश हैं और उसने वर्कर्स को 4 महीने की सैलरी अडवांस में दे डाली.

ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि जन धन योजना में, मालिक मजदूरों का इस्तेमाल कर ब्लैक मनी को वाइट कर रहे हैं. ज्वैलरी खरीदकर बैक डेट की रिसिप्ट दी जा रही है. यह खेल छोटा और अनिश्चित है लेकिन इससे होने वाला नुकसान बहुत बड़ा.

(साभार: http://hindi.news18.com/news/karobar/prof-arun-kumars-facebook-live-on-black-money-issue-529502.html)

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