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मीडिया पर बाहर का नियंत्रण तबाही पैदा कर सकता है: पीएम

मीडिया पर किसी बाहरी नियंत्रण की कल्पना नहीं की जा सकती

Updated On: Nov 20, 2016 03:16 PM IST

FP Staff

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मीडिया पर बाहर का नियंत्रण तबाही पैदा कर सकता है: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया पर किसी बाहरी नियंत्रण की कल्पना नहीं की जा सकती.

हाल में कुछ मीडिया संस्थानों पर सरकारी प्रतिबंध को लेकर मचे बवाल के बाद प्रधानमंत्री का यह बयान काफी अहम है.

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'प्रेस काउंसिल एक स्वतंत्र व्यवस्था है, इस क्षेत्र की स्वतंत्रता बनाए रखना और कभी कोई तकलीफ आए तो खुद ही बैठ कर सुलझाना. पुराने युग में इतनी चुनौतियां नहीं थीं, जितनी इस युग में हैं.'

उन्होंने कहा, 'पहले पत्रकारों के पास सोचने का समय रहता था, तब भी दिमाग में रहता था कि शायद ये ठीक रहेगा या ये ठीक नहीं रहेगा.'

'वे रात तक सुधार करवाते थे. वे रात को घर से वापस आकर भूल सुधार करते थे. उसके बाद लिखने के बाद से सुबह छपने तक एक दबाव रहता था, कि कल छपेगा तो क्या प्रभाव होगा.'

'आज पत्रकारों के पास ये अवसर ही नहीं है. इतनी तेज गति से दौड़ना पड़ रहा है, ऐसे में उसके सामने बड़ा संकट रहता है.'

नई पीढ़ी के पत्रकारों को बेहतर पत्रकारिता का अवसर देने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'ऐसे संस्थानों की कठिनाइयों को कैसे दूर करें?'

'सीनियर लोग बैठ कर कोई मैकेनिज्म तैयार करें. महात्मा गांधी कहते थे कि अनियंत्रित लेखनी संकट पैदा कर सकती है, लेकिन बाहर का नियंत्रण तबाही पैदा कर सकता है. इसलिए बाहर का नियंत्रण की कल्पना हो ही नहीं सकती.'

आत्म अवलोकन को बताया कठिन काम

प्रधानमंत्री ने कहा, अपना अवलोकन बहुत कठिन काम है. कंधार कांड के समय का भी हवाला दिया. कहा, जैसे जैसे यहां लोगों को गुस्सा आ रहा था, आतंकियों का हौसला बढ़ रहा था.

मीडिया को नसीहत देते हुए कहा, 26/11 एक और बड़ा अवसर था. इतने विचार आ गये कि आत्मनियंत्रण नहीं हो सका. मैं मानता हूं कि गलतियां हमसे भी होती हैं, गलतियां आपसे भी होती हैं.

लेकिन उसमें बहुत जिम्मेवार वर्ग है जो चाहता है कि हमीं इसे बुराइयों से कैसे बचाएं. इस अपने आप में इस जगत के लिए एक उम्दा प्रयास है. ये चलते रहना चाहिए. लेकिन बाहर के नियंत्रणों से बात नहीं बनेगी.'

प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी के दिनों को याद करते हुए कहा, 'इमरजेंसी के समय प्रेस काउंसिल को ही खत्म कर दिया गया था.

मोरार जी भाई की सरकार आई तो फिर से इसकी शुरुआत हुई. तब मीडिया के प्रति बहुत उदारता थी. प्रेस से जुड़े लोगों का ये दायित्व बनता है कि हम नई पीढ़ी के लिए क्या कर सकते हैं.'

उन्होंने सरकार और मीडिया के बीच समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि सरकार की जानकारियों का अभाव, इसके कारण समस्याएं कैसे पैदा होती हैं, इसे बताया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, 'सरकार को जानकारियां देने के तरीके पुराने होंगे तो कैसे होगा? सरकार को जानकारियां देने में प्रेस के लोग मदद कर सकते हैं. पत्रकारिता का दायित्व है कि जो दिखाई देता है उसके सिवाय भी कुछ खोजना. वह समय पर दिखाई दे और सुनाई.'

पत्रकारों की हत्या पर जताई चिंता

नेशनल प्रेस दिवस पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'दुर्भाग्य ये भी है कि सरकारों में सेलेक्टिव लीकेज का शौक हो जाता है.'

'ऐसी सरकार की भी कमियां, और अगंभीर रवैया भी बदलाव की मांग करता है. ये सरकार के सामने रखा जाए. सरकार सुने या न सुने.' उन्होंने कहा, 'इन दिनों खासकर मीडिया से जुड़े लोगों की जो हत्या की खबरें आई हैं, वे अति चिंताजनक है. किसी की इसलिए हत्या हो जाए कि वह सत्य उजागर कर रहा था, यह बहुत गंभीर है.

हम सरकारों का दायित्व बनता है कि ऐसे लोगों के जो भी गलत आचरण होता है, उसे रोकना चाहिए, उन्हें न्याय मिलना चाहिए, वरना सत्य को दबाने का बहुत चिंताजनक तरीका है. कोई किसी पर हमला करे, यह बोलने की स्वतंत्रता पर बहुत बड़ा जुल्म है.'

दोतरफा संवाद कायम करने पर जोर

प्रधानमंत्री ने मीडिया के आत्मनियंत्रण पर जोर देते हुए कहा, 'दोतरफा संवाद कायम हो तब बात बनेगी.'

'जो भी फायदा है वो जनता को जाना चाहिए और भविष्य के लिए होना चाहिए. आवश्यक है हमारा समन्वय जितना अधिक बढ़े, हम सबको जोड़कर जितना चलेंगे, सकारात्मक छवि बनाने में हमारे काम आ सकता है.'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'स्वस्थ प्रतियोगिता के जरिये मीडिया बहुत बड़ी सेवा कर सकता है. इन दिनों मीडिया के द्वारा सफाई को लेकर अवार्ड देना, लोगों को सम्मानित करना, ये जो माहौल शुरू हुआ है, ये भारत को नई ताकत देता है.'

'इसमें एक प्रतियोगिता का नेचर बन रहा है. ये सकारात्मक है. हमने पहले भी कहा है कि जो टीवी के पर्दे पर दिखता है, अखबार के पन्नों पर दिखता है, वही भारत नहीं है. इन सब चीजों को बाहर लाने पर हम बल देंगे तो अच्छा वातावरण बनेगा.'

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