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पारदर्शी हो राजनीतिक चंदा, सरकार कर रही है विचार: जेटली

राजनीतिक बॉन्ड कैश चंदे की जगह लेगा, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी

FP Staff Updated On: Jan 07, 2018 03:36 PM IST

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पारदर्शी हो राजनीतिक चंदा, सरकार कर रही है विचार: जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चुनावी बॉन्ड की व्यवस्था देश में राजनीतिक चंदे में परदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है. सरकार इस दिशा में किसी भी नए सुझाव पर विचार के लिए तैयार है.

जेटली ने रविवार को फेसबुक पर लिखा है कि अभी तक राजनीतिक दलों को चंदा देने और उनका खर्च दोनों नकदी में होता आ रहा है. उन्होंने लिखा है कि चंदा देने वालों के नामों का या तो पता नहीं होता है या वे छद्म होते हैं. कितना पैसा आया ये कभी नहीं बताया जाता और व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि अज्ञात स्रोतों से संदिग्ध धन आता रहे. उन्होंने लिखा है, ‘ये बिल्कुल अपारदर्शी तरीका है. ज्यादातर राजनीतिक दल और समूह इस मौजूदा व्यवस्था से बहुत सुखी दिखते हैं. ये व्यवस्था चलती रहे तो भी उनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा.’

बॉन्ड के जरिए चंदा देने की बात कह चुके हैं जेटली 

जेटली का कहना है कि उनकी सरकार का प्रयास ये है कि ऐसी वैकल्पिक प्रणाली लाई जाए जो राजनीति चंदे की व्यवस्था में स्वच्छता ला सके. वित्त मंत्री ने पिछले सप्ताह राजनीतिक दलों को बॉन्ड के जरिए चंदा देने की एक रूपरेखा जारी की. चुनावी बॉन्ड की बिक्री जल्दी शुरू की जाएगी. ऐसे बॉन्ड की मियाद केवल 15 दिन की होगी.

इन्हें एसबीआई से खरीदा जा सकेगा. चंदा देने वाला उसे खरीद कर किसी भी पार्टी को उसे चंदे के रूप में दे सकेगा और वो दल उसे बैंक के जरिए भुना लेगा. इन बॉन्ड को नकद चंदे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है.

उन्होंने लिखा है कि अब लोगों के पास विकल्प होगा कि मौजूदा व्यवस्था के हिसाब से पैसा देना चाहते हैं या चेक, ऑनलाइन और चुनावी बॉन्ड का माध्यम चुनते हैं.

नए आइडिया को वेलकम करेगी सरकार 

वित्त मंत्री ने कहा कि बाद के तीन तरीकों में से दो (चेक और ऑनलाइन) पूरी तरह पारदर्शी है. बॉन्ड योजना मौजूदा अपरादर्शी राजनीतिक चंदे की मौजूदा व्यवस्था की तुलना में एक बड़ा सुधार है.

उन्होंने कहा ‘सरकार भारत में राजनीतिक चंदे की वर्तमान व्यवस्था को स्वच्छ बनाने और मजबत करने के लिए सभी सुझावों पर विचार करने को तैयार है. लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अव्यवहारिक सुझावों से नकद चंदे की व्यवस्था नहीं सुधरेगी बल्कि उससे ये और पक्की ही होगी.’

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