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प्रियंका की एंट्री ने मंडल के दौर से सियासी सूनापन झेल रहे कांग्रेस मुख्यालय को भी गुलजार कर दिया

गए सात दशक में एक लंबा दौर ऐसा रहा जब यूपी कांग्रेस का यह मुख्यालय नेहरू भवन न सिर्फ यूपी बल्कि दिल्ली की सत्ता की गतिविधियों का अहम केंद्र रहा.

Updated On: Jan 24, 2019 08:17 PM IST

Ranjib

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प्रियंका की एंट्री ने मंडल के दौर से सियासी सूनापन झेल रहे कांग्रेस मुख्यालय को भी गुलजार कर दिया

कड़क कलफ लगे कुर्तों से लकदक नेताओं की भरमार, बैठने के लिए कम पड़ती कुर्सियां, हाल ही में झक सफेद रंग से पुते विशाल कार्यालय भवन की ताजगी और अहाते में चारों ओर लगे अशोक के पेड़ों की छंटाई किए जाने से परिसर को खूब मिल रही खिली धूप के माहौल में लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में हर दूसरे मिनट 'प्रियंका गांधी जिंदाबाद' और 'प्रियंका नहीं यह आंधी हैं, दूसरी इंदिरा गांधी हैं' के नारे गूंजते रहे.

प्रियंका की कांग्रेस में एंट्री और उन्हें पूर्वी यूपी का प्रभारी महासचिव बनाने की घोषणा के चौबीस घंटे में इस बदले हुए से माहौल का लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इस घटनाक्रम ने पार्टी को चुनाव से पहले उत्साह से लबरेज जरूर कर दिया है.

गए सात दशक में एक लंबा दौर ऐसा रहा जब यूपी कांग्रेस का यह मुख्यालय नेहरू भवन न सिर्फ यूपी बल्कि दिल्ली की सत्ता की गतिविधियों का अहम केंद्र रहा. मंडल-कमंडल की सियासत में कांग्रेस के हाशिए पर गई तो इस दो मंजिला दफ्तर की रौनक भी जाती रही. यह शायद संयोग हो या पार्टी आला-कमान के विशेष निर्देश का असर कि गए दो महीनों से इस भवन और लंबे-चौड़े अहाते में नयापन लाने के काम में भारी तेजी है.

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भवन की दीवारों और दरवाजों-खिड़कियों पर ताजा पुता पेंट माहौल में ताजगी भर रहा है तो लंबे-चौड़े अहाते के चारों ओर लगे अशोक के पेड़ों की छंटाई कर सुनिश्चित किया गया है कि परिसर में हर ओर खिली धूप फैले. परिसर के एक हिस्से में निर्माणाधीन लंबे-चौड़े मीडिया सेंटर का काम अगले एक पखवाड़े में खत्म करने को कहा गया है. इसका उद्घाटन राहुल गांधी और प्रियंका के हाथों करवाने और यहां पहली प्रेस कांफ्रेंस भी उनकी ही होने के कयास लग रहे हैं. प्रियंका की एंट्री की घोषणा होते ही आस-पास के जिलों से कांग्रेसी नेताओं की गाड़ियों ने अगली सुबह ही लखनऊ का रुख कर लिया था.

जिलों के नेताओं की इन दर्जनों एसयूवी से प्रदेश मुख्यालय का परिसर ठसाठस भर गया तो कई गाड़ियों को बाहर सड़क पर पार्क करवाया गया. मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी और प्रियंका की तस्वीरों वाले बैनरों व होर्डिगों की भरमार और चाय-पान के खोमचों पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ से माहौल गुलजार हो रहा है.

क्या नए पन का लुक देने का यह प्रयास प्रियंका गांधी की एंट्री से जुड़ा है? इस सवाल के जवाब में दो दशक से भी ज्यादा समय से कांग्रेस से जुड़े पार्टी के मीडिया विभाग के वरिष्ठ नेता अमरनाथ अग्रवाल बोले, 'आप माहौल देख लीजिए. हर ओर ताजगी और बेहतरी का अहसास दिख रहा है .'

प्रियंका की एंट्री ने यूपी कांग्रेस को उम्मीदों से तो जरूर भर दिया है. पार्टी मुख्यालय में हर ओर हलचल और तेजी का माहौल इसकी बानगी कह रहा है. मुख्य भवन की दूसरी मंजिल पर प्रियंका गांधी के बैठने के लिए कक्ष तेजी से तैयार किया जा रहा है. निर्देश है कि फरवरी के पहले सप्ताह में काम हो जाना चाहिए. परिसर में खुले में रखी दर्जनों कुर्सियों पर नेता और कार्यकर्ता बैठकर सियासी बतकही में मशगूल थे. इसमें एक समूह में बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी कई नेताओं के साथ बैठे थे.

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सबका अपना-अपना आंकलन जारी था. सूरज और चढ़कर भवन के पीछे चला गया तो कुर्सियों के इस समूह पर धूप आनी बंद हो गई. कुछ नेताओं ने अपनी कुर्सी को आगे-पीछे किया तो नसीमुद्दीन बोले- अरे जिधर पूरी धूप है उधर चलकर बैठते हैं न, अब कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करना है. धूप की लुकाछिपी से निपटने के लिए कहे गए संवाद में छिपे सियासी निहितार्थ से बाकियों के चेहरे खिल उठे. अपनी-अपनी कुर्सी उठाए नेताओं का समूह धूप की ओर चल दिया. कांग्रेसी अब कॉम्प्रोजाइज करने को तैयार नहीं इसकी पुष्टि खुद राहुल गांधी यह कहकर कर चुके हैं कि कांग्रेस यूपी में फ्रंट फुट पर खेलेगी.

प्रदेश मुख्यालय के परिसर में बीजेपी, बीएसपी और आप छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो रहे नेताओं के कायर्क्रम में भी इसकी खूब झलक दिखी. कांग्रेसी वक्ताओं ने इनका स्वागत करते हुए अपने भाषणों में बीजेपी के साथ ही क्षेत्रीय दलों (एसपी-बीएसपी का नाम लिए बगैर) को खूब कोसा तो नारों में राहुल गांधी के साथ प्रियंका के भी खूब जयकारे लगे. कुर्सियों पर बैठे नेताओं और कार्यकर्ता के समूहों में इस बात की चर्चा कि कैसे प्रियंका गांधी सख्ती से काम लेती हैं और अब वे सबको ‘राइट टाइम कर देंगी.’

साथ ही उनके बीच इसकी भी व्याख्या कि एसपी और बीएसपी ने हड़बड़ी दिखाकर कांग्रेस से बगैर गठबंधन न किया होता तो प्रियंका के आने का लाभ उन्हें भी कांग्रेस के साथ बने महागठबंधन में मिलता. कांग्रेस मुख्यालय की इन चर्चाओं का निष्कर्ष यह कि प्रियंका के प्रचार में निकलते ही माहौल और बदलेगा जिससे बीजेपी और गठबंधन दोनों साफ हो जाएंगे.

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कांग्रेसियों की इस मुराद का फैसला तो जनता करेगी लेकिन यूपी कांग्रेस मुख्यालय के बमुश्किल कुछ किलोमीटर के दायरे में फैले बीजेपी, एसपी और बीएसपी के दफ्तरों में भी प्रियंका की एंट्री का विश्लेषण जारी है. एसपी और बीएसपी के खेमे में विश्लेषण यह कि प्रियंका की एंट्री से बीजेपी का ही नुकसान होगा क्योंकि उनका फैक्टर सवर्ण वोटरों खासकर ब्राह्मणों को ही प्रभावित करेगा न कि दलितों मुसलमानों को.

वहीं बीजेपी के खेमे में विश्लेषण यह कि प्रियंका की एंट्री से गठबंधन का पत्ता गोल हो जाएगा क्योंकि अब मुस्लिम कांग्रेस को ही वोट करेंगे न कि गठबंधन को क्योंकि लोकसभा के चुनाव में उनकी पसंद राष्ट्रीय पार्टी ही होगी.

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