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रामलीला मैदान से 2019 के लिए मोदी की हुंकार: अबकी बार ‘मजबूत’ या ‘मजबूर’ सरकार?

प्रधानमंत्री की तरफ से 2019 की पूरी लड़ाई को 'मोदी बनाम ऑल' बनाने की कोशिश की जा रही है. वो यह दिखाना चाह रहे हैं कि उनकी साफ-सुथरी और छवि और बेहतर सरकार के चलते विरोधी परेशान हो रहे हैं, जिससे बेचैन होकर अब वो कई दलों को मिलाकर एक कुनबा बनाने मे लगे हैं

Updated On: Jan 12, 2019 05:55 PM IST

Amitesh Amitesh

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रामलीला मैदान से 2019 के लिए मोदी की हुंकार: अबकी बार ‘मजबूत’ या ‘मजबूर’ सरकार?

दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने की पूरी कोशिश की. उन्होंने देश भर के सभी कार्यकर्ताओं को बिना रुके, बिना थके 2019 की लड़ाई तक काम करने के लिए गुरु-मंत्र दिया, जिसका इंतजार किया जा रहा था. मोदी ने स्वामी विवेकानंद की बातों को दोहरात हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को गुरु-मंत्र दिया ‘उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको.’

पार्टी की तरफ से पहले ही 350 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है. ‘मिशन 350’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी ने नारा दिया है ‘अबकी बार फिर मोदी सरकार.’ लेकिन, शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन से ठीक पहले लखनऊ में एसपी-बीएसपी के बीच हुए महागठबंधन के ऐलान ने यही सवाल खड़ा कर दिया है क्या बीजेपी का यह 'मिशन 350' पूरा हो पाएगा? क्या पार्टी देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव (2014) के अपने प्रदर्शन को दोहरा पाएगी?

महागठबंधन कर मोदी को रोकने की कोशिशों को ढकोसला बताया 

इसका जवाब मोदी ने दिया. उन्होंने अखिलेश-मायावती के हाथ मिलाने और दूसरे राज्यों में भी महागठबंधन कर मोदी को रोकने की कोशिशों को ढकोसला बताया. मोदी ने समाजवादी पृष्ठभूमि के उन सभी दलों पर प्रहार करते हुए उन पर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा, ‘जो दल कांग्रेस के तौर-तरीकों को बर्दाश्त नहीं कर सके वो कांग्रेस के साथ जा रहे हैं. जिस मतदाता ने इसलिए उर्जा दी कि आप कांग्रेस का विकल्प बनेंगे, उसे ही आप धोखा देने का काम कर रहे हैं?’ इस तरह के महागठबंधन के प्रयोग पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने तेलंगाना से लेकर कर्नाटक तक का उदाहरण दिया.

मायावती और अखिलेश यादव ने लखनऊ में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 2019 चुनाव साथ लड़ने की घोषणा की

मायावती और अखिलेश यादव ने लखनऊ में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 2019 लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने की घोषणा की

मोदी ने कहा, तेलंगाना में कांग्रेस समेत कई दलों ने मिलकर महागठबंधन बनाया था लेकिन, हश्र क्या हुआ. उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री अलग ही परेशानी बयां कर रहे हैं. राजस्थान में भी सरकार बनते ही वहां ट्रेलर शुरू हो गया है कि अगर सरकार चलानी है तो फिर यह केस खत्म करो, यह करो, यह तो अभी ट्रेलर है. मोदी ने कहा कि राजनीति विजन पर चलती है, लेकिन, यह पहली बार हो रहा है कि सारे मिलकर एक व्यक्ति के खिलाफ हो रहे हैं. यह सारे मिलकर एक 'मजबूर' सरकार बनाने में लगे हैं. वो नहीं चाहते हैं कि 'मजबूत' सरकार बने तो फिर देश में उनकी दुकान बंद हो जाए.

मोदी ने 'मोदी बनाम ऑल' की लड़ाई और विपक्षी दलों के मजबूरी के मंसूबे को सामने लाने के लिए आरोपों की झड़ी लगा दी. उन्होंने कहा, ‘उनका रास्ता दलों को जोड़ना है, हमारा रास्ता हर हिंदुस्तानी के दिलों को जोड़ना है. वो अपने हित के लिए मजबूरी का गठबंधन चाहते हैं, हम देश हित में संगठन की मजबूती चाहते हैं. वो मजबूर सरकार चाहते हैं जिससे घोटाला हो सके, लेकिन, हम मजबूत सरकार चाहते हैं जिससे 10 करोड़ परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत सुविधा मिल सके. वो मजबूर सरकार चाहते हैं जिससे किसानों की कर्ज माफी में भी घोटाला हो सके, हम मजबूत सरकार चाहते हैं जिससे देश के किसानों को मदद कर सके. वो मजबूर सरकार चाहते हैं जिससे यूरिया घोटाला, चीनी घोटाला हो सकें. देश मजबूत सरकार चाहता है जिससे किसानों को समय पर खाद मिले और अपनी फसलों का उचित दाम मिले. वो मजबूर सरकार चाहते हैं ताकि फिर कमान वेल्थ जैसे घोटाले हो सकें, भारत मजबूत सरकार चाहता है जिससे, अपने बच्चों को ईमानदारी से खेलों में नाम हो सके. वो मजबूर सरकार चाहते हैं ताकि अंतरिक्ष कंपनियों में भी घोटाला कर सके. हम मजबूत सरकार चाहते हैं ताकि देश गगनयान की सफलता का गौरवगान करे.’

2019 की पूरी लड़ाई ही 'मोदी बनाम ऑल' बनाने की कोशिश की जा रही

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से 2019 की पूरी लड़ाई को ही 'मोदी बनाम ऑल' बनाने की कोशिश की जा रही है. दरअसल वो बार-बार यह दिखाना चाह रहे हैं कि उनकी साफ-सुथरी और छवि और बेहतर सरकार के चलते विरोधी परेशान हो रहे हैं, जिससे बेचैन होकर अब वो कई दलों को मिलाकर एक कुनबा बनाने मे लगे हैं. कुनबा ऐसा जिसमें उनकी मनमानी चल सके और सरकार के भीतर जनता के पैसों की लूट की जा सके.

लगातार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी पर विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को लेकर निशाना साधा जाता रहा है. लेकिन, कांग्रेस के इन आरोपों पर भी मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि 2008 से लेकर 2014 के बीच कांग्रेस शासनकाल में पैसों की बंदरबांट हुई. जिसमें कॉमन प्रोसेस से आने वाले लोगों को लोन मिलने में परेशानी होती रही, लेकिन, कांग्रेस प्रोसेस से आने वाले लोगों को तो महज एक फोन कॉल पर ही लोन मिल जाता था.

Photo Source: @INCIndia

2019 के चुनाव के मद्देनजर राहुल गांधी देश से लेकर विदेशों तक में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं (Photo Source: @INCIndia)

हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों से गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण का बिल पास होने पर सियासी गलियारे से लेकर समाज के निचले तबके तक बहस हो रही है. मोदी ने आरक्षण पर सबका साथ सबका विकास के नारे की बात दोहराकर यह बताने की कोशिश की, कि कैसे बिना दलित, आदिवासी और पिछड़ो की हिस्सेदारी कम किए बगैर सरकार ने सामान्य जाति के गरीबों को भी उनका हक दिलवा दिया.

मोदी के भाषण से एक बात साफ दिख रही थी कि वो आरक्षण के मसले पर विरोधी दलों के प्रचार और भ्रम पैदा करने की कोशिश को दूर करना चाहते हैं. लिहाजा उन्होंने इस मुद्दे पर अपने संबोधन की शुरुआत में ही बोला. एस-एसटी एक्ट में संशोधन के फैसले के बाद सवर्ण तबका काफी नाराज हो गया था. मोदी को भरोसा है कि अब वो तबका फिर बीजेपी के साथ पूरी तरह से खडा रहेगा.

किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा भी कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष की तरफ से उठाया जाता रहा है. प्रधानमंत्री ने किसानों के हक के लिए उठाए गए सभी कदमों की याद दिलाते हुए विपक्ष पर किसानों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पहले किसानों को संकट से निकालने का जिसपर जिम्मेदारी थी, उन्होंने अन्नदाता को मतदाता बनाकर रखा था, हमने अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाया है. मोदी ने एक बार फिर 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के अपने वादे को दोहराया.

मोदी ने राम मंदिर मुद्दे पर भी फिर पुराने स्टैंड को दोहराते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर दिया. कांग्रेस के वकीलों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में मामला टालने की कोशिशों का आरोप लगाकर मोदी की तरफ से राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस को विरोधी साबित करने की कोशिश की गई.

राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कठघरे में खड़ा किया

हालाकि युवाओं से लेकर महिलाओं तक समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए अपनी सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों और बीते पांच साल में आए बदलाव का जिक्र अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने कर मोदी की तरफ से विकास के मुद्दे को ही जनता के सामने ले जाने और उस परिवर्तन को बताने को कहा गया. लेकिन, एक बार फिर राहुल गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया. मोदी ने राहुल गांधी से तुलना करते हुए कहा, ‘क्या ऐसा सेवक पसंद करेंगे जो सामान चोरी करे और घर के लोगों को आपस में लड़ाएं, क्या ऐसा सेवक चाहेंगे जो दो-दो महीने छुट्टी मनाने चला जाए और लोगों को पता भी नहीं चले? जैसे आप अपने घर में सेवक रखते हैं वैसे ही तय कीजिए की देश में कैसा प्रधानसेवक चाहिए? देश को रात-दिन सेवा करने वाला, 18 घंटे काम करने वाला, भावी पीढ़ी की चिंता करने वाला, ऐसा सेवक चाहिए कि वो वाला चाहिए? देश तय करे कि देश को कैसा सेवक चाहिए?’

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आने वाला लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इसलिए रामलीला मैदान में बीजेपी के देश भर के कार्यकर्ताओं को जुटाकर उन्हें चुनावी मंत्र दिया गया

2014 में भी दिल्ली के रामलीला मैदान में चुनाव से ठीक पहले ऐसे ही पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ था, जिसमें तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ हमला बोलने के अलावा जनता में बेहतर विकल्प देने की बात कही गई थी. लेकिन, अब इन पांच वर्षों बाद हालात बदल गए हैं. अब दूसरों पर उंगली उठाने के बजाए अपने काम-काम का हिसाब देना होगा और जनता को बताना होगा कि हम उनकी उम्मीदों पर अगले पांच साल में और बेहतर हो सकते हैं. बीजेपी के लिए राहत की बात यही है कि इन पांच साल में मोदी के सामने कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं उभर पाया जिसपर सभी विपक्षी दल मिलकर दांव लगा सकें.

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