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कर्नाटक में सिद्धारमैया की नहीं सीधारूपैया की सरकार, मोदी का कांग्रेस पर वार

इस बार फरवरी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार कर्नाटक के दौरे पर थे

Updated On: Feb 27, 2018 08:19 PM IST

Amitesh Amitesh

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कर्नाटक में सिद्धारमैया की नहीं सीधारूपैया की सरकार, मोदी का कांग्रेस पर वार

इस बार फरवरी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार कर्नाटक के दौरे पर थे. मौका था बीजेपी के कर्नाटक अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के 75 वें जन्मदिन का.

यूं तो बीजेपी एक नई परंपरा की शुरुआत करते हुए अमूमन 75 साल के पड़ाव पर पहुंच चुके नेताओं को रिटायरमेंट का संदेश देने लगी है. लेकिन, कर्नाटक की राजनीति में मजबूत दखल रखने वाले लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को फिर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना उनके कद का एहसास कराने वाला है.

येदियुरप्पा के 75 वें जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री कर्नाटक के दावणगेरे में थे. मोदी ने इस मौके पर आयोजित रैली में एक बार फिर से कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर निशाना साधा.

मोदी ने कहा ‘कर्नाटक में सिद्धरमैया की सरकार नहीं सीधारुपैया की सरकार चल रही है. हर काम में सीधा रुपैया वाला कल्चर है. अब सीधा रूपैया जाना चाहिए. एक आमदनी की सरकार आनी चाहिए. अब कर्नाटक को ईमानदारी वाली सरकार चाहिए.’

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प्रधानमंत्री लगातार कर्नाटक के दौरे और वहां की रैलियों में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस की सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. एक बार फिर से कर्नाटक की सरकार पर हर काम में दस फीसदी कमीशन का आरोप लगाकर अपने दावे को और मजबूत करने की कोशिश की.

उनका आरोप था कि भारत सरकार ने कर्नाटक के विकास के लिए बहुत पैसा दिया है, लेकिन, जमीन पर काम नजर नहीं आ रहा है. हर दफ्तर में तो यहां सीधा रूपैया चलता है.

दावणगेरे में अपनी रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने यूपीए सरकार के कार्यकाल से अपनी सरकार की तुलना करते हुए कर्नाटक दिए गए पैसे का जिक्र किया. उनका दावा था कि यूपीए सरकार में फिनांस कमीशन की तरफ से कर्नाटक को 73000 करोड़ रुपए दिए जाते थे. लेकिन, अब एनडीए सरकार में दो लाख करोड़ रुपए मिलता है.

मोदी अपनी रैली के दौरान अपनी सरकार की तरफ से कर्नाटक की सरकार को दी गई मदद का जिक्र करना नहीं भूले. लेकिन, ऐसा बयान चुनाव से पहले राज्य के लोगों को यह दिखाने के लिए था कि केंद्र की मदद के बावजूद उस पैसे का कर्नाटक की जनता की भलाई पर कोई खर्च नहीं हो पा रहा है.

उनका दावा था कि केंद्र सरकार की तरफ से कर्नाटक में 21400 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. लेकिन, इस रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत भेजी गई 500 करोड़ रुपए की रकम आज भी कर्नाटक में खर्च नहीं हो पा रही है. उन्होंने राज्य सरकार की संवेदनहीनता का हवाला देकर 400 करोड़ रुपए सर्व शिक्षा अभियान और माध्यमिक शिक्षा अभियान में जबकि 80-90 करोड़ रुपए तकनीकी शिक्षा के लिए खर्च  नहीं करने का आरोप लगाया.

किसानों को लुभाने पर रहा जोर

2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा करने वाले मोदी ने कर्नाटक के किसानों को भी लुभाने की कोशिश की. उनकी तरफ से दावा किया गया कि राज्य के किसानों की भलाई के तहत इस बार बजट में जो कदम उठाया गया है उसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा.

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उन्होंने कहा ‘बीजेपी इस बात के लिए दशकों से काम कर रही है कि भारत का भाग्य बदलना है तो भारत के गांवों और किसानों का भाग्य बदलना होगा. हमारी हर योजना में किसानों-कृषि पर ही जोर रहा है.’

प्रधानमंत्री फसल योजना का फायदा बताते हुए उन्होंने कहा कि हर तरह से बीमा मिलता है. जिससे फसल बर्बाद ना हो.

एक बार फिर से किसानों के मुद्दे पर भी मोदी के निशाने पर कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार ही था. मोदी ने कहा कि ‘एक परिवार 48 साल तक शासन किया, लेकिन, कुछ नहीं कर पाया. एक चायवाला 48 महीने के भीतर एमएसपी के भीतर लागत को डेढ़ गुना कर दिया. 48 साल तक एक परिवार ने नहीं दिया वो हमने कर दिया.’

कर्नाटक में पांच साल से कांग्रेस सत्ता में है. लेकिन, मोदी को लगता है कि पांच साल के कांग्रेस के शासन की असफलता के मुद्दे को उठाकर सिद्धारमैया की सरकार को बैकफुट पर धकेला जा सकता है. यही वजह है कि फरवरी में तीन सभाएं कर चुके मोदी मार्च के पहले हफ्ते में फिर कर्नाटक में होंगे.

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