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राजनीतिक दलों को मिले विदेशी चंदे की अब नहीं होगी जांच

अब 1976 से ही राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की संभावना को समाप्त करने के एये इसमें आगे और संशोधन कर दिया गया है

Bhasha Updated On: Mar 18, 2018 09:18 PM IST

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राजनीतिक दलों को मिले विदेशी चंदे की अब नहीं होगी जांच

राजनीतिक दलों को 1976 के बाद मिले विदेशी चंदे की अब जांच नहीं हो सकेगी. इस संबंध में कानून में संशोधन को लोकसभा ने बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया.

लोकसभा ने बुधवार को विपक्षी दलों के विरोध के बीच वित्त विधेयक 2018 में 21 संशोधनों को मंजूरी दे दी. उनमें से एकसंशोधन विदेशी चंदा नियमन कानून, 2010 से संबंधित था. यह कानून विदेशी कंपनियों को राजनीतिक दलों को चंदा देने से रोकता है. जन प्रतिनिधित्व कानून, जिसमें चुनाव के बारे में नियम बनाए गए हैं, राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा लेने पर रोक लगाता है.

बीजेपी सरकार ने पहले वित्त विधेयक 2016 के जरिए विदेशी चंदा नियमन कानून ( एफसीआरए) में संशोधन किया था जिससे दलों के लिए विदेशी चंदा लेना आसान कर दिया गया. अब 1976 से ही राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की संभावना को समाप्त करने के एये इसमें आगे और संशोधन कर दिया गया है.

वित्त विधेयक 2018 में बुधवार को किए गए संशोधनों को लोकसभा वेबसाइट पर सूचीबद्ध किया गया है, इसके अनुसार, ‘वित्त अधिनियम, 2016 की धारा 236 के पहले पैराग्राफ में 26 सितंबर 2010 के शब्दों और आंकड़ों के स्थानपांच अगस्त 1976 शब्द और आंकड़े पढ़े जाएंगे.’

हाईकोर्ट ने बीजेपी-कांग्रेस को विदेशी चंदा कानून के उल्लंघन का दोषी माना है 

पूर्व की तिथि से किए गए इस संशोधन से बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही 2014 के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले से बचने में मदद मिलेगी जिसमें दोनों दलों को एफसीआरए कानून के उल्लंघन का दोषी पाया गया.

बीजेपी सरकार ने वित्त अधिनियम 2016 के जरिए विदेशी कंपनी की परिभाषा में भी बदलाव किया. इसमें कहा गया कि अगर किसी कंपनी में 50 प्रतिशत से कम शेयर पूंजी विदेशी इकाई के पास है तो वह विदेशी कंपनी नहीं कही जाएगी. इस संशोधन को भी सितंबर 2010 से लागू किया गया.

पिछले सप्ताह जिस संशोधन को लोकसभा ने पारित किया है उससे पहले तक 26 सितंबर 2010 से पहले जिन राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा मिला, उनकी जांच की जा सकती थी.

वित्त कानून 2016 में उपबंध 233 के पारित होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील वापस ले ली. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दोनों दलों को विदेशी चंदे को लेकर कानून के उल्लंघन का दोषी पाया था.

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