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कांग्रेस की जरूरत या सही वक्त...सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी की एंट्री

प्रियंका के अलावा कांग्रेस पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी और एआईसीसी महासचिव नियुक्त किया है

Updated On: Jan 23, 2019 03:06 PM IST

FP Staff

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कांग्रेस की जरूरत या सही वक्त...सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी की एंट्री

आखिरकार... यह कांग्रेस की जरूरत थी या प्रियंका गांधी के लिए राजनीति में आने का सही वक्त. जो भी हो लेकिन प्रियंका गांधी आखिरकार सक्रिय राजनीति में उतर आई हैं. प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का कांग्रेस प्रभारी बनाया गया है. इसके साथ ही उन्हें पार्टी के महासचिव का भी पद दिया गया है. प्रियंका गांधी फरवरी 2019 के पहले हफ्ते में यह पद संभालेंगी.

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यूं तो प्रियंका गांधी हर बार चुनावों में मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के लिए चुनाव प्रचार करती आ रही हैं. लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है. यह मानना है वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का. उन्होंने कहा, भले ही प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई हो लेकिन इसका असर पूरे प्रदेश पर पड़ेगा.

प्रियंका के अलावा कांग्रेस पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी और एआईसीसी महासचिव नियुक्त किया है.

क्या कहना है राहुल गांधी का?

इस घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया बहुत ताकतवर नेता हैं. यूपी की राजनीति बदलने के लिए हम युवा नेताओं को आगे लाना चाहते हैं. मुझे बहुत खुशी हो रही है. मेरी बहन काबिल और कर्मठ हैं. एक अच्छा कदम लिया गया है. इस कदम से बीजेपी घबराई हुई है. हम फ्रंट फुट पर खेलेंगे.

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यूपी में अखिलेश-मायावती गठबंधन पर राहुल गांधी ने कहा कि मायवती जी और अखिलेश जी से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है, असल में हम उनकी बहुत इज्जत करते हैं. हम उनके साथ सहयोग के लिए तैयार हैं. हमारा तीनों का उद्देश्य बीजेपी को हराना है, हमारी लड़ाई कांग्रेस की विचारधारा बचाना है.

क्या कहना है बीजेपी का?

प्रियंका गांधी के कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में उतरने पर बीजेपी ने इसे वंशवाद की राजनीति करार दिया है. बीजपी नेता संबित पात्रा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह पूर्व निर्धारित फैसला है. वो परिवार को ही पार्टी मानते हैं जबकि बीजेपी पार्टी को अपना परिवार मानती है. कांग्रेस ने ऐसा कर मान लिया है कि राहुल गांधी असफल हो गए हैं

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