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क्या प्रधानमंत्री मुस्लिमों की तरफ हाथ बढ़ा रहे हैं!

प्रधानमंत्री मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मौजूदा दौर में उनका भरोसा जीतना मुश्किल है

Syed Mojiz Imam Updated On: Mar 04, 2018 07:40 PM IST

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क्या प्रधानमंत्री मुस्लिमों की तरफ हाथ बढ़ा रहे हैं!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रिपल तलाक को राजनीतिक मुद्दा बनाए हुए हैं. इस मसले पर मुस्लिम एकजुट होकर सरकार के कानूनी मसौदे का विरोध कर रहे हैं. इस कानून के खिलाफ मुस्लिम औरतों का प्रदर्शन कई जगहों पर देखा गया है. इस सब के बीच प्रधानमंत्री मुस्लिम अवाम की तरफ हाथ भी बढ़ा रहे हैं.

बीजेपी के जीत के जश्न के वक्त दो बार अज़ान की वजह से रुके, गुजरात चुनाव में भी ऐसा प्रधानमंत्री ने किया था. इससे पहले कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ने मुसलमानों के एक हाथ में कंप्यूटर और दूसरे हाथ में कुरान देखना चाहते हैं.

देखने में प्रधानमंत्री की मंशा पाक साफ नज़र आ रही है. क्योंकि देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक के साथ सत्ताधारी दल के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. सरकार का दावा है कि तमाम स्कीम अल्पसंख्यकों के लिए चलाए जा रहे हैं. ये भी दावा किया गया कि हज के कोटे में भी इज़ाफा कर दिया गया है. लेकिन मुस्लिम समाज को आश्वस्त करने के लिए प्रधानमंत्री की ये कोशिश ज्यादा कारगर होने की संभावना नहीं है. इसके आगे कुछ और करने की ज़रूरत है. हालांकि प्रधानमंत्री के इस कोशिश से सर्द रिश्तों मे गर्माहट आ सकती है.

प्रधानमंत्री से बातचीत में कोई आपत्ति नहीं

सरकार को लेकर मुस्लिम समाज के रवैया मे बहुत तब्दीली नहीं आई है. खासकर दक्षिणपंथी संगठनों के क्रियाकलापों की वजह से सरकार कटघरे में है. जमाते इस्लामी हिंद के सदर जलालुद्दीन उमरी का कहना है कि मुस्लिम समाज को प्रधानमंत्री से बात करने में कोई हर्ज नहीं हैं. क्योंकि लोकतंत्र में बातचीत से ही हर मसले का हल निकलता है. लेकिन ये सिर्फ एक फोटो ऑपर्च्यूनिटी नहीं होना चाहिए बल्कि मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए.

New Delhi: BJP President and party leaders felicitate Prime Minister Narendra Modi after their victory in North-East Assembly election at party headquarters in New Delhi on Saturday. PTI Photo by Kamal Singh (PTI3_3_2018_000160B)

प्रधानंमत्री की सकारात्मक पहल से मुस्लिम तंज़ीमों में उम्मीद जगी है.लेकिन सवाल भी खड़े किए जा रहें है कि प्रधानमंत्री मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मिलने का वक्त नहीं दे रहे हैं. मुस्लिम समाज को लेकर सरकार के रवैये पर शक किया जा रहा है.

जमीयत उलेमा हिंद की तरफ से कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री का बयान सही है लेकिन हकीकत में भी सरकार को कुछ करना चाहिए ना कि सिर्फ भाषणों तक सिमटे रहना चाहिए.

मुसलमानों में शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर भी सभी चिंतित हैं. सरकार को ऐसा कोई कदम उठाना चाहिए ताकि इसमें सुधार लाया जा सके.शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सुरूर तोराबी का कहना है कि पीएम लगातार ये बात कह रहे हैं. मुसलमानों को तकनीक का फायदा उठाना चाहिए. प्रधानमंत्री के इस बात पर सोचने की ज़रूरत है.

मुस्लिम क्या सोचते हैं?

राजनीतिक दलों के मुसलमान लीडर भी प्रधानमंत्री के इस रवैये से हैरान हुए है. जेडीयू के नेता अफज़ल अब्बास का कहना है कि प्रधानमंत्री का हाथ मुस्लिम समाज को थाम लेना चाहिए लोकतंत्र में सरकार से भाग कर रहने में कोई फायदा नहीं है. सरकार के डेवलपमेंट के ऐजेंडा से फायदा उठाना चाहिए.

हालांकि अफज़ल अब्बास की पार्टी बिहार बीजेपी के सहयोग से सरकार में है. कांग्रेस के नेता शकीलुज्ज़मा अंसारी का कहना है कि ये एक पीआर स्टंट है. क्योंकि प्रधानमंत्री पूरी दुनिया को मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में मुसलमानों की बड़ी कद्र है.

खासतौर पर खाड़ी देशों में सरकार अपनी इमेज सुधारना चाहती है. हकीकत में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इन दो बयानों के राजनीतिक पहलू भी हैं. प्रधानमंत्री की बात पर मुस्लिम तबके में अलग-अलग राय आ रही है. कुछ लोग इस पहल को सही मान रहे हैं .तो कुछ इसे सिर्फ दिखावा करार दे रहे हैं.

जामिया नगर में रहने वाले कांग्रेस के नेता परवेज़ आलम खान का कहना है कि प्रधानमंत्री सिर्फ दिखावा कर रहे हैं. अगर मुसलमानों की इतनी फिक्र है तो कम से कम मुस्लिम संगठनों को बुलाकर बातचीत करनी चाहिए. मसलन ट्रिपल तलाक पर सरकार का रवैया एकतरफा रहा है.

हालांकि इस्लाम के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने कुछ गलत नहीं कहा है. इस्लाम में पढ़ाई की काफी अहमियत है. जमाते इस्लामी हिंद के ही सलीम इंजीनियर का कहना है कि सरकार शिक्षा के सुधार के लिए कुछ करके दिखाए. मुस्लिम लोगों के बीच प्रधानमंत्री के इस रवैये की चर्चा हो रही है.

हफीज़ एजुकेशनल फाउंडेशन के तहत कई स्कूल का संचालन कर रहे कलीमुल हफीज़ का कहना है कि प्रधानमंत्री के इस पहल का स्वागत करना चाहिए.वो मुसलमानों तक पहुंचना चाहते है इसमें कोई बुराई नहीं है.

प्रधानमंत्री ने क्या कहा...

जॉर्डन के शाह की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने कहा कि हर धर्म मानवता को बढ़ावा देने की बात करता है. आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है. बल्कि लड़ाई उनके खिलाफ है जो नौजवानों को भड़का और भटका रहे हैं.

हिंदुस्तान के मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर है. प्रधानमंत्री ने अज़ान की वजह से बीजेपी दफ्तर में चल रही अपनी स्पीच रोक दी थी. जाहिर है कि पीएम अब मुसलानों में संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अजित द्विवेदी का कहना है कि प्रधानमंत्री ये सब कहकर मुसलमानों के खिलाफ हो रहे हिंसा से पल्ला झाड़ना चाहते हैं. क्योंकि नीयत सही है तो सरकार को लव जेहाद से लेकर गाय पर हो रही हिंसा को रोकना चाहिए. प्रधानमंत्री ने सरकार के मंत्रियों के अनुचित बयानों पर भी कोई कार्यवाई नहीं की है.

सूफी इस्लाम के प्रति ज्यादा तवज्जो

25 मार्च को लखनऊ में शिया सूफी सम्मेलन किया जा रहा है. इसमें यूपी के मुख्यमंत्री भी शिरकत करने वाले हैं. इससे पहले दिल्ली में विश्व सूफी सम्मेलन किया गया था. प्रधानमंत्री भी इस दस्तूर की बात कर रहे हैं.

New Delhi: Muslim women at a market in the walled city area of Delhi on Thursday. The Muslim Women (Protection of Rights of Marriage) Bill, 2017, which makes instant triple talaq illegal and void, was introduced in Parliament. PTI Photo by Shahbaz Khan (PTI12_28_2017_000145B)

सरकार सूफी और शिया मसलकों को ज्यादा तरजीह दे रही है. सरकार के ऊपर इल्ज़ाम लग रहा है कि मुसलमानों के विभिन्न मसलकों के बीच मतभेद पैदा करना चाहती है.

इस्लामिक हेरिटेज कॉन्फ्रेंस के बारे में  प्रोफेसर अख्तरूल वासे कहते हैं कि इसमें सभी मसलकों के लोग शामिल थे. हिंदुस्तान का इस्लाम सबको साथ लेकर चलने वाला है और 1000 साल से ये सामंजस्य के साथ चल रहा है. जो दुनियाभर के लिए मिसाल है.

क्यों हो रहा है संशय?

प्रधानमंत्री के रवैये में तब्दीली भले दिखाई दे रहा है लेकिन, हालात इसके बरअक्स गवाही दे रहे हैं. पीएम अपने साथियों के बयानबाज़ी को रोक नहीं पा रहे हैं. जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. बीजेपी के नेता विनय कटियार ने मुसलमानों को पाकिस्तान चले जाने के लिए कहा है.

सरकार में मंत्री अनंत हेगडे़ ने संविधान बदलने की वकालत की है. लव जेहाद को लेकर सरकार का रवैया सुप्रीम कोर्ट में सही नहीं रहा है. केरल की हादिया केस को कोर्ट ने एनआईए कोर्ट को सौंप दिया था. बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मुसलमानों को शिया सुन्नी में बांटने को लेकर कई बयान दिए हैं.

ताजमहल को मंदिर साबित करने की तमाम कोशिश हो रही है. साध्वी निरंजन ज्योति ने मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया था. बीजेपी की रणनीति चुनाव के हिसाब से बदल रही है. प्रधानमंत्री भी चुनाव से पहले सबका साथ सबका विकास वाले नारे के हिसाब से चल रहे हैं. बीजेपी  चाहती है कि 2019 में बीजेपी के खिलाफ मुसलमानों के तीखेपन में कुछ कमीं आ जाए. जिसके लिहाज़ से बयानों मे नरमी दिखाई दे रही है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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