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अपनों के बजाय कांग्रेस और हार्दिक पटेल का मुंह क्यों देख रहे हैं प्रवीण तोगड़िया?

तोगड़िया के लिए यह दुखद विडंबना ही है कि उनके इस दावे के बाद कि उनकी जान को गंभीर खतरा है, आरएसएस का कोई भी नेता उनसे मिलने नहीं आया

Sanjay Singh Updated On: Jan 17, 2018 03:46 PM IST

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अपनों के बजाय कांग्रेस और हार्दिक पटेल का मुंह क्यों देख रहे हैं प्रवीण तोगड़िया?

ज्यादा पुरानी बात नहीं है कि प्रवीण तोगड़िया शेर की तरह दहाड़ा (कम से कम उनके भक्तों के कानों के लिए) करते थे. यह एक अलग मुद्दा है कि पिछले कुछ वर्षों में उनके कट्टरपंथी हिंदुत्व और तेजाबी भाषण दोनों को ही पसंद करने वालों की संख्या घटी है.

लेकिन मंगलवार को तोगड़िया जब अपनी अचानक रहस्यमय गुमशुदगी (वह बेहोशी की हालत में अहमदाबाद के एक अस्पताल में लाए गए थे, जबकि राजस्थान पुलिस उनकी गिरफ्तारी के वारंट के साथ गुजरात में थी) के बारे में बताने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आए तो उन्होंने विक्टिम कार्ड (उत्पीड़न का शिकार) खेलने की कोशिश की.

तोगड़िया ने कहा कि वो लोग उनके पीछे पड़े हैं, जो पहले कभी उनके दोस्त थे और वृहद भगवा परिवार का हिस्सा थे. 15 मिनट के अपने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह एक से ज्यादा बार रो पड़े.

तोगड़िया 'अस्वस्थ' थे और एक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने ठीक हो जाने का इंतजार किए बिना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करना क्यों जरूरी समझा. जाहिर है तोगड़िया एक सनसनीखेज खुलासा करने की जल्दी में थेः वो यह कि उन्हें सोमवार सुबह एक एनकाउंटर में खत्म कर देने की साजिश रची गई थी. उन्होंने समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि राजस्थान और गुजरात पुलिस की साझा टीम उनकी हत्या करने के लिए आई थी.

Pravin Togadia Press Conference

अहमदाबाद के अस्पताल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के दौरान प्रवीण तोगड़िया कई बार रो पड़े

लेकिन तोगड़िया के बयान से जितने जवाब मिले, उससे ज्यादा सवाल खड़े हो गए. पहला, उन्होंने कहा कि जब वह सुबह पूजा कर रहे थे तब उन्हें वीएचपी के किसी शख्स ने साजिश के बारे में बताया. तोगड़िया को वीएचपी मुख्यालय फौरन छोड़ देने की सलाह दी गई थी. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि तोगड़िया को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिली हुई है. इसका अर्थ है कि वह अर्धसैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ जवानों की 24x7 निगरानी में रहते हैं.

काल्पनिक एनकाउंटर के लिए इससे बेवकूफाना समय, स्थान कोई और नहीं हो सकता था

अगर तोगड़िया समझते भी थे कि राजस्थान और गुजरात पुलिस की टीम उनकी हत्या करने (यदि एक पल के लिए ऐसा मान भी लें) आई है तो भी तोगड़िया वीएचपी मुख्यालय से अपने समर्थकों के बीच से सुरक्षित रूप से छिपते हुए निकल गए. अगर ऐसा काल्पनिक एनकाउंटर किया जाना था तो इससे बेवकूफाना समय और स्थान कोई और नहीं हो सकता था.

दूसरा, तोगड़िया ने खुद को बचाने के लिए क्या किया. वह सुरक्षा में तैनात कमांडो को गच्चा देकर एक वीएचपी कार्यकर्ता के साथ ऑटो में बैठकर चले गए. कुछ जाने-माने लोगों (राजस्थान की मुख्यमंत्री और गुजरात के गृह सचिव) को कॉल करने के बाद उन्होंने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया जिससे कि उनको ढूंढा ना जा सके.

तीसरा, एक वीएचपी कार्यकर्ता के घर पहुंचने और देश भर में लोगों को फोन करने के बाद तोगड़िया जयपुर जाने या किसी अदालत के सामने समर्पण करने के लिए एयरपोर्ट (बिना किसी टिकट या फ्लाइट की जानकारी के) पहुंचने के लिए एक दूसरे ऑटो रिक्शा में सवार हुए. लेकिन ऐसा लगता है कि वह रास्ते में बेहोश हो गए. यहां यह साफ नहीं हो पा रहा है कि वह एक पार्क के अंदर (जहां से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया) कैसे पहुंच गए.

प्रवीण तोगड़िया एक डॉक्टर हैं. वह कैंसर सर्जन थे. उन्हें पता होना चाहिए था उन्हें क्या बीमारी है. चौथा, तोगड़िया का दावा था कि जो लोग सत्ता में हैं वह उनकी आवाज दबाना चाहते हैं. और फिर भी वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे देश को अपनी बात पहुंचा रहे थे और अंततः पूरी दुनिया को.

याद रखिए कि तोगड़िया वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, और समझा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय हिंदू समुदाय से जुड़े हुए हैं. तोगड़िया के लिए दुर्भाग्य की बात है कि, उनके दावे ने हेडलाइंस तो बनाई, लेकिन इससे राजनीतिक भूचाल नहीं आया.

आरएसएस का कोई भी नेता तोगड़िया से मिलने नहीं आया

तोगड़िया के लिए यह दुखद विडंबना ही है कि संघ परिवार में उनके जैसे कद्दावर हैसियत वाले शख्स के इस दावे के बाद कि उनकी जान को गंभीर खतरा है, आरएसएस का कोई भी नेता उनसे मिलने नहीं आया. विस्तृत भगवा परिवार के दोस्तों और साथियों में से कोई उनके लिए समर्थन या सहानुभूति के दो शब्द भी नहीं बोला.

उन्हें सहानुभूति और समर्थन एकदम नाउम्मीद दिशाओं से मिला. कांग्रेस पार्टी और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से. तोगड़िया पाटीदार समुदाय से हैं, इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि हार्दिक, अपने राजनीतिक मकसद के साथ, तोगड़िया का समर्थन करने अस्पताल पहुंचे. इसके एवज में वो अपने समुदाय में कुछ बढ़त हासिल करने की उम्मीद कर सकते हैं.

togadia hardik

पाटीदारों के नेता हार्दिक पटेल ने अस्पताल पहुंचकर अकेले में तोगड़िया से मुलाकात की

फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है कि तोगड़िया और हार्दिक, जिन्होंने कांग्रेस और इसके अध्यक्ष राहुल गांधी के सहयोगी के तौर काम किया था, क्या गुजरात चुनाव के दौरान भी संपर्क में थे, जब कांग्रेस और पाटीदार समुदाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चुनौती दे रहे थे. या फिर यह सिर्फ एक बार की मुलाकात थी.

इसे भी पढ़ें: VHP के कट्टर हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया इतने कमजोर कैसे पड़े कि आंसू निकल गए

तोगड़िया के दावे से भी बड़ी खबर जो बात बनी वह थी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोडवाडिया का फौरन उनके कमरे में जाकर मुलाकात करना. तोगड़िया और मोडवाडिया की सौहार्दपूर्ण माहौल में मुस्कुराती हुई तस्वीर उस पुराने मुहावरे की याद दिला रही थी: 'राजनीति में कोई भी स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता' और 'दुश्मन का दुश्मन, दोस्त होता है.'

तोगड़िया-मोडवाडिया की हुई मुलाकात पर कांग्रेस को सफाई देनी होगी

कांग्रेस को तोगड़िया-मोडवाडिया की मुलाकात पर सफाई देनी होगी. मोडवाडिया साफ तौर पर भूल गए जो उनकी पार्टी के सहयोगी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बीजेपी, आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल के बारे में कहा था, 'यह अपने आप में एक तरह के आतंकवादी हैं. बीजेपी, आरएसएस और बजरंग दल के अंदर भी आतंकवादी हैं… वह चाहे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई), बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद हो या कोई और संगठन हो… अगर वो समाज का सौहार्द और भाईचारा बिगाड़ने में लगे हैं या सांप्रदायिकता फैलाते हैं तो उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.'

सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है कि जब तोगड़िया मोडवाडिया से मिले तो उन्हें सिद्धारमैया की टिप्पणी याद रही होगी या नहीं. लेकिन जो बात साफ है कि वीएचपी और संघ परिवार में तोगड़िया हाशिए पर आ पहुंचे हैं. वह वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष हो सकते हैं, लेकिन यह नामांकित पद है और पार्टी अध्यक्ष की इच्छा पर बनाया गया है. हकीकत यह है कि वीएचपी में आंतरिक तनाव इतना बढ़ गया है कि इसे नए अध्यक्ष का चुनाव अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना पड़ा. यह चुनाव तोगड़िया का भविष्य तय करेगा और संघ परिवार का एक प्रभावशाली हिस्सा तोगड़िया को शक्तिशाली स्थिति में नहीं देखना चाहता.

अस्पताल के बिस्तर पर स्वास्थ्य लाभ करते हुए, तोगड़िया के पास भरपूर समय होगा कि वह सोचें कि वह अपने संगठन में ही कैसे इतने एकाकी हो गए कि उन्हें कांग्रेस में दोस्तों की तलाश करनी पड़ रही है. इससे भी बढ़कर यह कि ऐसे समय में जबकि उनके पुराने समय में मित्र रहे नरेंद्र मोदी देश पर शासन कर रहे हैं और बीजेपी (वह पार्टी जो कभी उन्हें बहुत प्रिय थी) गुजरात में शासन में है.

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