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‘कांग्रेस मुक्त दक्षिण’ के लिए कर्नाटक में बीजेपी के पास बड़ा मौका लेकिन राह आसान भी नहीं

बीजेपी ये जानती है कि दक्षिण के दरवाजे पर भगवा फहराने के लिए कर्नाटक में ही सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी

Updated On: Jan 08, 2018 08:02 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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‘कांग्रेस मुक्त दक्षिण’ के लिए कर्नाटक में बीजेपी के पास बड़ा मौका लेकिन राह आसान भी नहीं

देश के तमाम राज्यों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने के बाद अब बीजेपी की नजर कर्नाटक पर टिकी है. दक्षिण से कांग्रेस को पूरी तरह सिमटाने के लिए बीजेपी के पास कर्नाटक विधानसभा चुनाव का मौका है. लेकिन दक्षिण के दरवाजे पर भगवा फहराने के लिए कर्नाटक के चुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. भले ही इस बार बीजेपी के पक्ष में कर्नाटक के कई समीकरण दिखाई देते हों लेकिन जिस तरह गुजरात बीजेपी का गढ़ है तो उसी तरह कर्नाटक भी कांग्रेस के किले से कम नहीं है.

19 राज्यों में सरकार बनाने के बाद बीजेपी की कोशिश कर्नाटक में वापसी की इसलिए भी है ताकि दक्षिण राज्यों से भी कांग्रेस की मौजूदगी खत्म हो सके. कर्नाटक को लेकर बीजेपी के पास साल 2014 के लोकसभा चुनाव का इतिहास है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कर्नाटक की 28 सीटों में से 17 सीटें जीती थीं. साथ ही उसने वोट प्रतिशत में ऐतिहासिक छलांग भी लगाई थी. वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक की जनता हर पांच साल में सरकार बदलने का काम करती आई है. ऐसे में बीजेपी को अपनी जीत की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है. अबतक के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के पक्ष में ये खास बात रही कि बीजेपी शासित राज्यों के चुनाव में उसे मोदी लहर का सीधा फायदा मिला तो जहां कांग्रेस की सरकारें रहीं, वहां एंटी इंकंबेंसी लहर ने बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया. कर्नाटक में बीजेपी को एंटी इंकंबेंसी दिखाई दे रही है. लेकिन वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर बीजेपी को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी. क्योंकि सरकार किसी की भी बने लेकिन राज्य में कांग्रेस के वोटर की सोच पर असर नहीं पड़ता है. चाहे साल 2013 के विधानसभा चुनाव हों या फिर साल 2014 के लोकसभा चुनाव हों, कांग्रेस के वोट प्रतिशत पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा.

yogi adityanath

ऐसे में बीजेपी विकास के साथ हिंदुत्व के रथ पर चढ़कर दक्षिण में अपने विजयी रथ को आगे बढ़ाना चाहती है. तभी बीजेपी ने फायरब्रांड नेता और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से कर्नाटक में शंखनाद करवाया. यूपी के सीएम योगी ने कर्नाटक में कांग्रेस को जमकर ललकारा. हिंदुत्व के मुद्दे पर योगी बनाम सिद्धारमैया का आरपार दिखाई पड़ा. उन्होंने सिद्धारमैया के हिंदुत्व वाले बयान पर तंज कसते हुए गौ-मांस का मुद्दा उठाया और कहा कि राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने गौमांस को बढ़ावा दिया है. उन्होंने ये भी याद दिलाया कि जब कर्नाटक में बीजेपी की सरकार थी तो उसने गो-हत्या विरोधी कानून पास किया था जिसे कांग्रेस ने रद्द कर दिया था. ऐसे में सिद्धारमैया का हिंदुत्व कहीं से साबित नहीं होता. योगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार, विकास विरोधी और जातियों के बंटवारे की सियासत से कर्नाटक को पांच साल पीछे धकेल दिया है.

योगी की छवि भगवाधारी फायर ब्रांड नेता की है. हिंदुत्व को लेकर योगी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. कर्नाटक में हाल के सालों में सांप्रदायिक हिंसा के मामले तेजी से उभरे हैं. ऐसे में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए योगी को भेजना एक सोची समझी रणनीति है. बीजेपी ये जानती है कि दक्षिण के दरवाजे पर भगवा फहराने के लिए कर्नाटक में ही सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी.

कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को गुजरात पहुंचे. गुजरात पहुंचते ही वह सबसे पहले सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने पार्टी नेताओं के साथ पहुंचे (फोटो: पीटीआई)

हिंदुत्व और विकास के रथ पर बीजेपी की आक्रमकता को देखते हुए कांग्रेस भी हिंदुत्व की दुहाई दे रही है. खुद राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद को हिंदू बता रहे हैं. ये बदलाव कांग्रेस की रणनीति में गुजरात के बाद आया है. गुजरात में राहुल की मंदिर परिक्रमा से लेकर जनेऊ पहनने के बाद अब कर्नाटक में भी कांग्रेस हिंदुत्व की राह पर है.

कांग्रेस का ‘धर्मपरिवर्तन’ भले ही बीजेपी की राह में रोड़ा नहीं बने लेकिन इसके बावजूद उसे फूंक फूंक कर कदम रखना होगा. केंद्र सरकार में कर्नाटक से मंत्रियों का अच्छा प्रतिनिधित्व है. मोदी सरकार में कर्नाटक से चार मंत्री हैं. चार केंद्रीय मंत्री प्रचार की बड़ी जिम्मदारी निभा सकते हैं. वहीं कर्नाटक बीजेपी में तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं. ऐसे में जहां जिम्मेदारी बढ़ती है तो वहीं मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार को लेकर अंतर्कलह भी उभर सकती है.

Bengaluru: Karnataka BJP BS Yeddyurappa flashes victory sign along with the party members to celebrate the party's victory in Gujarat and Himachal Pradesh Assembly elections, in Bengaluru on Monday. PTI Photo by Shailendra Bhojak (PTI12_18_2017_000142B) *** Local Caption ***

इस वक्त कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बी एस येदुरप्पा बीजेपी के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से करप्शन के आरोंपों से बरी होने के बाद येदुरप्पा तनावमुक्त हो कर मैदान में उतरेंगे. बी एस येदुरप्पा के ही नेतृत्व में बीजेपी को साल 2008 में दक्षिण के किसी राज्य में पहली बार सरकार बनाने का मौका मिला था. कर्नाटक के सबसे बड़े लिंगायत समाज का येदुरप्पा के लिए भरपूर समर्थन माना जाता है. लेकिन पार्टी के भीतर सदानंद गौड़ा और अनंत कुमार जैसे नेताओं की जिम्मेदारी का भी सवाल उठेगा ताकि बीजेपी अंतर्कलह का शिकार न हो.

बहरहाल पार्टी के प्रचार में आक्रमण का फोकस साफ रखना होगा. साथ ही बीजेपी के साथ एडवांटेज ये है कि सत्ता में मौजूदा कांग्रेस सरकार है. ऐसे में हिंदुत्व की लहर के साथ मोदी के विकास के वादे यहां पर सत्ताविरोधी लहर में बीजेपी के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकते हैं. बस सबसे बड़ी जरूरत ये होगी कि ग्रामीण और छोटे इलाकों में पीएम मोदी की ज्यादा से ज्यादा रैलियां रखी जाएं ताकि जनता से जुड़ाव बेहतर रहे. वैसे भी साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में मोदी लहर चली थी जिसकी वजह से बीजेपी को ऐतिहासिक 43.37 फीसदी वोट मिले थे. एक बार फिर आने वाले चुनाव में मोदी कर्नाटक में जनता के बीच होंगे जिससे बीजेपी को मोदी मैजिक की उम्मीद है.

narendra modi

जिस तरह से कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस कमजोर पड़ती जा रही है बीजेपी को ही उसका सीधा फायदा मिल रहा है. ऐसे में कर्नाटक भी बीजेपी के लिए हाथ आया एक मौका है. कर्नाटक हर पांच साल बाद सत्ता बदलने का काम करता आया है. तभी बीजेपी ने भगवा ब्रिगेड उतारकर युद्ध का शंखनाद कर दिया है. लेकिन कांग्रेस के लिए दक्षिण के इतिहास से जुड़ा एक मिथक भी है कि जब कभी कांग्रेस कमजोर पड़ती है तो दक्षिण ही हाथ का सहारा बनता है. आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता लहर के बावजूद दक्षिण ने कांग्रेस का हाथ संभाला था.

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