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राजनीतिक वैलेंटाइन: शीला दीक्षित-अजय माकन खेमे में सुलह

आम आदमी पार्टी द्वारा 2015 में बुरी हार देखने के तीन साल बाद कांग्रेस के दोनों मजबूत खेमे एक हुए हैं

Syed Mojiz Imam Updated On: Feb 14, 2018 08:41 AM IST

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राजनीतिक वैलेंटाइन: शीला दीक्षित-अजय माकन खेमे में सुलह

राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी वक्त के मोहताज हैं. राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद अजय माकन ने शीला दीक्षित से मुलाकात की और दोस्ती का हाथ बढ़ाया. दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत करने की अपील की. शीला दीक्षित तमाम मान मनौव्वल के बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर आने के लिए राजी हो गई हैं, लेकिन कुछ शर्तों के साथ दोनों नेता 14 फरवरी को आम आदमी पार्टी की सरकार के तीन साल पूरे होने पर एक साथ नजर आएगें.

बुधवार को 2 बजे शीला दीक्षित और अजय माकन आप सरकार की नाकामियों पर एक बुकलेट भी जारी करेंगे. जिसके बाद कई पूर्व मंत्री हर मुददे पर प्रेस कांफ्रेस करेंगे. कांग्रेस के लोगों का कहना है कि शीला दीक्षित के साथ आने से कांग्रेस को मजबूती मिलेगी.

कांग्रेस के नेताओं को लग रहा है शीला दीक्षित दिल्ली मे विकास का चेहरा हैं. अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लड़ाई में कामयाबी तभी मिल सकती है, जब विकास के एजेंडे को आगे किया जाए. दिल्ली के लोगों को शीला दीक्षित के कामों की याद दिलाई जाए.

कैसे हुई सुलह

राहुल गांधी ने अजय माकन से शीला दीक्षित से मिलकर काम करने की बात कही. अजय माकन ने शीला दीक्षित से मिलने का समय मांगा, जिस पर शीला दीक्षित के यहां से की जवाब नहीं दिया गया. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने शीला दीक्षित को मनाया. शीला दीक्षित और अजय माकन के बीच मुलाकात हुई.

इसके बाद अजय माकन ने ट्वीट करके कहा कि शीला दीक्षित की विकास वाली सरकार को लोग आज भी याद कर रहे हैं. शीला जी ने मुझे कैबिनेट मंत्री बनाया अब दोनों लोग मिलकर दिल्ली की खोई हुई शान को वापस लाएंगे.

दोनों की बाद में कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको के साथ बैठक हुई. कांग्रेस के बड़े नेताओ के आश्वासन के बाद शीला दीक्षित मान गईं. जाहिर है कि अजय माकन की अगुवाई में लगातार चुनाव में मात मिल रही है. बवाना उपचुनाव में भी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था.

शीला दीक्षित की शर्तें

शीला दीक्षित ने अजय माकन से साफ कहा कि कांग्रेस को मजबूत करने के लिए अपनी पंसद के हिसाब से काम करना छोड़ दें और अपने लोग वाली राजनीति से परहेज करें. जो लोग कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं. उन सब को सम्मान मिलना चाहिए.

ये भी पढ़ें: AAP के तीन साल: दृश्य और अदृश्य शक्तियों के बीच क्यों फंस गए सीएम?

दिल्ली कांग्रेस में शीला गुट के लोग आरोप लगा रहे हैं कि अजय माकन ने शीला खेमे के लोगों को एआईसीसी का सदस्य तक नहीं बनाया है. शीला दीक्षित ने अजय माकन से कुछ लोगों को संगठन में एडजस्ट करने के लिए कहा है. शीला दीक्षित ने सभी बड़े नेताओ को 14 फरवरी को आमत्रित करने की भी सलाह दी है. अजय माकन सब बात मानने पर राजी हो गए हैं.

उपचुनाव पर नजर

आप के 20 विधायकों के अयोग्य घोषित होने का मामला अदालत में लंबित है, लेकिन उम्मीद है कि जल्दी ही उपचुनाव हो सकते हैं. कांग्रेस के पास दिल्ली विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है. ऐसे में कांग्रेस की रणनीति ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने की रहेगी. कांग्रेस को लग रहा है कि दिल्ली से आप का खुमार उतर रहा है. शीला दीक्षित अपने काम के लिए जानी जाती रही हैं. शीला दीक्षित का चेहरा आगे करके चुनाव लड़ना फायदेमंद साबित हो सकता है.

शीला दीक्षित माकन के बीच तकरार

अजय माकन ने अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी के करीबी होने का फायदा उठाया. दिल्ली में अजय माकन ने विरोधी कैंप के लोगों को दरकिनार करना शुरू कर दिया. खासकर शीला दीक्षित कैंप से जुड़े लोगों को पार्टी के पद से महरूम रखा गया. एमसीडी के टिकट भी अजय माकन ने मनमाने तरीके से बांटे थे. जिससे शीला दीक्षित नाराज चल रही थीं, लेकिन अजय माकन दिल्ली में कांग्रेस को जीत नही दिला सके.

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कांग्रेस के सीनियर नेताओं को लग रहा था कि एमसीडी चुनाव में कामयाबी मिलेगी, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई. बवाना उपचुनाव के बाद अजय माकन ने कहा कि कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा है. जिसका शीला दीक्षित ने करारा जवाब दिया. शीला दीक्षित ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए लड़े जाते हैं ना कि वोट पर्सेंट बढ़ाने के लिए. इससे पहले अजय माकन कई बार कह चुके थे कि शीला युग खत्म हो गया है.

कई लोगों ने पार्टी छोड़ी

अजय माकन की राजनीति से दुखी होकर कई लोग पार्टी से अलग हो गए. दिल्ली के पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली बीजेपी में शामिल हो गए. पूर्व डिप्टी स्पीकर अमरीश गौतम ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया. यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमित मलिक ने भी बीजेपी का रुख कर लिया. एमसीडी टिकट ना मिलने की वजह से कई लोगों ने पार्टी से किनारा कर लिया या फिर निर्दलीय मैदान में कूद गए जिससे कांग्रेस को ही नुकसान हुआ.

अजय माकन थे शीला के खासम खास

छात्र राजनीति से कदम रखने वाले अजय माकन तेजी से राजनीति मे आगे बढ़े थे. शीला दीक्षित ने ही अजय माकन को कैबिनेट मंत्री बनाया था. कई अहम विभाग की जिम्मेदारी भी दी थी. एक ज़माने मे दिल्ली की राजनीति में अजय माकन शीला दीक्षित के खास सिपहसालारों मे थे, लेकिन राजनीति मे वक्त बदला अजय माकन को लगा कि वो दिल्ली के सीएम बन सकते हैं.

तभी से दोनों के रिश्तों के बीच दरार आ गई. शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की सीएम रहीं. अपने पद से हटीं तब जब अरविंद केजरीवाल से चुनाव हार गईं. शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश बहुत नेताओं ने की लेकिन सोनिया गांधी से करीबी की वजह से किसी को कामयाबी नहीं मिल पाई.

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं )

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