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राष्ट्रपति 2017: क्या आप जानते हैं कि ज्यादातर राष्ट्रपति वेजटेरियन हैं या नॉन वेजिटेरियन

कुछ राष्ट्रपति को फाइव स्टार किचेन का खाना पसंद था तो किसी ने स्टाफ कैंटीन का खाना खाया

FP Staff Updated On: Jul 21, 2017 11:54 AM IST

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राष्ट्रपति 2017: क्या आप जानते हैं कि ज्यादातर राष्ट्रपति वेजटेरियन हैं या नॉन वेजिटेरियन

भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पालथी लगाकर भोजन करते थे. वह इस कदर शाकाहारी थे कि राष्ट्रपति भवन की रसोई में मांसाहार प्रतिबंधित कर दिया था. वहीं एपीजे अब्दुल कलाम ने निजी किचन बंद करा दिया था. वह जब तक राष्ट्रपति रहे तब तक उन्होंने स्टाफ कैंटीन का ही खाना खाया. प्रणब मुखर्जी के खाने में रोज फिश करी जरूरी है. खानपान के मामले में पूर्व राष्ट्रपतियों के किस्से और आदतें रोचक रही हैं.

कब हुआ था किचन का शुद्धिकरण?

1952 में जब राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने तब उन्होंने कोशिश की कि वायसराय हाउस के नाम से मशहूर भवन की अंग्रेजियत खत्म कर दें. वह शाकाहार के जबरदस्त आग्रही थे. पहले यहां के किचन में मांसाहार नियमित तौर पर बनता था. उन्होंने पाबंदी लगा दी. किचन को खूब धोया गया, शुद्धिकरण हुआ. फिर इसमें शाकाहार बनना शुरू हुआ. उन्होंने कुर्सी मेज पर बैठकर खाने से मना कर दिया. वह चौकी पर पालथी लगाकर भोजन करते थे. अगर कहीं दौरे पर भी जाते थे तो उनके साथ शाकाहारी भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट या होटलों की सूची होती थी.

किसने किया वेतन का बड़ा हिस्सा दान?

राष्ट्रपति के रूप में उनका वेतन 10,000 रुपए था लेकिन वह केवल 2500 रुपए लेते थे. जब उन्होंने पद से अवकाश लेकर राष्ट्रपति भवन छोड़ा तो उनके पास ऐसा कुछ नहीं था जो वो राष्ट्रपति भवन से लेकर जाते. जब बग्घी पर उनकी यहां से विदाई हुई तो वह दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन से जरिए पटना रवाना हुए. भारी भीड़ उन्हें विदा करने आई थी.

विदेशी मेहमानों ने क्यों बंद किया रुकना

भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन केवल चार-पांच घंटे की नींद लेते थे. वह भी विशुद्ध शाकाहारी थे. उनके राष्ट्रपति रहने तक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष जब मेहमान बनकर यहां आते थे तो राष्ट्रपति भवन में ही रुकते थे. विदेशी अतिथियों के लिए दस कमरों की व्यवस्था थी लेकिन धीरे-धीरे विदेशी राष्ट्र प्रमुखों ने पांच सितारा होटलों की ओर रुख करना शुरू कर दिया. इसके पीछे वजह बताई गई कि उन्हें वो भोजन पसंद नहीं आता था, जो यहां परोसा जाता था.

किसको सबसे ज्यादा पसंद था पार्टी करना

जाकिर हुसैन जब तीसरे राष्ट्रपति बने तो खानपान परंपराएं बदलने लगीं. वह खाने के शौकीन थे. उन्हें भांति भांति के व्यंजन पसंद थे. वह बड़ी पार्टियां देने के लिए जाने जाते थे.जब वह राष्ट्रपति भवन गए तो वहां किचन में मांसाहार का भी प्रवेश हो गया.

उनके जमाने में राष्ट्रपति भवन के दरवाजे हमेशा खानपान और तंदूर विशेषज्ञों के लिए खुले होते थे. राष्ट्रपति बनने से पहले आमतौर पर उनकी पार्टियों की व्यवस्था उनकी बीवी शाहजहां बेगम करती थीं. अक्सर वह खुद लज्जतदार भोजन तैयार करती थीं और पार्टियों में उनके हाथ का बना खाना लोग खाते थे.

कौन-कौन हैं वेजिटेरियन प्रेसिडेंट?

शंकरदयाल शर्मा, आर वेंकटरमन, केआर नारायण भी विशुद्ध वेजेटेरियन थे. उनके रहने पर राष्ट्रपति भवन में फिर शाकाहार की बहार लौट आई. शंकर दयाल के बारे में बताया जाता है कि शाकाहार पर उनका जोर इस कदर था कि जब वह इंग्लैंड में पढ़ रहे थे तो जितने साल वहां रहे, केवल उबले आलू खाते रहे. वेंकटरमन भी शाकाहार को लेकर जबरदस्त आग्रही थे. उनकी पत्नी जानकी सिल्क की जो साड़ी पहनती थीं, वो हमेशा ऐसी होती थी, जिसके बारे में माना जाता था कि उसे कीड़ों को मारकर नहीं बनाया गया है.

कौन नहीं रहना चाहता था राष्ट्रपति भवन में?

नीलम संजीव रेड्डी जब राष्ट्रपति बने तो उन्हें लगा कि इस भवन में कुछ ज्यादा ही फिजूलखर्ची होती है. उन्होंने सादगी से रहने का फैसला किया. ये तय किया कि वह 320 कमरों के इस अालीशान भवन को छोड़कर परिसर के ही किसी साधारण भवन में रहेंगे. लेकिन उन्हें सुझाव दिया गया कि ये ठीक नहीं होगा. अगर परिसर में उनके लिए अलग सादगीपूर्ण भवन बनाया भी गया, तो उस पर काफी खर्च आएगा. इसके बाद उन्होंने अपना इरादा त्याग दिया.

किसने बनवाया फाइव स्टार किचेन 

राष्ट्रपति जेल सिंह के राष्ट्रपति बनने के दौरान पहली बार इस भवन के किचन को आधुनिक जामा पहनाया गया. उसे पूरी तरह से पांच सितारा होटलों सरीखे किचन में बदला गया. आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू हुआ. शेफ रखे गए. पहली बार राष्ट्रपति भवन के दो किचन बना दिए गए. एक किचन, जो लगातार यहां होने वाली पार्टियों और भोज की तैयारी करे. राष्ट्रपति का व्यक्तिगत किचन अलग कर दिया गया.

किसको पसंद था स्टाफ कैंटीन का खाना

एपीजे अब्दुल कलाम और अलबेले थे. जब वह प्रथम नागरिक के विशाल भवन में पहुंचे तो उनके यहां आते ही राष्ट्रपति की व्यक्तिगत किचन को बंद करा दिया गया. उनका मानना था कि अकेले एक व्यक्ति के लिए एक अलग किचन और स्टाफ की व्यवस्था करने का कोई औचित्य नहीं.

जब तक वह पद पर रहे तब तक वह राष्ट्रपति भवन की स्टाफ कैंटीन से खाना बनवाकर खाते रहे. वह शाकाहारी थे. नियमित तौर पर इडली, वड़ा और सांभर नाश्ते के रूप में लेते थे. जब भी उनके कोई रिश्तेदार राष्ट्रपति भवन में आते थे, तो उसके ठहरने और खाने का खर्च कभी यहां आधिकारिक मद से नहीं करते थे बल्कि उसका भुगतान खुद के निजी बैंक अकाउंट से करते थे.

लजीज फिश करी किसकी थी पसंद

प्रणब दा के राष्ट्रपति बनने के बाद यहां का किचन के और बदलाव हुए. भोज और समारोहों की तैयारी करने वाला किचन कहीं ज्यादा बड़ा और विविधतापूर्ण हो गया. कांटिनेटल, मुगलिया, इंडियन और बेकरी जैसे इसके छह अलग डिपार्टमेंट हो गए. यहां अब करीब 50 लोगों का स्टाफ रोज होने वाले किसी न किसी प्रोग्राम के खानपान की तैयारी में लगे रहते हैं. राष्ट्रपति के निजी किचन में वो पकाया जाता है, जो उन्हें पसंद है या फिर उनके व्यक्तिगत मेहमानों को परोसा जाता है. वैसे वह मंगलवार को छोड़कर रोजाना फिश करी, बंगाली मिठाइयां और सेब को अपने रोजाना के भोजन में जरूर शामिल रखते हैं.

(साभार: न्यूज 18 से संजय श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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