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डिफॉल्टर करने वाली राजनीतिक पार्टियां नहीं लड़ सकेंगी चुनाव: निर्वाचन आयोग

आयोग ने राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों को अमल में लाने के तौर-तरीकों पर राय मांगी है

Updated On: Mar 26, 2017 05:15 PM IST

Bhasha

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डिफॉल्टर करने वाली राजनीतिक पार्टियां नहीं लड़ सकेंगी चुनाव: निर्वाचन आयोग

निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक पार्टियों के डिफॉल्टर होने पर सख्ती दिखाई है. बिजली, पानी, टेलीफोन कनेक्शन और मकान संबंधी बकाये का भुगतान नहीं करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रस्ताव लाने के बाद अब निर्वाचन आयोग ऐसी ही व्यवस्था राजनीतिक दलों के लिए भी लाना चाहता है.

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखकर इस मुद्दे और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों को अमल में लाने के तौर-तरीकों पर राय मांगी है.

अदालत के आदेश में कहा गया था कि ‘बकाया नहीं होने का प्रमाणपत्र’ सिर्फ उम्मीदवारों को नहीं, बल्कि प्रत्याशी खड़े करने से पहले राजनीतिक दलों को भी जमा करना चाहिए.

अगस्त, 2015 के अपने आदेश में अदालत ने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि, लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को बिजली, पानी, टेलीफोन कनेक्शन और आवास से संबंधित ‘बकाया नहीं होने का प्रमाणपत्र’ जमा करना होगा.

आदेश में यह भी कहा गया है कि इसी तरह का नियम राजनीतिक दलों पर भी लागू होना चाहिए.

बकाया तो चुकाना ही  पड़ेगा

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘हम हाईकोर्ट के आदेश पर विचार कर रहे हैं. इसमें कहा गया था कि यह सिर्फ उम्मीदवारों नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों से भी संबंधित है. हम राजनीतिक दलों से संपर्क में हैं. हमने इस बारे में उनकी राय मांगी है.’

नसीम जैदी ने यह भी कहा कि, हाल के विधानसभा चुनावों में कुछ उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल नहीं कर सके क्योंकि उन्होंने ‘बकाया नहीं होने का प्रमाण’ नहीं दिया था.

देश की सभी सात राष्ट्रीय पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, सीपीआई-एम, बीएसपी और तृणमूल कांग्रेस तथा एसपी और अन्नाद्रमुक जैसे क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी आवास मिला हुआ है जिसके लिए उन्हें किराया देना होता है.

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