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पीएम के अपने बच्चे नहीं हैं, उन्हें खोने का दुख वो नहीं समझेंगे: चंद्रशेखर आजाद

'मैंने 'सवर्णों' को अपना पक्ष साफ करने का एक मौका दिया. लेकिन उन्होंने हमेशा एससी/एसटी अधिनियम और आरक्षण का विरोध किया है. और आप उनके लिए मतदान करना चाहते हैं? हमने फैसला किया है कि हम ऊपरी जाति के लिए वोट नहीं देंगे.'

Updated On: Dec 09, 2018 06:08 PM IST

FP Staff

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पीएम के अपने बच्चे नहीं हैं, उन्हें खोने का दुख वो नहीं समझेंगे: चंद्रशेखर आजाद

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने रविवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला. बुलंदशहर हिंसा मामले पर हमला करते हुए आजाद ने कहा कि प्रधान मंत्री को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए.

फेसबुक लाइव के माध्यम से बोलते हुए चंद्रशेखर ने कहा, 'मैं प्रधान मंत्री मोदी से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और देश भर में गाय वध पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करता हूं. आखिर बीजेपी शासित राज्यों में गाय वध की अनुमति क्यों है? प्रधान मंत्री मोदी का अपना कोई बच्चा नहीं है इसलिए वो बच्चों को खोने का दर्द समझ नहीं पाते हैं (मवेशियों की कथित हत्याओं से जुड़ी हिंसा के लिए). उनके कैबिनेट में आधे मंत्रियों के बच्चे नहीं हैं और इसीलिए वे इस तरह की हिंसा में बेटे, पिता या पति को खोने के दर्द को नहीं समझते हैं.'

3 दिसंबर को बुलंदशहर जिले के एक गांव में लगभग 400 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया. पास के जंगल में गाय की हड्डियां पाई जाने के बाद ये हमला हुआ. हिंसा के दौरान गोलीबारी में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक 20 वर्षीय युवक की मृत्यु हो गई.

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आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल को 'आतंकवादी संगठन' बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा, 'ये लोग देश के सांस्कृतिक ताने बाने को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. बाबा साहेब ने 1956 में ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बाद में प्रतिबंध हटा दिए गए थे.'

फाइल फोटो

फाइल फोटो

सवर्णों को वोट न देने का आह्वाहन:

पदोन्नति में आरक्षण जारी करने के बारे में चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एक भी एससी/एसटी को प्रोमोशन नहीं दिया क्योंकि वो ऐसा करना ही नहीं चाहते थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए शिक्षा बजट में जानबूझ कर कमी की गई. साथ ही सभी से आग्रह किया था कि वे ऊंची जातियों को वोट न दें.

आजाद ने कहा, 'मैंने 'सवर्णों' को अपना पक्ष साफ करने का एक मौका दिया. लेकिन उन्होंने हमेशा एससी/एसटी अधिनियम और आरक्षण का विरोध किया है. और आप उनके लिए मतदान करना चाहते हैं? हमने फैसला किया है कि हम ऊपरी जाति के लिए वोट नहीं देंगे.'

लाइव चैट में के दौरान, उन्होंने 18 दिसंबर को हापुड़ जिले में एक रैली की भी घोषणा की और लोगों से बड़ी संख्या में आने का आग्रह किया.

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