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'प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से कांग्रेस को Fund जुटाने में होगी आसानी'

प्रतिष्ठित अमेरिकी मैगजीन Carnegie Endowment For International Peace ने ‘फॉरेन पॉलिसी’ में अपने ताजा लेख में कहा, 'कांग्रेस पार्टी की नई प्रचारक भले ही वास्तव में चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन वो ऐसे देश में पार्टी के फंड कलेक्शन संबंधी अंतर को कम कर सकती हैं जहां चुनाव जीतने के लिए बहुत धन की जरूरत होती है'

Updated On: Feb 12, 2019 11:50 AM IST

FP Staff

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'प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से कांग्रेस को Fund जुटाने में होगी आसानी'

अमेरिका की एक प्रभावशाली मैगजीन ने कहा है कि प्रियंका गांधी के कांग्रेस महासचिव बनने से पार्टी के चुनावी भविष्य पर पड़ने वाला प्रभाव भले ही स्पष्ट नहीं है. लेकिन इससे सत्ताधारी बीजेपी की तुलना में पार्टी को फंड जुटाने में मदद मिलेगी.

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मिलन वैष्णव ने प्रतिष्ठित ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका में लिखे अपने ताजा लेख में कहा, 'कांग्रेस पार्टी की नई प्रचारक भले ही वास्तव में चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन वो ऐसे देश में पार्टी के वित्त पोषण (फंड कलेक्शन) संबंधी अंतर को कम कर सकती हैं जहां चुनाव जीतने के लिए बहुत धन की जरूरत होती है.'

वैष्णव ने कहा कि प्रियंका के राजनीति में औपचारिक प्रवेश से पार्टी में जोश आया है जिसकी उसे बहुत जरूरत थी. उन्होंने कहा, 'खबरों के अनुसार धन की कमी के कारण पार्टी आलाकमान से कांग्रेस की राज्य इकाइयों को फंड नहीं मिल पा रहा है.'

‘कॉस्ट्स ऑफ डेमोक्रेसी: पॉलिटिकल फाइनेंस इन इंडिया’ पुस्तक के सह लेखक वैष्णव ने कहा, ‘प्रियंका गांधी ने ऐसे समय में सक्रिय राजनीति में कदम रखा है जब कांग्रेस को हर संभव मदद की जरूरत है. पार्टी को 2014 में हुए आम चुनावों के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद कुछ जगह जीत मिली है. प्रियंका के आने से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा हुआ है, जिसकी उन्हें बहुत जरूरत है.’

राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया

राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया

प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस का मनोबल बढ़ेगा और फंड जुटाने में मदद मिलेगी

उन्होंने लिखा कि ‘पिछले महीने (जनवरी) कांग्रेस को चुनावी रूप से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन (SP-BSP) से बाहर रखा गया था. पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के पार्टी की प्रचार मुहिम का नेतृत्व करने से पार्टी विपक्षी ताकतों से भी लाभ ले सकती है. इसी क्षेत्र में प्रियंका गांधी की मां सोनिया गांधी, भाई राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीटें हैं.’

उन्होंने कहा, ‘प्रियंका की भूमिका केवल सहयोगियों को साथ लाने और मनोबल बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इससे कांग्रेस को धन जुटाने में भी मदद मिलेगी. पार्टी धन की कमी से जूझ रही है.’ वैष्णव ने कहा कि प्रियंका के आने से सोशल मीडिया पर बीजेपी के प्रभुत्व (Dominance) को भी चुनौती मिलेगी. ट्विटर पर प्रियंका के आने के 24 घंटे के भीतर ही उनके डेढ़ लाख से ज्यादा फॉलोवर हो गए हैं.

बता दें कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीते 23 जनवरी को अपनी बहन प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव बनाने की घोषणा की थी. साथ ही उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी का प्रभारी भी नियुक्त किया था. प्रियंका फरवरी में जब अपने विदेश यात्रा से भारत लौटीं थी तो उन्होंने कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में कदम रखा था.

(भाषा से इनपुट)

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