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मोतीलाल नेहरू ने डाली थी राजनीति में परिवारवाद की नींव

क्षेत्रीय दलों की हालत तो अत्यंत बुरी है. घोर अलोकतांत्रिक है.

Updated On: Jan 28, 2017 01:09 PM IST

Surendra Kishore Surendra Kishore
वरिष्ठ पत्रकार

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मोतीलाल नेहरू ने डाली थी राजनीति में परिवारवाद की नींव

मोतीलाल नेहरू ने 1929 में ही भारतीय राजनीति में परिवारवाद की ठोस नींव डाल दी थी. अब जबकि परिवारवाद ने इस देश की राजनीति को पूरी तरह विद्रूप बना दिया है, नयी पीढ़ी के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार रहे हैं.

अब तो थोड़े से अपवादों को छोड़कर लगभग सभी राजनीतिक दल परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. इस सिलसिले में अधिकतर आतुर राज नेता इस बात का भी ध्यान नहीं रख रहे हैं कि उनके वंशज में देश-राज्य को चलाने की योग्यता-क्षमता है भी या नहीं. कुछ वंशजों से तो उनकी पार्टी भी नहीं चल पा रही है.

अधिकतर दलों व नेताओं ने कुछ अन्य बुराइयों की तरह ही परिवारवाद को भी राजनीति की जरूरी बुराई के रूप स्वीकार कर लिया है. 2005 में बिहार की सत्ता लालू प्रसाद के हाथ से निकल गयी थी.

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उन्होंने उसके कारणों का मंथन किया. अंततः 9 जुलाई 2008 को गया में राजद की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में कहा कि ‘पार्टी नेताओं की अति महत्वाकांक्षा, परिवारवाद, अंतर्कलह और समर्पित कार्यकत्र्ताओं की उपेक्षा के कारण बिहार की सत्ता हमारे हाथों से निकल गयी.’

लालू बिहार के नेहरू परिवार के मुखिया हैं

लालू स्पष्टवादी हैं. उन्होंने गलती स्वीकार की. पर अन्य नेता नहीं करते. वे कहते हैं कि दूसरे नेता परिवावाद करते हैं तो आप क्यों नहीं लिखते ? अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्य मंत्री बनवाने के बाद लालू भी कहा करते थे कि हमारा परिवार बिहार का नेहरू परिवार है.

Lalu Yadav

पीटीआई

करूणानिधि ने भी एक बार कहा था कि परिवारवाद के लिए नेहरू जिम्मेदार हैं. लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार से मैंने पूछा था कि क्या मुलायम सिंह यादव ने अपने परिवार के अधिक सदस्यों को पद दिए या नेहरू परिवार ने दिए थे ? उन्होंने छूटते ही कहा था कि मुलायम परिवार इस मामले में अभी नेहरू परिवार से पीछे है.

आज परिवारवाद की बुराइयों से कराहते देश में अनेक लोग यह मानते हैं कि यह आम धारणा है कि जवाहर लाल नेहरू की सहमति से 1959 में ही इंदिरा गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनवा दिया गया. हालांकि कुछ नेहरू प्रशंसक इतिहासकार लिखते हैं कि उसमें जवाहरलाल का कोई हाथ नहीं था.

एक वामपंथी इतिहासकार ने तो यह भी लिख मारा कि इस देश की राजनीति में परिवारवाद की शुरूआत सिंधिया परिवार से हुई. दूसरी ओर दो उदाहरण बिहार के हैं. 1957 के आम चुनाव के लिए तत्कालीन मुख्य मंत्री डा.श्रीकृष्ण सिंह ने अपने पुत्र शिवशंकर सिंंह को कांग्रेस का टिकट नहीं लेने दिया.

अपने पुत्र राम नाथ ठाकुर के मामले में यही काम कर्पूरी ठाकुर ने 1980 में किया था. परिवारवाद के आदिपुरूष मोतीलाल नेहरू ने अपने पुत्र को कांग्रेस अध्यक्ष बनवाने के लिए महात्मा गांधी को लगातार तीन पत्र लिखे थे. तीसरे पत्र पर अंततः गांधी दबाव में आ ही गए.

उससे पहले 19 जून 1927 को महात्मा गांधी ने मोतीलाल को लिखा था कि ‘कांग्रेस का जो रंग-ढंग है, उससे यह राय और भी दृढ होती है कि जवाहरलाल द्वारा उस भार को उठाने का अभी समय नहीं आया है.' पर मोतीलाल के दबाव पर 1929 में जवाहर लाल कांग्रेस अध्यक्ष बने. मोतीलाल नेहरू 1928 में उस पद पर थे.

अकुशल नेता से पार्टी को नुकसान

इंदिरा गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के संबंंध में स्वतंत्रता सेनानी महावीर त्यागी और जवाहर लाल नेहरू के बीच का पत्र व्यवहार आंखें खोलने वाला है. इस पत्र से साफ है कि पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे. जबकि इंदिरा गांधी में नेहरू के गुण नहीं थे.

31 जनवरी 1959 को महावीर त्यागी ने नेहरू को लिखा कि वह इंदिरा को कांग्रेस अध्यक्ष न बनवाएं. उसके जवाब में एक फरवरी 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने महावीर त्यागी को अन्य बातों के साथ -साथ यह भी लिखा कि ‘मेरा यह भी ख्याल है कि बहुत तरह से उसका (यानी इंदिरा का) इस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष बनना मुफीद भी हो सकता है. खतरे भी जाहिर हैं. ’

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समय बीतने के साथ आज तो कांग्रेस को परिवारवाद की ऐसी आदत लग गयी है कि अकुशल परिवारवादी नेतृत्व के कारण पार्टी के सिकुड़ते जाने के बावजूद दल के अधिकतर नेता ही परिवार को छोड़ने को तैयार नहीं है.

पंकज सिंह

पंकज सिंह

भाजपा ने भी इस मामले में कोई आदर्श उपस्थित नहीं किया. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र को टिकट मिलना उसका उदाहरण है. क्षेत्रीय दलों की हालत तो अत्यंत बुरी है. घोर अलोकतांत्रिक.

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जहां जातीय व सांप्रदायिक वेाट बैंक हैं वहां उसकी तार्किक परिणति परिवारवाद के रूप में सामने है. पता नहीं यह सर्वव्यापी घोर परिवारवाद इस देश के लोकतंत्र को अंततः कहां ले जाएगा ?

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