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संसद में शेर-ओ-शायरी से नाराज हुए जावेद अख्तर, हाथ जोड़ कविता पर दया दिखाने की अपील की

शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान 12 घंटे तक चले बहस में तमाम नेताओं ने अपनी बात कहने के लिए या विपक्षियों पर हमला बोलने के लिए कविता और शेर-ओ-शायरी का सहारा लिया था

Updated On: Jul 24, 2018 05:29 PM IST

FP Staff

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संसद में शेर-ओ-शायरी से नाराज हुए जावेद अख्तर, हाथ जोड़ कविता पर दया दिखाने की अपील की

मशहूर गीतकार, लेखक और कवि जावेद अख्तर ने संसद में नेताओं द्वारा पढ़े जा रहे कविता और शेर-ओ-शायरी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने सांसदों से निवेदन किया है कि कम से कम कविता पर तो दया कर दीजिए. जावेद अख्तर ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के समय नेताओं द्वारा पढ़े गए कविताओं को लेकर ट्वीट किया है.

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि मैं हाथ जोड़कर और विनम्रता के साथ सभी पार्टी के सांसदों से अपील करता हूं कि वे कम से कम कविता पर दया कर दें. उन्होंने कहा कि 12 घंटे चले संसद सत्र के दौरान बिना किसी अपवाद के कविता को या तो गलत शब्दों के साथ पढ़ा गया, या संदर्भ अलग था या तो गलत उच्चारित किया गया.

शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान 12 घंटे तक चले बहस में तमाम नेताओं ने अपनी बात कहने के लिए या विपक्षियों पर हमला बोलने के लिए कविता और शेर-ओ-शायरी का सहारा लिया था. यहां तक की प्रधानमंत्री ने भी एक शायरी के जरिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निशाना साधा था.

प्रधानमंत्री के अलावा अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आप सांसद भगवंत मान ने भी बीजेपी के 'अच्छे दिन' के नारे पर कविता के माध्यम से कटाक्ष किया था. इसके अलवा सीपीएम सांसद मो सलीम, एनडीए सरकार में मंत्री रामदास अठावले और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कविता के द्वारा अपनी बात रखी थी.

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