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कॉरपोरेट जगत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रान्ड वैल्यू

जनता में मोदी की लोकप्रियता देखकर कॉरपोरेट जगत भी इसे भुनाना चाहता है.

Updated On: Nov 20, 2016 01:15 PM IST

Krishna Kant

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कॉरपोरेट जगत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रान्ड वैल्यू

पेटीएम के विज्ञापन में मोदी की फोटो, प्रशांत भूषण और केजरीवाल ने उठाए सवाल

आम तौर पर नेताओं की छवि अच्छी नहीं मानी जाती. नेताओं के बारे में धारणा है कि जनता उन्हें हिकारत की नजर से देखती है. लेकिन नरेंद्र मोदी के मामले में सही नहीं है. जनता में उनकी लोकप्रियता देखकर कॉरपोरेट जगत भी इसे भुनाना चाहता है.

कंपनियों को पता है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता फिलहाल किसी भी फिल्मी सितारे से ज्यादा है. दूसरे प्रधानमंत्री अपनी विकास योजनाओं को देशभक्ति की चाशनी में डुबाकर पेश करते हैं जो एक वर्ग को आकर्षित करती हैं.

राजनीतिक विश्लेषक अभय दुबे ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को बताया, 'यह एकदम गलत है. प्रधानमंत्री का फोटो राजनीतिक या सरकारी कार्यक्रम में इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन व्यवसाय के लिए नहीं.’

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दुबे मानते हैं कि ‘प्रधानमंत्री को किसी कंपनी का मॉडल क्यों बनना चाहिए. अगर एक कंपनी ऐसा करेगी तो दूसरी भी ऐसा करेगी. फिर उसे कैसे रोका जाएगा? तब ऐसा हर कोई करने लगेगा.’

विज्ञापन जगत से जुड़े प्रद्युम्न माहेश्वरी ने कहा ‘प्रधानमंत्री तो सबका होता है. इसका कानूनी पहलू क्या है, मुझे नहीं पता. लेकिन प्रधानमंत्री की कोई योजना है, उसके बारे में कोई कंपनी कुछ करती है तो वह प्रधानमंत्री का फोटो इस्तेमाल कर सकती है.'

हालिया समय में भारतीय राजनीति में यह पहली बार है जब निजी कंपनियां किसी राजनेता वो भी इपर से प्रधानमंत्री की तस्वीर को अपने विज्ञापनों में इस्तेमाल कर रही हैं.

राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में पहले पन्ने के विज्ञापन काफी महंगे होते हैं, जिनके लिए लाखों की कीमत अदा करनी होती है. ये कीमत तत्काल प्रभाव से एड बुक करने पर कई गुना बढ़ जाती है. कंपनियां ऐसा तभी करती हैं जब उन्हें इससे बड़ा फायदा हो रहा हो.

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मंगलवार को प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि बैंक और एटीएम दो दिन बंद होंगे, लेकिन ऑनलाइन पेमेंट जारी रहेगा. इसके अगले ही दिन पेटीएम ने हिंदी और अंग्रेजी के कई अखबारों में प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ पहले पेज पर विज्ञापन छपवाया. पेटीएम ने इसे ऐसे पेश किया है जैसे प्रधानमंत्री पेटीएम के ब्रांड एम्बेसडर हों.

खबरों के अनुसार नोटबंदी की घोषणा के अगले ही दिन ऑनलाइन भुगतान सेवा कंपनी पेटीएम के कारोबार में करीब 435 प्रतिशत का उछाल आ गया.

पुराने नोटों के बंद होते ही लाखों उपभोक्ताओं ने ऑफलाइन लेनदेन करने के लिए पेटीएम का उपयोग किया. इससे पेटीएम के इस्तेमाल में 435 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. पीटीएम के मौजूदा ग्राहकों द्वारा अपने पेटीएम वॉलेट में पैसे डालने में 1000 प्रतिशत की वृद्धि और ऑफलाइन भुगतान के कुल मूल्य में 400 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई.

पेटीएम के विज्ञापन में प्रधानमंत्री की तस्वीर के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने मोदी की आलोचना करनी शुरू कर दी. दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा, 'बेहद शर्मनाक. क्या जनता यह चाहती है कि उनके प्रधानमंत्री निजी कंपनियों के लिए विज्ञापन करें? कल अगर ये कंपनियां कुछ गलत करेंगी, तो उनके खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा?'

केजरीवाल ने अगले ट्वीट में सवाल उठाया, 'पीएम मोदी की घोषणा से सबसे ज्यादा फायदा पेटीएम को हुआ है. अगले दिन पीएम की तस्वीर विज्ञापनों में देखने को मिली. मिस्टर पीएम, डील क्या है?'

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीटर पर लिखा, 'आश्चर्य है! पेटीएम ने मोदी की तस्वीर के साथ ऐड छापा है. क्या उन्हें पहले से खबर थी?'

पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर ने केजरीवाल के जवाब में ट्वीट किया, 'डियर सर, सबसे बड़ा फायदा देश को होगा. हम बस एक टेक स्टार्टअप हैं जो फाइनेंशियल इन्क्लूजन में मदद कर और भारत को प्राउड करना चाहते हैं.'

एक यूजर अमित ने लिखा, 'इस देश के 95 फीसदी आम लोगों को पेटीएम के बारे में पता ही नहीं है तो वो ट्रांज़ेक्शन कहां से करेंगे? एक अन्य यूजर अलोक जी न्यूज फैन ने लिखा, 'पहले जियो और अब पेटीएम वाले ने देश के सभी अखबारो में प्रधानमंत्री जी की फोटो छाप कर विरोधियो में और जलन बढ़ा दी' कपिल ने ट्वीट किया, 'पेटीएम को इस फैसले के बारे में पहले से कैसे पता था? मेरी समझ से अखबारों में पहले से बुक किए जाते हैं.'

अभिषेक शर्मा ने फेसबुक पर लिखा, 'इधर सरकार ने बिना छुट्टा पैसे के मार्केट और बैंक से हजार पांच सौ उड़ा लिए और प्लास्टिक मनी यानी क्रेडिट-डेबिट से आगे की सोच वाले पेटीएम पर हाथ रख दिया. एक ओर आर्थिक आतंकवाद पर चोट की बात होती है तो ठीक उसके बाद आरोपों की ओट से उद्योगपतियों पर सरकार का स्पष्ट हाथ नजर आता है.'

कुछ समय पहले रिलायंस ने जियों लॉन्च करते हुए डिजिटल इंडिया के हवाले से ऐसा ही विज्ञापन दिया था. हालांकि, विज्ञापन और कॉरपोरेट जगत के लोग इसे बुरा नहीं मानते.

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